- डीएम और एसएसपी ने किया मतदान केन्द्रों का निरीक्षण
- मतदान के बाद स्ट्रांग रूम में और कंट्रोल रूम को देखा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुजफ्फरनगर लोकसभा की सरधना विधानसभा और बिजनौर लोकसभा की हस्तिनापुर लोकसभा क्षेत्र में शांति पूर्ण मतदान हुआ। सरधना में 54.81 प्रतिशत मतदान हुआ। मतदान केन्द्रों को पुलिस-प्रशासन ने छावनी में तब्दील कर रखा था। नागालैंड पुलिस भी मतदान केन्द्रों पर तैनात कर रखी थी। आधार कार्ड और वोटर लिस्ट में दिये गए नाम से मिलान नहीं होने पर मतदान करने से रोक दिया जाता था। एक तरह से पूरा प्रशासन अलर्ट मोड में रहा। अर्द्धसैनिक बल भी जगह-जगह तैनात रहा।
किसी भी असमाजिक तत्व को मतदान केन्द्र में नहीं घुसने दिया। उधर, बिजनौर की हस्तिनापुर विधानसभा में 57.56 प्रतिशत मतदान हुआ। वहां भी पुलिस अलर्ट दिखाई दी। यहां भी अर्द्धसैनिक बलों को मतदान केन्द्रों पर तैनात किया गया था। मतदान केन्द्र पुलिस छावनी में तब्दील कर रखा था। डीएम दीपक मीणा फोर्स के साथ प्रत्येक मतदान केन्द्र पर राउंड लगा रहे थे। दोनों ही विधानसभा क्षेत्रों में डीएम घूमे। मतदान का कार्य शांति पूर्ण चला। मामूली नोंकझोंक का छोड़ दे तो कहीं से भी कोई अप्रिय घटना का समाचार नहीं हैं।
जनपद में शांतिपूर्ण तरीके से हुआ प्रथम चरण का मतदान
जनपद में लोक सभा सामान्य निर्वाचन-2024 को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष एवं सकुशल संपन्न कराए जाने के लिए जिला निर्वाचन अधिकारी, डीएम दीपक मीणा के निर्देशन में लगातार सक्रियता बरती। प्रथम चरण के दृष्टिगत जिला निर्वाचन अधिकारी ने केके पब्लिक स्कूल सरधना, उच्च प्राथमिक विद्यालय राडधना विधान सभा क्षेत्र सरधना, सेंट फ्रांसिस प्राईमरी स्कूल सरधना, कार्यालय क्षेत्र पंचायत सरधना, एंग्लो संस्कृत इंटर कालेज मवाना आदि मतदान केन्द्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने मतदान केन्द्रों पर बनाये गये सेल्फी प्वाइंट, दिव्यांग बूथ, मॉडल बूथ, पिंक बूथ आदि को देखा व उसकी सराहना की।
उन्होंने मतदान केन्द्रों पर की गयी व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा आमजन से की गई व्यवस्थाओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने बताया कि बीमार एवं दिव्यांग मतदाताओं को मतदान केन्द्रों पर पहुंचाने के लिए ई-रिक्शा तथा व्हील चेयर की व्यवस्था की गई है। इसके अतिरिक्त मतदान केन्द्रों पर मतदाताओं के लिए पीने का ठंडा पानी, बैठने की व्यवस्था तथा चिकित्सा सुविधा मुहैया कराई गई है। बाद में जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने मतगणना केन्द्र सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय में मतदान के बाद ईवीएम मशीन सुरक्षित एवं व्यवस्थित ढ़ग से जमा कराये जाने के दृष्टिगत स्ट्रांग रूम तथा वहां बने कंट्रोल रूम का निरीक्षण किया व संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये।
कमिश्नर और आईजी ने भी किया बूथों का निरीक्षण
लोकसभा सामान्य निर्वाचन-2024 के प्रथम चरण के अन्तर्गत मंडलायुक्त सेल्वा कुमारी जे. तथा आईजी नचिकेता झा द्वारा सरधना विधानसभा क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय कमरूद्दीन नगर मढियाई, जवाहर इंटर कालेज राधना तथा जनता इंटर कालेज खेड़ा, उच्च प्राथमिक विद्यालय सैफपुर कर्मचंदपुर विधान सभा क्षेत्र हस्तिनापुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय रानी नंगला विधान सभा क्षेत्र हस्तिनापुर, उच्च प्राथमिक विद्यालय ग्राम पलड़ा, कार्यालय नगर पालिका परिषद सरधना, राष्ट्रीय इंटर कालेज लावड़ में बने मतदान बूथों पर शांति एवं कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए बूथों का निरीक्षण किया गया। इस अवसर पर उन्होंने मतदाताओ से वार्ता भी की। इस अवसर पर संबंधित अधिकारी व कर्मचारी उपस्थित रहे।
लोकतंत्र के महायज्ञ में आहुति देकर उत्साहित नजर आये युवा
मवाना: ोकतंत्र के महायज्ञ में पहली बार आहुति देने वाले युवाओं में शुक्रवार को उत्साह नजर आया। लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण में अपनी आहुति देने वाले युवाओं ने कहा कि पहली बार हमें वोट डालकर अच्छा लगा है। अब हम लोग भी लोकतंत्र का हिस्सा बनकर मुख्यधारा में शामिल हो गए हैं। मेरठ रोड स्थित एएस इंटर कॉलेज में वोट डालने पहुंची सोफिया ने कहा कि मुझे लोकतंत्र के महायज्ञ में पहली बार अपनी आहुति देकर बहुत अच्छा लगा है। लोकतंत्र के महायज्ञ में अपने अधिकार से आत्मविश्वास जगा है। पहली बार वोट डालने पहुंची नरगिस का कहना है कि 18 साल के युवाओं को अधिकार देकर सरकार चुनने का अधिकार दिया गया है।

