जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: शहर को प्रदूषण से राहत दिलाने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने 30 सितंबर तक संचालकों को फैक्टरियां पीएनजी (पाइप्ड नेचुरल गैस) में बदलने के निर्देश दिए हैं। इसके बाद औद्योगिक इकाइयों में कोयले के प्रयोग की अनुमति नहीं होगी। आयोग ने इस संबंध में नोटिस जारी कर दिए हैं।
मेरठ में हवा की गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है। हर वर्ष सितंबर से दिसंबर के बीच हालात और विकट हो जाते हैं। इस बार वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने इसके लिए तैयारी तेज कर दी है। आयोग ने औद्योगिक इकाइयों को पीएनजी में बदलने पर रिपोर्ट मांगी है। उधर फैक्टरी संचालकों का तर्क है कि पीएनजी महंगी है, जिस कारण से उत्पादन की लागत बढ़ेगी। हालांकि इससे प्रदूषण का स्तर कम होगा। संवाद
चिमनियों का धुआं घोलता है हवा में जहर
शहर में चल रहीं करीब 600 औद्योगिक इकाइयों में से सिर्फ 50 ही पीएनजी पर चलती हैं। इनके अलावा तारकोल, टायर जलाने, बैटरी गलाने वाली छोटी और अवैध इकाइयां अनगिनत है। इसे जहरीला धुआं उत्सर्जित होता है। हालांकि प्रदूषण के पीछे बड़ी वजह वाहनों से उत्सर्जित होने वाला धुआं भी है। दिवाली के आसपास पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उप्र में जलाई जाने वाली पराली की वजह से हालात और विकट हो जाते हैं।
दमघोंटू हो रही मेरठ की हवा
301 रहा सोमवार को मेरठ का वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई)
500 के पार पहुंच जाता है दिवाली पर यहां एक्यूआई
250 दिन से ज्यादा मेरठ में खराब रहती है हवा
0 से 50 के बीच अच्छा माना जाता है एक्यूआई
200 के पार पहुंचते ही खतरनाक होने लगती है हवा
हम हैं तैयार पर छूट मिले
काफी समय से पीएनजी की मांग कर रहे हैं। पीएनजी में आगरा की तर्ज पर इंडस्ट्री के लिए छूट मिलनी चाहिए। -सुमनेश, आईआईए अध्यक्ष
हम भी चाहते हैं प्रदूषण कम हो
हम भी चाहते हैं प्रदूषण कम हो, इसके लिए पीएनजी का इस्तेमाल करना चाहते हैं मगर उसकी सहूलियत तो मिले, जो अभी नहीं मिल रही है। -तनुज गुप्ता, उपाध्यक्ष, आईआईए
प्रदूषण कम करना मकसद
क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी का कहना है कि वाहनों से प्रदूषण फैलाने वाले सभी कारकों पर काम किया जा रहा है। सिटी बस ट्रांसपोर्ट सिस्टम को भी पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों पर ले जाया जाना है। संबंधित विभाग का कहना है कि अभी तक मेरठ को पांच इलेक्ट्रिक बसें मिल चुकी हैं जबकि 45 और आनी हैं। अभी शहर में करीब 70 सीएनजी बसें चल रही हैं।
फैक्टरियां को पीएनजी में बदलने के लिए सितंबर तक का समय दिया गया है। संचालकों को इन आदेशों का अनुपालन करना होगा। -डॉ. योगेंद्र कुमार, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी

