जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में गुरुवार को वोटिंग का नया इतिहास लिखा गया। चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, पहले चरण में 64.66% मतदाताओं ने अपने वोट का अधिकार प्रयोग किया, जो पिछले 75 वर्षों में सबसे अधिक मतदान प्रतिशत है।
रिकॉर्ड तोड़ वोटिंग
पहले चरण में कुल 121 विधानसभा क्षेत्रों में 3.75 करोड़ मतदाता वोट डालने के पात्र थे। इनमें से लगभग 64.66% मतदाताओं ने मतदान किया, जो 1951 से अब तक का सबसे ऊंचा वोटिंग प्रतिशत है। इससे पहले सबसे अधिक मतदान 1998 में हुआ था, जब वोटिंग प्रतिशत 64% दर्ज किया गया था।
मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में सबसे ज्यादा वोटिंग
राज्य के कई जिलों में मतदाताओं ने जमकर वोट डाले।
मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर में मतदान प्रतिशत 70% से अधिक रहा।
शहरी क्षेत्रों के साथ ग्रामीण इलाकों में भी मतदाताओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं।
दोनों खेमे कर रहे हैं अपनी-अपनी व्याख्या
इतिहासिक मतदान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
विपक्षी दलों का कहना है कि यह एंटी-इनकंबेंसी (सरकार के खिलाफ वोटिंग) का संकेत है।
वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन इसे जनता का सरकार पर भरोसा बता रहा है।
राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि इतनी बड़ी संख्या में मतदान होना जनता की लोकतंत्र के प्रति जागरूकता और भागीदारी को दर्शाता है।
पहले चरण का सार
मतदान तिथि: 6 नवंबर 2025
विधानसभा सीटें: 121
कुल मतदाता: लगभग 3.75 करोड़
वोटिंग प्रतिशत: 64.66% (अब तक का सर्वाधिक)
सबसे अधिक वोटिंग: मुजफ्फरपुर और समस्तीपुर (70%+)

नतीजों से पहले जनता ने दिखाया जोश
चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और पारदर्शी बताया। कई स्थानों पर युवाओं, महिलाओं और पहली बार वोट डालने वालों की उत्साही भागीदारी देखने को मिली। अब सबकी निगाहें दूसरे और तीसरे चरण की वोटिंग पर हैं, जहां यह तय होगा कि बिहार में जनता किसे अपना नेता चुनती है।

