जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने को मंजूरी दी है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पीएम कार्यालय सेवा तीर्थ में हुई पहली कैबिनेट बैठक में इस निर्णय के बारे में जानकारी दी।
इस बैठक में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। कुल 12,236 करोड़ रुपये के विभिन्न विकास प्रोजेक्ट्स को स्वीकृति मिली है, जिसमें रेलवे और शहरी परिवहन का विस्तार प्रमुख है। गोंदिया-जबलपुर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए 5,236 करोड़ रुपये का सबसे बड़ा आवंटन किया गया है। इसके अलावा, रेलवे नेटवर्क को सुदृढ़ करने के लिए पुनरख-किऊल की तीसरी और चौथी लाइन के लिए 2,668 करोड़ रुपये और गम्हरिया-चांडिल की तीसरी-चौथी लाइन के लिए 1,168 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। विमानन और शहरी यातायात को सुगम बनाने के लिए श्रीनगर में 1,667 करोड़ रुपये की लागत से एक नया इंटीग्रेटेड एयरपोर्ट टर्मिनल और अहमदाबाद मेट्रो के फेज 2B के विस्तार के लिए 1,067 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है।
वित्तीय आवंटन के अलावा, कैबिनेट ने कई नीतिगत और कृषि संबंधित फैसलों पर भी मुहर लगाई। एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय के तहत, केरल राज्य का नाम ‘केरल’ से बदलकर ‘केरलम’ करने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के लिए नए पावर सेक्टर रिफॉर्म्स को भी मंजूरी दी गई। कृषि क्षेत्र को प्रोत्साहन देने के लिए कच्चे जूट के न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा की गई, जिसके लिए 430 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
यह बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई, जबकि पिछली बैठक 13 फरवरी को साउथ ब्लॉक के पुराने पीएम कार्यालय में हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने इस दौरान पुराने कार्यालय में ऐतिहासिक फैसलों के बारे में यादें साझा कीं। उन्होंने बताया कि साउथ ब्लॉक के कार्यालय में देश के पहले चार युद्धों की रणनीति बनाई गई थी।
प्रधानमंत्री ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठकों में केवल एजेंडे पर ही नहीं, बल्कि पूरे सप्ताह की प्रमुख चर्चाओं पर भी विचार किया और मंत्रियों से फीडबैक लिया। प्रधानमंत्री ने बैठक में सभी को अपनी अच्छी खबरें साझा करने के लिए प्रेरित किया, ताकि सकारात्मक माहौल बने।
इसके अलावा, कैबिनेट ने जर्मनी और कनाडा के साथ दुर्लभ खनिज क्षेत्र में सहयोग समझौतों को भी मंजूरी दी। इन समझौतों का उद्देश्य भारत की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करना और ऊर्जा सुरक्षा के लिए आवश्यक खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करना है। जर्मनी के साथ समझौते के तहत, दोनों देश दुर्लभ खनिजों का अन्वेषण करेंगे और तकनीक का आदान-प्रदान करेंगे, ताकि भारत को लीथियम, कोबाल्ट, और निकल जैसी सामग्रियों की आपूर्ति सुनिश्चित हो सके।

