Saturday, April 11, 2026
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नारेबाजों को नहीं, विकास करने वालों को देंगे वोट

  • बसपा और कांगे्रस को बताया हाशिए पर
  • सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी के समर्थन में बोलते दिखे लोग

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: प्रदेश में लोकतंत्र का पर्व चल रहा है। भारी-भरकम वायदों और दावों की फेहरिस्त के साथ तमाम राजनीतिक दलों के रथ फिलहाल पश्चिम के पथ पर हैं। प्रत्याशी अपने भाषणों में वेस्ट की प्रत्येक मांग को शामिल कर लोगों के दिलों में जगह बना लेना चाहते हैं। कोशिश यही है कि उनका प्रचार रथ विजय रथ में बदल जाए। मगर इस बार जनता भी पीछे नहीं है, वह भी पार्टी और प्रत्याशी के काम और व्यवहार को कसौटी पर रखकर वोट करना चाहती है।

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किठौर विधानसभा की बात करें तो यहां से भाजपा ने अपने सीटिंग एमएलए सत्यवीर त्यागी को प्रत्याशी बनाया है तो सपा-रालोद गठबंधन ने इस विधानसभा पर हैट्रिक लगा चुके पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर को मैदान में उतार रखा है। कांगे्रस ने यहां बबीता गुर्जर को टिकिट दिया है।

बसपा ने भी अपनी रिवायत दोहराते हुए केपी मावी पर गुर्जर कार्ड खेला है। बहरहाल, किठौर सीट को कौन फतह करेगा यह तो भविष्य के गर्भ में है। लेकिन अभी तक यहां सत्यवीर त्यागी और शाहिद मंजूर के बीच कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है। पेश है किठौर की जनता से बातचीत पर आधारित रिपोर्ट…

किठौर निवासी अनिल रस्तौगी का कहना है कि जनप्रतिनिधि ऐसा हो जो जनता के सुख-दुख को समझे। लोगों के बीच रहकर क्षेत्र का विकास करे। जनता के काम आए। भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी चुने जाने के बाद आमजन से दूर रहे। खास लोगों में उनका आना-जाना रहा। बसपा व कांग्रेस प्रत्याशी नए चेहरे हैं। जबकि शाहिद मंजूर हमेशा किठौर की जनता के बीच रहते हैं। इस बार फिर उन्हीं को वोट किया जाएगा।

कौशिक टेंट हाउस के स्वामी गुंजन कौशिक का कहना है कि सबका साथ सबके विकास के नारे पर भाजपा सत्ता में आई। मगर सत्ताधारी विधायक सत्यवीर त्यागी सपा शासनकाल में बने आईआईटी को फैकल्टी तक नहीं दिला पाए। तहसील के लिए किठौर समुचित स्थान है। सत्यवीर त्यागी पक्षपात के चलते माछरा या खरखौदा में तहसील बनने की पैरोकारी करते रहे, लेकिन तहसील कहीं नहीं बनी। बसपा और कांग्रेस का जनाधार सिमट रहा है। ऐसे में यहां शाहिद मंजूर से बेहतर कोई नहीं।

कस्बा शाहजहांपुर निवासी सुंदर खटीक का कहना है कि जीत के बाद भाजपा विधायक सत्यवीर त्यागी जनता के बीच नहीं पहुंचे। कुछ खास लोगों से उनका मिलना-जुलना रहा होगा। गत चुनाव में उन्होंने शाहजहांपुर में फलमंडी बनवाने का वायदा किया था जो पूरा नहीं हुआ। जबकि सपा सरकार में शाहजहांपुर को नगर पंचायत का दर्जा मिला। कस्बे की तमाम सड़कें सपा शासनकाल में बनीं। शाहिद मंजूर उनके पड़ोसी कस्बे के हैं। इसलिए वोट का हक उन्हीं का है। बसपा और कांगे्रस हाशिए पर जा पहुंची हैं।

