Sunday, March 15, 2026
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Saharanpur News: यमुना का जलस्तर 335.72 मीटर तक पहुंचा, हरियाणा-यूपी में फसलें डूबीं, 48 घंटे में दिल्ली पहुंचेगा पानी

जनवाणी संवाददाता |

सहारनपुर: पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में दिखने लगा है। सोमवार को हथिनीकुंड बैराज से 3.11 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे यमुना नदी का जलस्तर तेजी से बढ़कर 335.72 मीटर तक पहुंच गया। अचानक बढ़े जलस्तर ने हरियाणा और उत्तर प्रदेश के निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं।हरियाणा में 90 गांव प्रभावित, हजारों एकड़ फसल डूबी।लगातार हो रही बारिश और बैराज से छोड़े गए पानी के कारण यमुना समेत कई नदियां उफान पर हैं। हरियाणा में लगभग 90 गांव जलमग्न हो गए हैं और करीब 4200 एकड़ फसलें बर्बाद हो चुकी हैं। हालात गंभीर देखते हुए हथिनीकुंड बैराज के सभी गेट खोल दिए गए हैं। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगले 48 से 72 घंटे के भीतर यह पानी दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों तक पहुंच जाएगा, जिससे राजधानी में भी बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।

वरदान और आफत दोनों साबित होता है पानी

हथिनीकुंड बैराज से हर साल बरसात के मौसम में लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा जाता है। यह पानी जहां किसानों की सिंचाई के लिए वरदान बनता है, वहीं निचले इलाकों के लिए आफत भी साबित होता है। जलस्तर बढ़ने से फसलें बर्बाद, ज़मीनों का कटाव और सड़कों का बहना आम बात हो जाती है। कई बार जान-माल का नुकसान भी सामने आता है।हथिनीकुंड बैराज हरियाणा के यमुनानगर जिले में यमुना नदी पर स्थित है। इसका निर्माण 1999 में पूरा हुआ और 2000 से यह पूरी क्षमता के साथ कार्य कर रहा है। यह बांध नहीं बल्कि बैराज है, यानी पानी रोकने की जगह उसे नहरों में डायवर्ट करने का काम करता है।इसकी अधिकतम डिस्चार्ज क्षमता लगभग 10 लाख क्यूसेक है।इसमें कुल 18 फ्लड गेट्स हैं।बैराज से निकलने वाली मुख्य नहरें पश्चिमी यमुना नहर और पूर्वी यमुना नहर हैं, जिनकी क्षमता करीब 20,000 क्यूबिक फीट प्रति सेकंड है।

यमुना का यह पानी दिल्ली, हरियाणा और यूपी को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराने के साथ-साथ बाढ़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभाता है।स्थानीय किसान जैगम अली उर्फ गोल्डी, जुल्फान मंत्री और बुरहान आदि का कहना है कि जलस्तर बढ़ने से यूपी की जमीन पर तेज़ी से कटाव हो रहा है। अवैध खनन ने हालात को और खराब कर दिया है। उन्होंने बताया कि अभी तक बड़ा नुकसान नहीं हुआ है, लेकिन जैसे-जैसे पानी का बहाव बढ़ेगा, इसका असर दिल्ली तक साफ दिखाई देगा।बैराज से छोड़ा गया पानी शुरुआत में लगभग 50 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बहता है। हालांकि दिल्ली पहुंचने तक इसकी स्पीड काफी कम हो जाती है, लेकिन इस दौरान रास्ते में पड़ने वाले खेतों और बस्तियों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है।

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