- नीति आयोग ने खींचा पूरा खाका
- ट्रकों से माल ढुलाई की लगातार प्रगति से भी उत्साहवर्द्धन
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: इस समय देश की सड़कों पर माल की ढुलाई के लिए 40 लाख से अधिक ट्रक दौड़ रहे हैं। आने वाले 25 से 28 सालों के दौरान देश में ट्रकों की यह संख्या बढ़कर पौने दो करोड़ के आस पास पहुंच जाएगी। यानि कि चौगनी वृद्धि। जाहिर बात है कि जब माल ढुलाई वाले ट्रक 40 लाख से बढ़कर पौेने दो करोड़ के आसपास होंगे तब व्यापारिक गतिविधियों में भी इजाफा होगा जो उद्योग जगत की सेहत के लिए मुफीद साबित होगा।
दरअसल, नीति आयोग के आंकड़ों पर यदि विश्वास करें तो सन् 2050 तक की स्थिति साफ हो जाती है। नीति आयोग की रिपोर्ट में यह भी सुझाव दिया गया है कि वित्तीय संस्थान शून्य उत्सर्जन वाले ट्रकों के लिए अधिक अनुकूल वित्तीय समाधान तैयार कर सकते हैं। नीति आयोग की रिपोर्ट में साफ कहा गया है कि भविष्य में भारत उद्योगों का हब भी बन सकता है और इसी लिहाज से देश की सड़कोें पर मालवाहक वाहनों का दबाव भी बढ़ेगा।
आगामी 25 से 28 सालों के दौरान जब मालवाहक ट्रकों की संख्या बढ़ेगी तो आॅटोमोबाइल बाजार में भी बूम आएगा। र्इंधन की खपत भी बढ़ेगी, रोजगार में भी इजाफा होगा। कुल मिलाकर व्यवसायिक ग्राफ ऊंचा ही जाएगा। यह सब कुछ भारत की आर्थिक सम्पन्नता की ओर इशारा कर रहा है। भारत में घरेलू माल ढुलाई की कुल मांग का लगभग 70 प्रतिशत सड़क परिवहन से ही पूरा होता है।
रिपोर्ट में यह भी उजागर किया गया है कि भारत में इस समय सालाना 4.6 अरब टन की माल ढुलाई होती है। यह भी कहा गया है कि लगातार हो रहे शहरीकरण के कारण आय के स्रोत्रों में वृद्धि लाजिमी है। कुल मिलाकर आगामी वर्ष भारत में उद्योगों के लिहाज से किसी स्वर्णकाल से कम नहीं होंगे।

