Saturday, June 22, 2024
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योगी सरकार का भ्रष्टाचार पर प्रहार

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  • एंटी करप्सन की बड़ी कार्रवाई: निगम के राजस्व निरीक्षक को किया पांच हजार रुपये लेते हुए गिरफ्तार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जीरो टोलरेंस नीति पर काम कर रहे हैं। भ्रष्टाचार में आकंठ डूबे नगर निगम का लखनऊ से संज्ञान लिया गया, जिसके बाद एंटी करप्सन की टीम को लखनऊ से भ्रष्टाचार के खिलाफ आॅपरेशन करने के दिशा-निर्देश दिये गए। इसके बाद ही एंटी करप्सन की टीम ने पिछले तीन दिन से नगर निगम आॅफिस में ही डेरा लगा रखा था।

नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय गंगानगर में एंटी करप्सन की टीम ने छापा मारा, जिसमें निगम के राजस्व निरीक्षक नवल सिंह को रंगे हाथ पांच हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए दबोच लिया। टीम की छापेमारी की कार्रवाई से यहां हड़कंप मच गया। कर्मचारी इधर-उधर भागने लगे। योगी सरकार और एंटी करप्सन टीम की भ्रष्टाचार के खिलाफ ये बड़ी कार्रवाई हुई हैं।

राजस्व निरीक्षक नवल सिंह राघव को एंटी करप्सन की टीम गिरफ्तार कर गंगानगर थाने ले आई, जहां पर चार घंटे तक कड़ी पूछताछ चली। पांच हजार का उत्कोच लेते हुए नगर निगम क्षेत्रीय कार्यालय, गंगानगर से रंगे पकड़े जाने का आरोपी के खिलाफ गंगानगर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया हैं।

एंटी करप्सन के छापे की यह कार्रवाई 1.40 बजे की हैं। सतीश कुमार पुत्र रामनिवास निवासी काजीपुर एंटी करप्सन टीम के साथ गंगानगर स्थित नगर निगम के क्षेत्रीय कार्यालय पर पहुंचे, जहां पर राजस्व निरीक्षक नवल सिंह राघव अपने आॅफिस में बैठे थे, तभी राजस्व निरीक्षक ने गृहकर का बिल कम करने के बदले में पांच हजार की मांग की, जिसके बाद सतीश ने पांच हजार रुपये राजस्व निरीक्षक को दे दिये।

ली गई रिश्वत को नवल सिंह ने हाथ में थामने के बाद जैसे ही गिनती शुरू की, तभी टीम ने उसे थाम लिया। उसके हाथ रंग गए तथा उंगलियों के निशान भी नोटों पर बन गए। इन नोटों को एंटी करप्सन टीम ने कब्जे में लेकर सील कर दिया, जिसके बाद बाकी कार्रवाई आरंभ की। टीम राजस्व निरीक्षक को अपनी गाड़ी में बैठाकर गंगानगर थाने ले आई तथा यहां पर चार घंटे तक बंद कमरे में उससे कड़ी पूछताछ चली।

इस प्रकरण की शिकायत शासन को की गई थी, जिसे शासन ने गंभीरता से लेते हुए एंटी करप्सन टीम को आॅपरेशन में लगाया गया था। छापेमारी करने वाली एंटी करप्सन टीम में 11 सदस्य थे। भ्रष्टाचारी राजस्व निरीक्षक से गंगानगर थाने में पूछताछ चली, जिसमें काली कमाई के बारे में भी पूछताछ हुई। एंटी करप्शन की टीम पकड़े गए भ्रष्ट राजस्व निरीक्षक से बैनामी सम्पत्ति के बारे में भी पूछा गया।

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रिश्वत लेते हुए पकड़े गए नगर निगम के राजस्व निरीक्षक हाउस टैक्स के मामले में बड़ा घालमेल कर रहे थे। पहले लोगों के घरों का हाउस टेक्स बढ़ाकर भेजा जाता हैं, फिर उसे कम करने के नाम पर रिश्वत लेकर बिल कम कर दिया जाता हैं। इसी तरह से जल-कल में भी खेल किया जा रहा हैंं। इस तरह से जनता का उत्पीड़न शहर भर में चल रहा हैं। लोगों से खुली रिश्वत लेने का इन पर पहले भी आरोप लग चुका हैं। अब रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं।

तीन माह में भ्रष्टाचार चरम पर पहुंचा

नगर निगम में भ्रष्टाचार पर अंकुश चल रहा था, लेकिन पिछले तीन माह के भीतर भ्रष्टाचार चरम पर पहुंच गया। पहले कभी इतना भ्रष्टाचार नहीं बढ़ा था, जो वर्तमान में बढ़ता जा रहा हैं। खुलेआम क्लर्क और राजस्व निरीक्षक रिश्वत ले रहे हैं, जिन पर किसी तरह का अधिकारियों का अंकुश नहीं रह गया हैं। यही वजह है कि भ्रष्टाचार का ग्राफ बढ़ा हैं।

