Monday, March 23, 2026
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लंगूरों के कटआउट से मिलेगी बंदरों से निजात

  • वन विभाग प्रभावित इलाकों में लगाएगा कटआउटस
  • शहर और देहात में बंदरों के आतंक से लोग दहशत में
  • जिला अस्पताल में बंदरों के काटने के मामले बढ़े

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम और वन विभाग की लापरवाही के कारण पूरा शहर बंदरों के आतंक के साये में जी रहा है। वन विभाग ने अब बंदरों से निजात पाने के लिये नये तरीके से काम करना शुरु कर दिया है। अब बंदरों को असली लंगूरों से नहीं बल्कि लंगूरों के कटआउट से डराया जाएगा। इसे शहर के तमाम हिस्सों में लगाया जाएगा क्योंकि बंदर सिर्फ लंगूरों से डरता है।

शहर के कई इलाके बंदरों के आतंक से त्रस्त हैं। लोगों का घर से निकलना दूभर हो गया है। ये बंदर कभी-कभी जानलेवा साबित हो जाते हैं। नगर निगम और वन विभाग इन बंदरों को पकड़ने के लिए कई उपाय करता रहा, पर वे बहुत कारगर नहीं हुईं। वन विभाग ने हालांकि नगर निगम को बंदर पकड़ने का ठेका भी दिया हुआ है लेकिन नगर निगम इसमें सफल नहीं हो पाया है।

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इस बार वन विभाग ने बंदरों के आतंक से लोगों को बचाने के लिए शहर के अलग-अलग जगहों पर लंगूर के कटआउट्स लगवाने का प्लान बनाया है। अब तक के तय प्लान के मुताबिक, वन विभाग की टीम उन जगहों पर बंदरों के कटआउट्स लगवाएगी, जहां-जहां बंदरों ने ज्यादा आतंक मचा रखा है। कोतवाली के इलाके बुढानागेट, लाला का बाजार, सराफा, नील की गली, वैली बाजार,कबाड़ी बाजार, ब्रहमपुरी, माधवपुरम, कंकरखेड़ा, सदर, टीपी नगर और शास्त्रीनगर आदि इलाकों में बंदरों का आतंक मचा हुआ है।

वन विभाग को उम्मीद है कि बंदरों को भगाने में यह प्रयोग कारगर साबित हो सकता है। डीएफओ राजेश कुमार ने बताया कि बंदरों से निजात पाने के लिए वन विभाग ये अनोखा प्रयोग कर रहा है। इस प्रयोग के तहत शहर के तमाम स्थानों पर लंगूर के कटआउट्स लगाए जाएंगे। जिÞला वन अधिकारी का कहना है कि केवल प्रयोग के लिये अभी कटआउट्स लगाए जा रहे हैं। आगे चलकर प्रयोग में कुछ बदलाव भी किए जाएंगे।

इस प्रयोग से बंदरों को नियंत्रित करने में अच्छे रिजल्ट की आशा की जा रही है। लंगूर की मौजूदगी से बंदरों में कौतूहल रहता है और वो उस इलाके से दूर रहते हैं। अगर ये प्रयोग सफल होता है तो आगे चलकर विभिन्न विभागों के साथ मिलकर आॅपरेशन बंदर चलाया जाएगा। वहीं जिला अस्पताल में एक जनवरी से लेकर अब तक बंदरों के काटने के 1140 मामले आ चुके है। बंदरों का इस कदर आतंक है कि बंदर न सिर्फ काट रहे है बल्कि नुकसान भी पहुंचा रहे हैं।

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