- 2022 में 12 हजार मरीजों को खोजने का टारगेट मिला था, 10 हजार 737 मिले
जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: देश को 2025 तक TB (ट्यूबरकुलोसिस) रोग से मुक्त बनाना है। पीएम नरेंद्र मोदी का ये संकल्प है। लेकिन दवाई छोड़कर लोगों को खतरे में डालने वाले मरीज गंभीर नहीं हो रहे हैं। टीबी के मरीजों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। यह आंकड़ा तब ज्यादा बढ़ा है, जब कोरोना संक्रमण की चपेट और टीबी के कारण तीन सालों में 875 मरीजों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा मौत 2021 में 337 हुई।
शासन-प्रशासन टीबी मरीजों को लेकर गंभीर है। मरीजों की सेहत को दुरुस्त करने के लिए अभियान, कार्यक्रम और जागरूक करने के लिए स्वास्थ्य विभाग घर-घर सर्वे कर रहा है। खांसी और बुखार के मरीजों को चिह्नित भी किया जा रहा है। यही कारण है, मरीजों की संख्या में कमी आने की बजाए संख्या बढ़ रही है।
सर्वे में बढ़ रही मरीजों की संख्या
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में स्वास्थ्य कर्मचारियों, आशाओं को 12750 मरीजों को खोजने का टारगेट मिला था। स्वास्थ्य कर्मियों ने 7496 मरीजों को खोज निकाला। जिनका इलाज भी पूरा हुआ। लेकिन दो मरीज MDR (मल्टी ड्रग रेजिस्टेंस) श्रेणी में दर्ज हो गए। मरीजों के द्वारा दवाई छोड़ना इसका कारण बना। 2021 में 11 हजार का टारगेट मिला। 9504 टीबी के मरीजों को खोजा गया। जिसमें से 31 मरीज एमडीआर की श्रेणी में आ गए। वहीं 2022 में 12 हजार का टारगेट मिला। टारगेट के सापेक्ष 10,737 मरीज मिले। इसमें से 8731 मरीजों ने उपचार पूर्ण किया। जबकि 5884 का इलाज चल रहा है।
875 मरीजों की तीन साल में मौत
2020 में कोरोना संक्रमण की एंट्री भारत में हुई। पहले और दूसरे फेज में संक्रमण ने ऐसे मरीजों को चपेट में लिया। जिनकी इम्यूनिटी कमजोर थी। यानी पहले फेज में टीबी, कैंसर, एड्स, फेफड़े और खांसी के मरीज। इधर कोरोना संक्रमण के मरीजों की संख्या बढ़ रही थी। वहीं टीबी, कैंसर और एड्स के मरीजों को खुली हवा में सांस लेना मुश्किल हो रहा था।
जिन लोगों ने लगातार इलाज लिया और इम्यूनिटी को ठीक रखा वह बच गए। लेकिन जिन्होंने जरा भी लापरवाही बरती या फिर कोरोना संक्रमण की चपेट में आए। उनके लिए घातक साबित हुआ। आंकड़ों के अनुसार, 2020 में 265 टीबी के मरीजों की मौत हो हुई। जबकि 2021 में कोरोना संक्रमण जब चर्म पर था, तब टीबी के 337 मरीजों की मौत हुई। वहीं 2022 में सामान्य स्थिति में भी 273 टीबी के मरीज परलोक सिधार गए।
चकमा देकर एंटीबॉडी में घुस सकता है BF.7 वैरिएंट
कोरोना वायरस का एक वैरिएंट है ओमिक्रॉन। इसके कई सब वैरिएंट हैं, जैसे- BA.1, BA.2, BA.5 वगैरह। ओमिक्रॉन का ऐसा ही एक लेटेस्ट सब वैरिएंट है BA.5.2.1.7 जिसे शॉर्ट में BF.7 कह रहे हैं। BF.7 वैरिएंट कोरोना वायरस के स्पाइक प्रोटीन में एक खास म्यूटेशन से बना है जिसका नाम है R346T। एक्सपर्ट्स के मुताबिक इसी म्यूटेशन की वजह से इस वैरिएंट पर एंटीबॉडी का असर नहीं होता। आसान शब्दों में कहें तो अगर किसी शख्स को पहले कोरोना हो चुका है या उसने वैक्सीन लगवाई है, तो उसके शरीर में एंटीबॉडी बन जाती है। BF.7 वैरिएंट इस एंटीबॉडी को भी चकमा देकर शरीर में घुसने में सक्षम है।
क्या है टीबी
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ.रणधीर सिंह का कहना है, टीबी रोग बैक्टीरिया के संक्रमण के कारण होता है, जिसे फेफड़ों का रोग माना जाता है। टीबी रोग हवा के जरिए एक इंसान से दूसरे में फैलती है। यह आमतौर पर फेफड़ों से शुरू होती है।
सबसे कॉमन फेफड़ों की टीबी ही है। मगर यह रक्त प्रवाह के साथ शरीर के अन्य अंगों जैसे दिमाग, यूटरस, लीवर, किडनी, गला, हड्डी के जोड़ आदि में भी पहुंच सकती है। टीबी इन्फेक्शन मरीज के खांसने और छींकने के दौरान मुंह-नाक से निकलने वाली बारीक बूंदों के जरिए फैलता है। यदि मरीज के बहुत पास बैठकर बात की जाए और वह खांस या छींक नहीं रहा हो तो भी इसके इन्फेक्शन होने का खतरा रहता है।
टीबी के लक्षण
दो सप्ताह से अधिक दिन तक खांसी का बने रहना।
खांसी के साथ बलगम का आना तथा कभी-कभी खून का आना।
भूख कम लगना तथा शाम व रात को बुखार आना।
सर्दी में भी पसीना आना, सांस उखड़ना या सांस लेते सीने में दर्द होना।
कई मरीजों में कोई भी लक्षण सामने नहीं आता।
टीबी होने का इनको है अधिक खतरा
अच्छा खानपान नहीं करने वालों को, क्योंकि कमजोर इम्यूनिटी वाला शरीर बैक्टीरिया का वार नहीं झेल पाता।
जब कम जगह में ज्यादा लोग रहते हैं तब इन्फेक्शन तेजी से फैलता है।
अंधेरी और सीलन भरी जगहों पर भी टीबी ज्यादा होती है, क्योंकि टीबी का बैक्टीरिया अंधेरे में पनपता है।
धूम्रपान करने वाले को टीबी का खतरा ज्यादा होता है।
डायबिटीज के मरीजों, स्टेरॉयड लेने वालों और एचआईवी मरीजों को भी खतरा ज्यादा।
टीबी से बचने को यह करें
अच्छा खान-पान रखकर अपनी इम्यूनिटी को बढ़िया रखें।
न्यूट्रिशन से भरपूर खासकर प्रोटीन डाइट (सोयाबीन, दालें, मछली, अंडा, पनीर आदि) लेनी चाहिए।
ज्यादा भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें।
कम रोशनी वाली और गंदी जगहों पर नहीं रहें।
अपने शरीर तथा रहने के स्थान की साफ सफाई रखें।
टीबी के मरीज के अधिक पास जाने से बचें।
मरीज खांसते और छींकते वक्त मुंह पर मास्क या रुमाल रखें।
रुमाल और कपड़ों को गर्म पानी में धुलें।
बच्चों को मरीज से दूर रखें, क्योंकि उनमें खतरा अधिक रहता है।
मरीज का झूठा ना खाएं।
मरीज थूकने के बाद थूक पर मिट्टी या राख डाल दें।