ऐसा तब है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ दो टूक कह चुके है कि जीरो टोलरेंस पर कार्य करें। भ्रष्ट अफसरों को मुख्यमंत्री चेता भी चुके हैं, लेकिन अधिकारियों ने लगता है नहीं सुधरने की कसम खा ली हैं, जिसके चलते भ्रष्टाचार बढ़ गया हैं। आखिर इस भ्रष्टाचार के लिए जिम्मेदार कौन हैं? क्या बढ़ते भ्रष्टाचार पर अंकुश लग पाएगा?

नगरायुक्त नहीं उठाते फोन

भ्रष्टाचार का इतना बड़ा मामला शनिवार को पकड़ा गया। ऐसे में मीडिया के लोगों ने नगरायुक्त अमित पाल शर्मा को फोन कॉल की, लेकिन उनका सीयूजी नंबर रिसीव ही नहीं हुआ। सीयूजी नंबर भी नहीं उठाया जा रहा हैं, फिर जनता से सीधे संवाद कैसे स्थापित किया जाता होगा।

भ्रष्टाचार के प्रकरण को लेकर नगरायुक्त का कोई बयान नहीं आया। मीडिया से किसी अधिकारी ने बात नहीं की। इससे स्पष्ट है कि भ्रष्टाचार को अधिकारियों के स्तर से ही बढ़ावा दिया जा रहा हैं, जिस पर अंकुश लगाने की कोई रणनीति नहीं हैं।

कौन है नवल सिंह राघव?

एंटी करप्सन ने जिस भ्रष्ट आरोपी नवल सिंह राघव पुत्र स्व. उदयवीर सिंह निवासी एन-पी-2 गंगानगर को पकड़ा है, ये कौन हैं? इसको जानने के लिए सभी की उत्सुकता हैं। इस आरोपी पर पहले भी भ्रष्टाचार में लिप्त रहने के आरोप लग चुके हैं। जांच के नाम पर शिकायतों को निगम आॅफिस में दबा दी जाती थी, जिसके बाद से ही घूसखोरी करने में आरोपी के हौंसले बुलंद हो गए थे।

इस टीम ने किया भ्रष्टाचार के खिलाफ आॅपरेशन

भ्रष्टाचार के खिलाफ आॅपरेशन चलानी वाली एंटी करप्सन की इंस्पेक्टर दुर्गेश सिंह के नेतृत्व में ये छापे की कार्रवाई हुई। इस टीम में इंस्पेक्टर अशोक शर्मा थे, इंस्पेक्टर उषा तोमर, हेड कांस्टेबल संजीव सिंह चौहान, हेड कांस्टेबल अमृतपाल, हेड कांस्टेबल रामनिवास शामिल थे।

राजस्व निरीक्षक पदोन्नति भी विवादों में?

नवल सिंह राघव नगर निगम में चतुर्थ श्रेणी के पद पर कार्यरत थे। कर संग्रह चतुर्थ श्रेणी कर्मी का कभी पद पर रहे थे। अकेन्द्रीय भर्ती इनकी निगम में हुई थी। केन्द्रीय नहीं थी। बीच में निगम अधिकारियों ने गलत तरीके से कुछ जिम्मेदारी सौंप दी गई थी। चतुर्थ श्रेणी कर्मी को दी गई जिम्मेदारी भी सवालों के घेरे में आ गई हैं। क्योंकि दी गई थी जिम्मेदारी? इस पर भी सवाल उठना लाजिमी हैं।

कार्यवाहक जिम्मेदारी मिलने के बाद नवल सिंह ट्रब्यूनल कोर्ट में चले गए थे तथा राजस्व निरीक्षक बनाने की मांग की थी। तत्कालीन नगरायुक्त राजकुमार सचान इसमें पूछा था कि इसमें क्या हो सकता हैं? निगम अधिकारियों ने इसमें शासन को पूरा मामला भेज दिया था, लेकिन शासन ने इसे रिजेक्ट कर दिया था तथा कहा था कि किसी भी चतुर्थ श्रेणी कर्मी को राजस्व निरीक्षक की जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती, इसके बाद ही नवल सिंह को जिम्मेदारी नहीं दी गई।

