- बुधवार को 42 नए केस आए सामने, जबकि 29 बीमार गोवंश हुए स्वस्थ
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक बुधवार को जनपद में लंपी स्किन डिजीज के एक्टिव केस की संख्या 792 रह गई है। उप मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी डा. एसपी पांडेय ने बताया कि बुधवार को 42 नए केस आए, जबकि इस दौरान 29 बीमार गोवंश स्वस्थ हुए हैं।
अब तक जनपद में कुल प्रभावित 1950 गोवंश लंपी रोग की चपेट में आए हैं, जिनमें से 1158 ठीक हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि पशु पालन विभाग की 31 टीमों के माध्यम से अब तक 327 गांवों में एक लाख 42 हजार 700 गोवंश का टीकाकरण किया जा चुका है। वहीं इस बीमारी की चपेट में आकर अभी तक कुल सात गोवंश की मौत दर्ज की गई है।
जमीन पर नहीं हो रहा रोकथाम का प्रयास
राष्ट्रीय लोकदल के पूर्व क्षेत्रीय अध्यक्ष चौधरी यशवीर सिंह का आरोप है कि लंपी बीमारी की रोकथाम के लिए जमीन पर कोई काम नहीं हो रहा है। पशु पालन विभाग ने गोवंश को उनके रहमो-करम पर छोड़ दिया है, और आंकड़ों के माध्यम से नियंत्रण के खोखले दावे किए जा रहे हैं। जनपद का शायद ही कोई गांव हो, जहां गोवंश लंपी रोग की चपेट में न आए हों।
आए दिन गोवंश इस बीमारी से दम तोड़ रहे हैं, स्वयं उनके अपने क्षेत्र में हाल ही में दो गायों की मौत हुई है। विभाग को चाहिए कि छुट्टा घूम रहे पशुओं की रोकथाम को नगर निगम और कैंट बोर्ड के साथ-साथ नगर निकायों के माध्यम से अभियान चलाने की पहल करे। उनको बीमारी से बचाने के लिए मोबाइल वेन की व्यवस्था कराए। शासन स्तर से भी धरातल पर काम कराने की दिशा में कदम उठाए जाने की जरूरत है।
छुट्टा पशु बन रहे हैं लंपी रोक के संवाहक
शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जाहिद अंसारी का कहना है कि छुट्टा घूमने वाले पशुओं की जब तक रोकथाम नहीं की जाएगी, लंपी बीमारी पर नियंत्रण के प्रयासों को आशातीत सफलता नहीं मिल पाएगी। इस मामले में जिलाधिकारी के स्तर से स्वत: संज्ञान लेते हुए पशु पालन विभाग और नगर निकायों की संयुक्त टीम के माध्यम से प्रयास कराने की जरूरत है।
जाहिद अंसारी ने आशंका जताई कि बिना स्लाटर हाउस के चोरी छिपे होने वाले पशु कटान की ओर कोई अधिकारी नहीं देख रहे हैं, जिसके कारण प्रभावित पशुओं का मीट भी लोगों तक पहुंचने की आशंका बनी रहती है। इस दिशा में सख्ती की आवश्यकता है।

