- ग्रीन बेल्ट में अवैध निर्माणों की आई बाढ़, बना दिए गए दर्जनों रेस्टोरेंट
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ग्रीन बेल्ट को लेकर एनजीटी गंभीर हैं। याचिका भी दायर है, मगर इसके बाद भी ग्रीन बेल्ट में निर्माण कैसे चल रहे हैं? इसके लिए जवाबदेही किसकी बनती हैं। एमडीए के इंजीनियर भी इसमें कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर रहे हैं। परतापुर से लेकर पल्लवपुरम तक दो दर्जन से ज्यादा रेस्टोरेंट बन गए हैं। कुछ निर्माणाधीन चल रहे हैं। इन पर कोई कार्रवाई एमडीए के इंजीनियर नहीं कर रहे हैं।
अवैध निर्माण भविष्य में दिक्कत पैदा करेगा। क्योंकि एनएच-58 छह लेन करने की प्लानिंग बन रही हैं। इसके बाद चौड़ीकरण होगा। यही नहीं रोड वाइडिंग छोड़कर ग्रीन बेल्ट में ये तमाम रेस्टोरेंट बना दिये गए हैं या फिर निर्माण चल रहे हैं। इन पर कोई कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही हैं? जिन इंजीनियरों के कार्यकाल में ये रेस्टोरेंट ग्रीन बेल्ट में तैयार हुए हैं, उनके खिलाफ भी कार्रवाई होनी चाहिए।
क्योंकि जिम्मेदार सिर्फ अवैध निर्माणकर्ता ही नहीं, बल्कि इंजीनियर भी होने चाहिए। इंजीनियरों की अनदेखी के चलते या फिर यूं कहे की सेटिंग के चलते अवैध निर्माण ग्रीन बेल्ट में चल रहे हैं। इसमें सख्ती के साथ अवैध निर्माण बंद होने चाहिए, मगर एमडीए के इंजीनियर निर्माण बंद नहीं करा पा रहे हैं।
भाजपा नेता के अवैध कॉम्प्लेक्स की 31 को होगी सुनवाई
मेरठ: सुर्खियों में बने भाजपा नेता के अवैध कॉम्प्लेक्स की 31 को सुनवाई होगी। इस कॉम्प्लेक्स के अवैध निर्माण को लेकर पल्लवपुरम थाने में भाजपा नेता आदित्य चौधरी उर्फ विक्रांत चौधरी के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज करायी जा चुकी हैं। अब बिल्डर विक्रांत ने खुद को बीमार होना बताकर पीछा छुड़ाने की कोशिश की हैं, लेकिन एमडीए में अब 31 को फिर से सुनवाई की डेट फिक्स कर दी गई हैं।
इस मामले में बड़ी कार्रवाई होना तय माना जा रहा हैं। क्योंकि पहले ही अवैध कॉम्प्लेक्स को गिराने के आदेश कमिश्नर और एमडीए ने किये थे। इसके खिलाफ कमिश्नर के यहां अपील की थी, जिसे कमिश्नर ने खारिज कर दिया था। अब बिल्डर विक्रांत के खिलाफ कार्रवाई होना तय माना जा रहा हैं। इसमें कोई टाल-मटोल नहीं हो सकती।

