Wednesday, January 28, 2026
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World Equality Day: महिला समानता दिवस आज, श्वेता त्रिपाठी ने कहा- बराबरी की राह में परिवार की अहम भूमिका

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। हर साल 26 अगस्त को महिला समानता दिवस मनाया जाता है। इस दिन का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं के अधिकारों की बात करना नहीं, बल्कि समाज में यह समझना भी है कि असली बदलाव कहां से शुरू होता है। इसी मौके पर अभिनेत्री श्वेता त्रिपाठी ने बातचीत के दौरान अपनी बेबाक राय रखी।

बाहर की संस्थाएं या सरकारें कुछ नहीं कर पाएंगी

श्वेता कहती हैं, ‘आज भी हमें ऐसी खबरें मिलती हैं कि कोई 28 साल की लड़की को उसके पति ने जिंदा जला दिया। ये बहुत दुखद है। इसलिए बराबरी की बात सिर्फ बड़ी-बड़ी नीतियों से नहीं, घर से शुरू होनी चाहिए। अगर परिवार ही बेटियों के सपनों और आवाज को दबा देगा तो फिर बाहर की संस्थाएं या सरकारें कुछ नहीं कर पाएंगी।’

अपने बचपन को याद करते हुए कहा

वह अपने बचपन को याद करते हुए कहती हैं, ‘मैं खुशनसीब रही कि मेरे घर में हमेशा शिक्षा और सोच को अहमियत मिली। पापा आईएएस ऑफिसर रहे, मम्मी टीचर और दीदी हेडमिस्ट्रेस। ऐसे माहौल ने मुझे सिखाया कि सही चीज के लिए खड़ा होना जरूरी है, चाहे मुश्किल ही क्यों न हो।’

सवाल पूछना बंद नहीं करना चाहिए

श्वेता मानती हैं कि बराबरी की लड़ाई रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा होनी चाहिए। ‘लोग सोचते हैं कि इक्वलिटी पर बात करना भारी-भरकम मुद्दा है। लेकिन असल में इसे रोज की बातचीत का हिस्सा बनाना होगा। जब तक ये नॉर्मल नहीं बनेगा, तब तक बदलाव नहीं आएगा। सवाल पूछना बंद नहीं करना चाहिए।’

‘यही सिनेमा की ताकत है’

सिनेमा और समाज के रिश्ते पर श्वेता कहती हैं, ‘ऑडियंस जो देखना चाहती है, वही बनेगा। इसलिए कहानियों पर फोकस करना होगा। चाहे हीरो हो या हीरोइन – कहानी अच्छी होगी तो लोग देखेंगे। मुझे अलग-अलग तरह की लड़कियों का किरदार निभाना पसंद है, जो हमें सोचने पर मजबूर करें, जो स्टीरियोटाइप तोड़ें। यही सिनेमा की ताकत है।’

कई छोटी कहानियां मिलकर बड़ी क्रांति ला सकती हैं

बॉलीवुड में महिलाओं के प्रोड्यूसर बनने को लेकर श्वेता कहती हैं, ‘औरतों का पर्दे के पीछे आना बहुत जरूरी है। चाहे एक्ट्रेस हों या डेब्यू प्रोड्यूसर, हमें हर फील्ड में कोशिश करनी चाहिए। बदलाव एक दिन में नहीं होगा, लेकिन कई छोटी कहानियां मिलकर बड़ी क्रांति ला सकती हैं।’

पहले औरतों को खुद से ईमानदार होना होगा

श्वेता का मानना है कि सबसे पहले औरतों को खुद से ईमानदार होना होगा। ‘हमारे भी सपने और इच्छाएं होती हैं, चाहे वे आर्थिक हों या निजी। हमें खुद के साथ बराबरी करनी होगी, तभी हम दूसरों से उम्मीद कर सकते हैं। यह औरत बनाम मर्द की लड़ाई नहीं, बल्कि इंसानियत की साझी जिम्मेदारी है।’

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