हमें इसमें शामिल होकर अच्छा लग रहा है। आकांक्षा कहती है कि लोकतंत्र का पर्व सभी त्योहारों से बड़ा होता है। आज पहली बार इस पर्व पर अपनी आहुति देकर बहुत अच्छा लगा। उनके वोट से सासंद प्रतिनिधि को चुने में अहम भूमिका निभाने वाला है। वोट डालकर अच्छा लगा है। परिवार के साथ उसने भी वोट डाल। यह हमारा मौलिक अधिकार है। हस्तिनापुर स्थित राजकीय इंटर कॉलेज में लोकसभा चुनाव के प्रथम चरण में पहली बार मतदान करने पहुंचे नितिन जयंत का कहना है कि लोकतंत्र का इस पर्व में पहली बार अपने मताधिकार का प्रयोग कर सबके साथ वोट डालना अच्छा लगा है। संविधान ने हमें वोट का एक बड़ा अधिकार दिया है।
पहली बार वोट डालने वाली शिवानी वर्मा कहती है कि हमें अपना प्रतिनिधि चुनने का अधिकार मिला है। मुझे वोट डालकर बेहद खुशी मिली है। देश के संविधान ने उन्हे अपने मताधिकार के प्रयोग करने का हक दिया। मतदान का दिन किसी पर्व से कम नहीं होता। अपने मत का प्रयोग कर वे सांसद प्रतिनिधि चुनकर बहुत खुश है। युवा लक्ष्य राहुल ने भी पहली बार वोट डाला है। वह कहता है कि वोट हमारा अपना अधिकार है। देहात क्षेत्र में मतदान केंद्र पर पहली बार वोट डाल कर मिल अंशिका, प्रशंसा, राजदीप कौर, अंजुल शर्मा आदि ने वह डाल कर खुशी व्यक्त की। उनका कहना था कि वोट डालकर लोकतंत्र के प्रति हमें अपने अधिकारों का एहसास हुआ।
नेता केवल वोट लेने के समय वादे करते हैं तो वोट देकर के लाभ
पिछले कई दशक से खादर क्षेत्र में लगातार आ रही बाढ़ ने म्हारी फसलों को बरबाद करने के साथ हमें भी बर्बादी के मोड़ पर ला खड़ा किया है। नेता ने म्हारे को आज तक वादों के सिवा कुछ न दिया। चुनाव आते हैं तो नेता के काफिले भी नजर आते हैं, लेकिन चुनाव खत्म तो नेता और उनके चम्चे कहीं भी नजर न आवे। यह पीड़ा हस्तिनापुर गंगा खादर क्षेत्र के अनेकों लोगों की है। इसके चलते ही इस बार खादर क्षेत्र में मतदान प्रतिशत में अच्छी खासी कमी नजर आई और महज 52 लोग ही अपना प्रतिनिधि चुनकर मतदान केंद्रों तक पहुंचे।
जिस समय लोग गंगा पार कर मतदान केंद्र पर वोट डालने के लिए आ रहे थे। इस दौरान कुछ लोग खेतों में गेहंू की फसल की कटाई कर रहे थे। जनवाणी टीम उधर से गुजरी तो मतदान के दिन खेतों में काम कर रहे लोगों को बरबस देखकर रुका और वोट के बारे में पूछ लिया। पहले तो उसने नेता समझकर मन को गुब्बार शांत करने के लिए खूब खरी खोटी सुनाई, लेकिन बाद में समझाने पर कुछ शांत हुई और बोले बेटा ये नेता आवे और चुनाव में बोट मांग के चले जावे। पर जब यहां बाढ़ और आपदा आवै तो कोई पता लेने न आता। सालों से म्हारी सारी फसल गंगा में आई बाढ़ के पानी में बह जावे। नेता कर्ज माफ करने की बात करें, पर आज लो हुआ कुछ ना।
म्हा तो मकान भी पानी में ढह गए और पटवारी ने 200 रुपये दे के पन्नी दिवा दी थी। आज लो मकान किसी ने ना बनवाया तो वोट देकर के करें। यह दर्द केवल एक जगह खेत में कम कर रहे लोगो का नहीं, बल्कि खादर क्षेत्र के हर उस ग्रामीण का है, जो बाढ़ के दंश को पिछले कई दशकों से झेल रहे हैं। सरकार ने आज तक गंगा किनारे टूटे तटबंध को पक्का करने तो दूर उसे बनाने तक के बारे में नही सोची। 2008 में बसपा कार्यकला में शुरू हुआ गंगा पुल निर्माण भी शासन व जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा के चलते अधर में लटका है। गंगा पर बनाया जाने वाले इस पुल जहां मेरठ-बिजनौर की सीमा के दर्जनों गांवों की दूरी घट जाती।
वहीं, कई गांवों को बाढ़ से भी राहत मिल जाती। इस बार खादर क्षेत्र में बाढ़ ने महीनों विकराल रूप दिखाया, लेकिन कोई नेता उनकी सुध लेने के लिए नही आया। खेत में कम कर रहे लोगो की पीडा यही समाप्त नही हुए लोगों ने बताया कि बाढ़ खत्म हुई तो सरकारी नुमाइंदों ने फसल मुआवजे के लिए फॉर्म भरे और आश्वासन दिया की जल्द ही उनके बैंक खातों में बर्बाद फसलों का मुआवजा आयेगा, लेकिन आज तक कोई मुआवजा नहीं आया। इसके चलते आज उन्होंने लोकतंत्र के महापर्व से अपने आपको अलग कर दिया।

