सुनीता गाबा
आजकल बच्चों को खाना खिलाना माता-पिता के लिए समस्या बनता जा रहा है। अधिकतर पेरेंटस बच्चों के साथ हो रही फूड फाइट से परेशान रहते हैं। अगर इसका आंकलन हम अन्य देशों के बच्चों से भी करें, वहां भी यही स्थिति है। बच्चों को अगर उनकी पसंद का जंक फूड खाने को दें तो उन्हें भूख भी लगी होती है और वह उसे खुशी से भी खाते हैं पर प्लेट में हरी सब्जी, दाल, ताजे फल देखकर भूख न लगने का बहाना बनाते हैं। इसके पीछे इंस्टेंट फूड की बढ़ती लोकप्रियता ही कारण है।
जंकफूड या बाहरी खाने में उन्हें नमक, चीनी और फैट्स की मात्र इतनी मिल जाती है कि कुछ समय बाद बच्चों का वजन बढ़ना प्रारंभ हो जाता है। शरीर में पोषण की कमी आती जाती है। इन सब गलत परिणामों को देखते हुए कई देशों ने स्कूल में छोटे बच्चों को ब्रेकफास्ट और लंच देने की प्रक्रि या को अपना लिया है। एक पीरियड में टीचर बच्चों में हैल्दी फूड के प्रति जागरूकता पैदा करने की कोशिश करते हैं।
बच्चों को एक फल सब्जी दिखा कर उसके रोचक स्वाद के बारे में बताया जाता है ताकि बच्चों के मन में उन्हें खाने की लालसा उत्पन्न हो। टीचर्स इस बात का ध्यान रखते हैं कि सब्जी फल से मिलने वाले पोषण की चर्चा अधिक नहीं करते बल्कि उसके टेस्ट की चर्चा अधिक करते हैं जैसे किस फल का स्वाद खट्टा है, मीठा है, खाने में नर्म है या सख्त, कौन से रंग में कौन कौन से फल और सब्जियां आती हैं, अगर पानी में इन्हें डाला जाए तो पानी कौन से रंग का हो जाता है, यही बताते हैं रोचक किस्से कहानियां सुना कर। इंडियन मदर्स को भी कुछ नए अंदाज अपनाने चाहिएं ताकि अपने बच्चों को वो सब खिला सकें जो उनके लिए सेहतमंद हैं।
आइए जानें:-
ल्ल कुछ भी नया टेस्ट पैदा करने के लिए उसकी प्लेट में कम मात्र सर्व करें। प्रयास कर उसे आकर्षक बनाएं। हो सकता है धीरे धीरे उस स्वाद को पसंद कर ज्यादा खाना शुरू कर दें।
ल्ल उनकी प्लेट में जो भी परोसें, वही सब अपनी प्लेट में भी परोसें। जब बच्चा स्वयं खाने वाला हो जाए तो उसके साथ बैठकर वही खाएं जो वह खा रहा है। अगर छोटा है तो अपनी प्लेट में भी वही डालकर साथ में रखें ताकि बच्चा समझ सके कि यही खाने में बना है।
ल्ल बच्चों के लिए थोड़ी कलरफुल क्राकरी रखें ताकि बच्चे एक ही बर्तन में खाकर बोर न हो। हो सके तो प्लेट गोल चोकोर खरीदें
ल्ल छुट्टी वाले दिन कोई एक चीज बनाते समय बच्चे की मदद लें ताकि उसे जिज्ञासा हो कि कैसे बनाया जाता है। इसी प्रकार फ्रूट काटने में भी मदद लें। कभी राउंड स्लाइस, कभी छोटे टुकड़ों में, कभी लंबे टुकड़ों में फ्रूट काटकर दें। खाने में या फ्रूट सलाद में उनसे नमक, चाट मसाला, कालीमिर्च पाउडर डलवाएं ताकि उन्हें स्वाद चेक करने की इच्छा हो कि कैसा बना है।