तब यह कहकर फाइल पेडिंग डाल दी थी कि इसमें पदोन्नति नहीं दी जा सकती। 2017-18 में नगरायुक्त मनोज चौहान ने जिम्मेदारी संभाली तो नवल सिंह राघव को पदोन्नति दे दी गई? ये पदोन्नति किस ग्राउंड पर दी, उसका खुलासा नगर निगम अधिकारियों ने अब तक नहीं किया तथा इसकी फाइल दबी हुई हैं।

महत्वपूर्ण बात यह है कि पदोन्नति पाने के बाद पिछला वेतन राजस्व निरीक्षक के रूप में दे दिया गया? इस पर भी बड़ा सवाल हैं, ये वेतन कैसे दे दिया? इनकी पदोन्नति का मामला भी विवादों में हैं। उधर, जनवाणी ने गत 18 फरवरी, 2019 को भी पदोन्नति के फर्जीवाडेÞे को लेकर खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद भी आला अफसरों ने संज्ञान नहीं लिया।

…और भी है भ्रष्ट कर्मचारी एंटी करप्सन के निशाने पर

एंटी करप्सन की ये नगर निगम में पहली कार्रवाई नहीं हैं, बल्कि इससे पहले भी एंटी करप्सन भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करता रहा हैं। नवल सिंह राघव की गिरफ्तारी के अलावा कई और भी चर्चित मामले नगर निगम में हो चुके हैं, जिसमें मुकेश शर्मा, राजेन्द्र शर्मा को भी एंटी करप्सन की टीम रिश्वत गिरफ्तारी कर चुकी हैं।

यही नहीं, इससे भी बड़ा मामला हुआ था राजस्व निरीक्षक ठा. रविन्द्र प्रताप का। उनको भी एंटी करप्सन की टीम ने निगम के मुख्य कार्यालय में छापे की कार्रवाई कर गिरफ्तार कर लिया था। एंटी करप्सन की टीम देहली गेट थाने में ठा. रविन्द्र प्रताप को लेकर बैठी थी, तभी निगम के कर्मचारियों ने हमला बोल दिया था, जिसके बाद बड़ा बवाल यहां हो गया था।

इसमें एंटी करप्सन की टीम ने तब बीस लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था, जिसमें सभी की गिरफ्तारी भी हुई थी। इस तरह से भ्रष्टाचार भी निगम कर्मी करते है तथा दुस्साहस भी दिखाते हैं। ये तो सीधे गुंडई की जाती हैं। शनिवार को भी निगम के करीब बीस कर्मचारी से ज्यादा गंगा नगर थाने पर पहुंच गए थे।

हत्या के मामले में भी जेल जा चुका है नवल

हत्या के मामले में भी नवल सिंह राघव जेल जा चुका हैं। इसके बाद भी उसके खिलाफ नगर निगम अफसरों ने कोई कार्रवाई नहीं की। यही नहीं, जिस दौरान नवल राघव जेल में रहा था, उस दौरान का वेतन भी निकाल लिया गया। आखिर उसका वेतन तब कैसे दिया? ये भी जांच का विषय हैं। इसमें अधिकारियों के स्तर पर क्या कार्रवाई की जाएगी?

ये भी चल रहा है खेल, कौन करेगा जांच?

यह नगर निगम मेरठ में टैक्स कलेक्टर -जिसे मुहर्रिर कहा जाता है। यह चतुर्थ श्रेणी का कर्मचारी हैं, लेकिन अधिकारियों से सांठगांठ करके अपने को इंस्पेक्टर लिखता है, इसको सैलरी वर्तमान में भी टैक्स मुहर्रिर की ही मिलती है। ऐसी जानकारी भी लगी हैं, लेकिन इसकी अधिकृत रूप से नगर निगम अफसरों ने पुष्टि नहीं की हैं। इसकी भी जांच होनी चाहिए। आखिर इस तरह का खेल चल रहा हैं।

इनके द्वारा फर्जी रूप से डिपो का तकनीकी प्रभारी भी बनाया हुआ है, जबकि उसे तकनीकी संबंधी कोई जानकारी नहीं है। इसकी जांच भी नगरायुक्त अमित पाल शर्मा को करनी चाहिए। नगर निगम की गाड़ियों के डिपो पर फर्जी मरम्मत का बिल गलत ढंग से निकालने के भी आरोप हैं, जिसकी जांच की जाए तो पूरा भंडाफोड़ हो जाएगा। इसकी चर्चा भी नगर निगम में आम सुनी जा रही हैं।

रिश्वत लेने के मामले में एंटी करप्सन की कार्रवाई हुई हैं, मुकदमा भी दर्ज हुआ हैं। पदोन्नति फर्जी तरीके के सवाल की जानकारी नहीं हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। -प्रमोद कुमार, अपर नगरायुक्त, नगर निगम मेरठ

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