नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सनातन धर्म में अमावस्या को एक विशेष पवित्र दिन के रूप में पूजा जाता है। प्रत्येक माह में अमावस्या होती है, लेकिन माघ मास की अमावस्या का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। इसे मौनी अमावस्या या माघी अमावस्या कहा जाता है। इस दिन गंगा के जल को अमृत के समान माना जाता है, जो पुण्य और कल्याण का स्रोत होता है। इस दिन गंगा में स्नान करने से व्यक्ति को असीमित पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में मानसिक शांति व आध्यात्मिक उन्नति मिलती है।
मौनी अमावस्या के दिन प्रयागराज स्थित त्रिवेणी संगम में लाखों श्रद्धालु पवित्र डुबकी लगाने के लिए पहुंचते हैं। माघ मेला के दौरान यहां विशेष स्नान और धार्मिक अनुष्ठान होते हैं, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति और पुण्य का अनुभव कराते हैं। इस दिन का महत्व केवल स्नान और दान-पुण्य तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह पितरों की आत्मा की शांति और पितृ दोष से मुक्ति पाने का भी एक खास अवसर होता है। कई लोग इस दिन विशेष उपाय करते हैं, जैसे कि पितरों को तर्पण अर्पित करना, ब्राह्मणों को भोजन और वस्त्र दान करना, ताकि वे जीवन में सुख-समृद्धि, मानसिक संतुलन और आध्यात्मिक शांति प्राप्त कर सकें।
कब है मौनी अमावस्या 2026?
वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ माह की अमावस्या 18 जनवरी 2026 को शुरू होगी। इस तिथि की शुरुआत सुबह 12 बजकर 3 मिनट पर होगी और यह 19 जनवरी 2026 को सुबह 1 बजकर 21 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में इस साल मौनी अमावस्या 18 जनवरी 2026 को मनाई जाएगी।
इस दिन श्रद्धालु खासकर त्रिवेणी संगम और गंगा नदी में स्नान करते हैं, उसके बाद दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। यह दिन पवित्र और लाभकारी माना जाता है, क्योंकि इसे करने से पितृ दोष से मुक्ति, मानसिक शांति और आध्यात्मिक लाभ प्राप्त होते हैं।
मौनी अमावस्या पर पितृ दोष से मुक्ति के उपाय
पितरों का तर्पण करें
मौनी अमावस्या के दिन पितरों की शांति और आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण उपाय पिंडदान, श्राद्ध और तर्पण करना है। इस दिन इन धार्मिक क्रियाओं को करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और पितृ प्रसन्न होते हैं। तर्पण के दौरान जल, गंध, अक्षत (चावल) और अन्य पारंपरिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। ऐसा करने से जीवन में आने वाली बाधाओं और संकटों में कमी आती है और परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
पितरों को अर्पित करें भोजन
वैदिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या वह दिन है जब पितृ अपने वंशजों से मिलने पृथ्वी पर आते हैं। इस दिन व्रत रखकर पवित्र नदी में स्नान करना और दान-पुण्य करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इसके साथ ही पितरों को भोजन अर्पित करना बहुत फलदायी होता है। ऐसा करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है, उनके आशीर्वाद से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
पीपल के नीचे जलाएं दीपक
मौनी अमावस्या की शाम को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाना बहुत शुभ माना गया है। पीपल के पेड़ को देवताओं का वास स्थान माना जाता है और इस दिन दीपक जलाने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। इसके साथ ही पीपल पर जल चढ़ाने और दीपक जलाने से परिवार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और पितृ दोष दूर होता है।

