Sunday, March 15, 2026
- Advertisement -

Justice Yashwant Verma: मेरे और मेरे परिवार के किसी सदस्य को स्टोर रूम में नकदी की कोई जानकारी नहीं…ऐसा क्यों बोले जस्टिस याशवंत वर्मा?

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: ​सरकारी आवास से भारी मात्रा में नकदी मिलने का मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस याशवंत वर्मा की मुश्किले बढ़ती जा रही है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर वीडियो पबलिश होने के बाद आम लोगों को नोटों की गड्डियों की सच्चाई का पता लग गया हे। वहीं, इस बीच यशवंत वर्मा ने इन आरोपों को नकारा है। इस पर उन्होंने कहा कि, स्टोररूम में उनके या उनके परिवार के किसी व्यक्ति के द्वारा काई नकदी नहीं रखी गई। उन्हें बदनाम करने की साजिश हो रही है।

बता दें कि,मुख्य न्यायाधीश ने नकदी मिलने के मामले की आंतरिक जांच के आदेश दिए हैं। जिसके बाद दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय ने जस्टिस वर्मा से उनके ऊपर लगे आरोपों पर जवाब मांगा था। हालांकि मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच चल रही है।

क्या बोले यशवंत वर्मा?

दिल्ली हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय को भेजे पत्र में जज यशवंत वर्मा ने लिखा कि ‘मेरे या मेरे परिवार के किसी सदस्य को स्टोर रूम में मिली नकदी के बारे में कोई जानकारी नहीं है। न ही मेरे या मेरे परिवार को ये नकदी दिखाई गई।’ जस्टिस वर्मा ने घटना को याद करते हुए बताया कि ’14-15 मार्च की रात उनके सरकारी आवास के स्टोर रूम में आग लगी। यह स्टोर रूम उनके स्टाफ क्वार्टर के पास स्थित है।

स्टोर रूम में सीपीडब्लूडी का सामान

स्टोर रूम को आमतौर पर इस्तेमाल न होने वाले फर्नीचर, बोतल, क्रॉकरी, इस्तेमाल किए हुए कारपेट आदि रखने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। साथ ही उस स्टोर रूम में सीपीडब्लूडी का सामान भी रखा रहता है। स्टोर रूम में कोई ताला नहीं है और वहां कई अधिकारी आते जाते रहते हैं। इस स्टोर रूम में सामने के दरवाजे से और पीछे के दरवाजे से भी आया जा सकता है। यह मेरे आवास से सीधे तौर पर जुड़ा हुआ नहीं है और यह मेरे घर का हिस्सा नहीं है।’

घटना के दिन पत्नी संग थे यशवंत वर्मा?

जस्टिस वर्मा ने बताया कि ‘जिस दिन आग लगने की घटना हुई, उस दिन वे अपनी पत्नी के साथ मध्य प्रदेश में थे। उस वक्त घर पर सिर्फ मेरी बेटी और मेरी बुजुर्ग मां ही घर पर थीं। मैं 15 मार्च की शाम को भोपाल से दिल्ली लौटा। जब आग लगी तो मेरी बेटी और मेरे निजी सचिव ने फायर ब्रिगेड को फोन किया। आग बुझाने के दौरान मेरे सारे स्टाफ और मेरे घर के सदस्यों को आग वाली जगह से हटा दिया गया था।

जब आग बुझ गई और जब ये लोग वहां पहुंचे तो मौके पर कोई नकदी नहीं थी। मैं फिर एक बार साफ कर दूं कि न तो मेरे द्वारा या मेरे परिवार के द्वारा कोई नकदी स्टोर रूम में रखी गई थी और न ही कथित तौर पर मिली नकदी से हमारा कोई संबंध है। ये पैसा हमारे द्वारा रखे जाने का दावा पूरी तरह से हास्यास्पद है।’ उन्होंने कहा कि एक ऐसी जगह पर नकदी रखने का विचार ही बेतुका है, जहां सब लोग आ जा सकते हैं।

14 मार्च को लगी थी आग

बता दें, 14 मार्च की रात वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित आवास पर आग लगने के बाद दमकल कर्मियों को नकदी मिली थी। घटना के समय वर्मा घर पर नहीं थे। मुख्य न्यायाधीश ने आंतरिक जांच कर साक्ष्य और जानकारी जुटाई। अब सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम रिपोर्ट की जांच करेगा, जिसके बाद वर्मा के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

Crude Oil: पश्चिम एशिया संकट से कच्चे तेल की कीमतों में 41% उछाल, वैश्विक बाजार में बढ़ा दबाव

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल...

BCCI Awards: शुभमन गिल और स्मृति मंधाना चमके, BCCI नमन अवॉर्ड 2026 में जीते बड़े पुरस्कार

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)...

Sonam Wangchuk: सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी रद्द, गृह मंत्रालय ने दी स्वतंत्रता की जानकारी

जनवाणी ब्यूरो | नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने जलवायु...
spot_imgspot_img