जड़ौदा के पूर्व प्रधान नजीर हसन का कहना है कि पूरे पांच साल में एक दो बार विधायक सत्यवीर त्यागी गांव गए होंगे। विकास ऐसा किया है कि सपा सरकार में बना राजकीय इंटर कॉलेज आजतक सफेद हाथी बना खड़ा है। विधायक उक्त कॉलेज को शिक्षा विभाग को हैंडओवर नहीं करा पाए। यही वजह है कि आठ वर्ष पूर्व बनकर तैयार हुई इस कॉलेज बिल्डिंग में आजतक क्लासेज नहीं चल पाईं हैं। शाहिद मंजूर जनता के बीच रहकर उनकी समस्या का समाधान करते हैं। किठौर के आवाम के लिए उनसे बेहतर विकल्प नहीं।

खरखौदा निवासी दीपक त्यागी, प्रदीप त्यागी, नरेश त्यागी आदि का कहना है कि किठौर विधानसभा खासतौर पर खरखौदा क्षेत्र में सपा शासनकाल में विकास की बयार बही। शाहिद मंजूर ने राजकीय महिला डिग्री कॉलेज, मॉडर्न इंटर कॉलेज, दो विद्युत उपकेंद्र निर्माण कराया। जबकि सत्यवीर त्यागी ने खरखौदा की अनदेखी की है। इसलिए वोट शाहिद मंजूर को दिया जाएगा। बसपा कांगे्रस के प्रश्न पर कहा कि वह फिलहाल सत्ता के इर्द-गिर्द भी नहीं हैं।

फिर साथ आए शाहिद, जब्बार

दुश्मनी का सफर एक कदम दो कदम, हम भी थक जाएंगे तुम भी थक जाओगे। डा. बशीर बद्र की ये पंक्तियां शनिवार को किठौर के राधना में उस वक्त चरितार्थ हो उठीं जब हालात से बेबस सियासी रण के दो धुर-विरोधी धुरंधर फतह के लिए एक हो गए। गिले-शिकवे दूर कर दोनों ने नई दोस्ताना जिंदगी की शुरुआत की है।

राधना निवासी प्रधान जब्बार और पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर आपस में बहुत घनिष्ठ थे। मगर वक्त में बदलाव के साथ रिश्तों में दरार आई और प्रधान जब्बार बसपा में चले गए। 2015 में प्रधान जब्बार ने अपने बेटे वसीम जब्बार को शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश के मुकाबले में वार्ड-31 से जिला पंचायत चुनाव भी लड़ाया। जिसमें नवाजिश वसीम से बहुत कम अंतर से पराजित हुआ। इसके बाद दोनों के बीच सियासी अदावत शुरू हो गई। दो दशक से ज्यादा दोनों धुरंधरों ने एक-दूसरे के साथ सियासी अठखेलियां खेलीं।

मगर बेबस हालातों ने दोनों को फिर उसी मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया जहां से वह बिछड़े थे। बहरहाल शनिवार को जब्बार प्रधान के बुलावे पर शाहिद मंजूर राधना में उनके आवास पर पहुंचे जहां प्रधान के परिवार ने उनका न सिर्फ जोरदार स्वागत किया बल्कि शाहिद मंजूर को पूर्ण समर्थन के साथ चुनाव लड़ाने का ऐलान कर दिया। बता दें कि प्रधान जब्बार की क्षेत्र में मजबूत पकड़ है।

वर्तमान में उनकी पत्नी मुन्नी बेगम जिला पंचायत सदस्य और पुत्रवधु तबस्सुम ग्राम प्रधान है। वहीं शाहिद मंजूर को भी क्षेत्र में अपार जनसमर्थन मिल रहा है। इस बार उनके विरोधी भी उनके साथ हैं। मुंडाली के अजराड़ा से पूर्व प्रधान बाबू खां भी शाहिद को समर्थन दे चुके हैं।

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