ल्ल बच्चों को भूख लगने पर ही खाने को दें ताकि भूख के सिगनल को समझ सकें और खाने के बाद पेट भरने के सिंगनल को। जब बच्चे को भूख लगी हो तो वह खाने से समझौता आसानी से कर लेते हैं।
ल्ल बच्चों को छोटी उम्र से ही सिखाना जरूरी है कि वो भूख के सिगनल को पहचान सके। अगर आप थोड़ी थोड़ी देर में उसे खुद खाने को देते रहेंगे तो उसे भूख का सिगनल समझ नहीं आएगा और नखरे अधिक करेगा।
ल्ल बच्चों को कलरफुल सब्जियां बना कर दें, इसी प्रकार परांठा, पूड़ी, रोटी भी सब्जियों को पीसकर आटा गूंथ कर दें ताकि उनका आकर्षण खाने में बढ़े।
ल्ल किशोरावस्था में लडके तथा लड़कियों को बाहर के खाने का स्वाद अधिक पड़ जाता है। लड़कियों को उनकी ब्यूटी बरकरार रखने के लिए हैल्दी फूड के बारे में उन्हें बताएं और पीरियड्स में हुए ब्लड लॉस को पूरा करने के लिए हेल्दी खाना ही बेहतर आप्शन होता है। लडकों को स्ट्रांग बॉडी बनाने के लिए हेल्दी फूड ही उनके लिए बेहतर है, उन्हें बताएं।
ल्ल खाने की मेज पर एक साथ बैठें और अपनी बच्ची के साथ खाएं। उसे अपने आप खाना खाने दें। अगर वह अपनी उंगलियों से खाना पसंद करती है, तो इस बात पर जोर न दें कि वह चम्मच का उपयोग करें। एक बार जब वह निपुण हो जाएगी, तो वह चम्मच से खाएगी।
ल्ल भोजन के दौरान खिलौने, टीवी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों जैसी ध्यान भटकाने वाली चीजों को दूर रख दें। बातचीत से भोजन के समय को एक मजेदार और आरामदायक सोशल समय बनाने की कोशिश करें।
ल्ल उसके थोड़ा सा दें। अगर वह ज्यादा मांगती है केवल तभी और दें। बच्चों के लिए एक बड़ा हिस्सा तनाव होता है।
ल्ल आप खाने के रंगों के बारे में बात कर सकती हैं लेकिन खाने पर नकारात्मक टिप्पणी कभी न करें।
ल्ल वह जो अच्छा करती है उसका वर्णन करके उसकी प्रशंसा करें। बच्चों को सीखने के लिए स्वीकृति की आवश्यकता होती है कि वे जो करते हैं वह सही या उचित है।
ल्ल कम पसंदीदा खाने या सब्जियां खाने के लिए उसे छोटे गैर-खाद्य उपहार से पुरस्कृत करें, उदाहरण के लिए कार्टून स्टिकर जो उसे पसंद हों।
ल्ल कभी भी उसे डेसर्ट या परिष्कृत स्नैक्स जैसे चिप्स, या चॉकलेट से पुरस्कृत न करें।
ल्ल न खाने के लिए कभी भी उससे बहस, डांट, या दंडित न करें। इससे खाने की अधिक समस्या हो सकती है।
ल्ल अधिकांश बच्चे भोजन में 15 से 20 मिनट के भीतर पर्याप्त खा लेते हैं। लंबे भोजन के लिए उनमें ध्यान अवधि नहीं होती है। जब आप देखें कि उसका पेट भर गया है तो उसे टेबल से उतरने दें।
ल्ल उनके साथ 30 मिनट या उसके आसपास में खाना खत्म करने के लिए एक उचित भोजन का नियम बनाए। अगर समय सीमा समाप्त हो जाए तो खाना हटा दें।
ल्ल यदि वह अपना खाना बहुत कम खाते हैं तो तुरंत दूध या अन्य पसंदीदा खाद्य पदार्थ न दें। यह सिर्फ उसे बताता है कि भोजन उसके लिए उपयुक्त नहीं है। इसके बजाय आप अगला स्नैक उसे शेड्यूल से थोड़ा पहले दे सकती हैं।

