Wednesday, April 29, 2026
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पुराना है नाम बदलने का चलन

अमिताभ स.

पिछले दिनों, भारत के एक राज्य और कुछ शहरों के नाम बदले गए हैं।दक्षिण राज्य केरल का नाम केरलम हो गया है। राजस्थान के दो अन्य शहरों के साथ जाने- माने हिल स्टेशन माउंट आबू का नाम भी बदल कर आबू राज कर दिया गया है। पीछे- पीछे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी ने भी अर्से से उठा रही अपनी मांग भी दोहरा दी है कि पश्चिम बंगाल का नाम बंगाल कर दिया जाए। दिल्ली के चांदनी चौक से सांसद प्रवीण खंडेलवाल भी बीते करीब एक साल से दिल्ली का नाम बदल कर इंद्रप्रस्थ करने की मांग कर रहे हैं। इस प्रकार, देश की राजधानी दिल्ली के नामों का सफर हस्तिनापुर, इन्द्रप्रस्थ,

शाहजहानाबाद, दिल्ली और देहली से हो कर, एक बार फिर इंद्रप्रस्थ

नाम पर ठहर सकता है। इससे बहुत पहले 1990 के सालों में भी एक और तरीके से दिल्ली का नाम बदलने की मांग उठी थी। तब कोशिशें रहीं कि अंग्रेजी में भी दिल्ली को देहली नहीं, बल्कि दिल्ली ही कहा जाए। दिल्ली को देहली, अंग्रेजों ने भारत को भी इंडिया बना दिया था। इंडिया नाम के बदले भारत ही प्रचलित करने की शुरुआत के तौर पर, कई सरकारी समारोहों में अंग्रेजी दस्तावेजों में भी भारत ही लिखा जाने लगा है। तीन दशक पहले भारतीय जनता पार्टी के कद्दावर नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने देशवासियों से सबसे पहले आग्रह किया था कि भारत को भारत ही रहने दीजिए, इंडिया न बनने दीजिए। रामायण के पात्र भरत के नाम पर भारत प्राचीन नाम है, जबकि इंडिया अंग्रेजों का नाम।

राज्यों और शहरों के नाम बदलने का सिलसिला नया नहीं है। केरल के पड़ोसी राज्य तमिलनाडु का नाम तो 58 साल पहले ही बदला जा चुका है। तामिलनाडु को पहले मद्रास कहते थे। सन 1968 में द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने सत्ता में आते ही मद्रास नाम को बदल कर तमिलनाडु कर दिया था। तमिलनाडु शब्द तमिल भाषा के तमिल और देश यानी नाडु से मिलकर बना है। नाम का मतलब तामिलों का घर या तमिलों का देश होता है। देश के कुछ अन्य राज्यों और उनकी राजधानियों के नाम भी बदलते रहे हैं। अगस्त 2008 में राज्य विधानसभा ने उड़ीसा का नाम बदलकर ओडिशा कर दिया गया था। इसी प्रकार, उत्तरांचल राज्य का गठन सन् 2000 में हुआ था, लेकिन स्थानीय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप 2007 आते- आते इसका नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया।

केरलम की बात पर आएं, तो इतिहासकारों का मानना है कि ‘केरलम’ शब्द का उल्लेख सबसे पहले चेरा वंश में मिलता है। तब प्रदेश की भूमि ‘चेरालम’ के नाम से जानी जाती थी। चेरा का अर्थ नारियल और अलेम का मतलब भूमि है। समय- समय पर उच्चारण में आते बदलावों के चलते चेरालम ही केरलम हो गया। मलयालम और अन्य द्रविड़ भाषाओं में स्थानों के नामों में आमतौर पर ‘म’ प्रत्यय लगता है। भाषा के जानकार बताते हैं कि मलयालम व्याकरण के अनुसार ‘केरलम’ ही सही नाम है, जबकि ‘केरल’ अंग्रेजी और दूसरी भाषाओं के मुताबिक है। उल्लेखनीय है कि किसी भारतीय राज्य का नाम बदलने के लिए भारतीय संविधान के अनुच्छेद 3 और 4 के तहत संसद की मंजूरी आवश्यक होती है। राष्ट्रपति भी प्रस्ताव को संबंधित राज्य की विधानसभा के पास मुहर लगाने के लिए भी जरूर भेजते हैं।

मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और दिल्ली समेत देश के चार महानगरों में से तीन के नाम तो बदल चुके हैं। महाराष्ट्र और देश की बिजनेस राजधानी बॉम्बे या बंबई का नाम 1995 में बदलकर मुंबई कर दिया गया था। मुंबई नाम मुम्बादेवी के नाम से जुड़ा है। शिवसेना- भाजपा गठबंधन ने महाराष्ट्र विधानसभा मंत्रिमंडल की अपनी पहली बैठक में पहला फैसला लिया था। दरअसल, बम्बई नाम पुर्तगालियों की देन है। सो, स्थानीय विरासत को सम्मान देने के उद्देश्य से, पुराने नाम मुम्बादेवी के नाम पर मुम्बई कर दिया गया। फिर अगले ही साल 1996 में, तामिलनाडु की राजधानी मद्रास का नाम बदलकर चेन्नई कर दिया गया। तब से तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई के नाम से जानी जाती है।

इसकी अपनी अलग कहानी है। बताते हैं कि 16वीं शताब्दी में ब्रिटिश इंडिया कंपनी मद्रास पहुंची, तो कंपनी ने तत्कालीन शासक चेनप्पा नापकर से कारोबार शुरू किया। अंग्रेजों ने कोरोमंडल तट पर फोर्ट सेंट चर्च बनाने के लिए चन्द्रगिरी के राजा चेनप्पा नापकर से ही फरमान हासिल किया था। उस जमाने में मद्रास का नाम मद्रासपत्तनम था। चेन्नई को चेन्नईपत्तनम का संक्षिप्त रूप बना कर राजधानी का नामकरण किया गया। वैसे, चेन्नई नाम तेलुगु मूल का है। चेन्नई को तमिल संस्कृति से जोड़कर देखा जाता था। पीछे- पीछे 2001 में, पश्चिम बंगाल की राजधानी कलकत्ता का नाम बदल कर कोलकाता हो गया। यह बदलाव भी भारत भर के शहरों के नाम को उनके मूल संस्कृति और स्थानीय विरासत के नामों में बदलने के क्रम का हिस्सा था। राज्यों की राजधानियों के नाम बदलने की होड़ में पटना की भी चर्चा है। आने वाले कुछ सालों में, शायद बिहार की राजधानी पटना का भी नाम बदल जाए। पटना के दो पुराने संभावित नामों पाटलिपुत्र और कुसुमपुर में से एक पर मुहर लग सकती है।

उल्लेखनीय है कि भारतीय शहरों के नाम बदलने की परम्परा अंग्रेजों के जमाने में ही प्रारंभ हो गई थी। अंग्रेज हिन्दुस्तानी नामों का सही उच्चारण करने में कठिनाई महसूस करते रहे। उन्होंने अपनी सहूलियत के लिए मुम्बई से बॉम्बे, गुवाहाटी से गौहाटी, तिरुअनन्तपुरम से त्रिवेन्द्रम वगैरह नामों को बदला। केरल के कई शहरों के अंग्रेजी नामों को 1990 के आसपास वाम लोकतांत्रिक मोर्चा सरकार ने बदला। त्रिवेन्द्रम को तिरुअनन्तपुरम, क्विलीन को कोल्लम, आलेप्पी को आलाप्पुड़ा, त्रिचुर को त्रिशूर, कोचीन को कोच्चि, कालीकट को कोडिकोड, कन्नानोर को कन्नूर और पालघाट को पलक्कड कर दिया गया था। उधर बनारस या काशी को वाराणसी, पणजी को पंजिम, बड़ोदा को बड़ोदरा, पूणा को पुणे और इलाहाबाद को प्रयागराज वगैरह कहा जाने लगा है।

गौरतलब है कि भारत ही नहीं, दुनिया के अन्य देश भी नाम बदलने से अछूते नहीं हैं। यदा- कदा दुनिया भर के देशों और शहरों के नाम बदलते रहे हैं। चीन की राजधानी पेकिंग का नाम बदल कर बीजिंग किया जा चुका है। बीते कुछ दशकों से, यूरोप का देश हॉलैंड नीदरलैंड बन चुका है, एशियाई बर्मा का नाम म्यांमार हो चुका है, तो सोवियत संघ फिर रूस बन गया है, और तुर्की भी अब तुर्कीय है। यही नहीं, सोवियत संघ के मास्को के बाद दूसरे बड़े शहर लेनिनग्राद को उसका पुराना नाम सेंट पीटर्ज़बर्ग वापस मिल गया है।

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