Sunday, March 22, 2026
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मनरेगा में जॉब कार्ड से घोटाला

  • मंडल के हर जिले में लगा दाग, प्रधान से लेकर बीडीओ तक घोटाले में शामिल
  • बागपत सबसे ज्यादा भ्रष्ट है, जबकि दूसरे नंबर पर मेरठ व तीसरे स्थान पर बुलंदशहर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ : सरकार द्वारा गरीबों को मनरेगा के तहत काम देकर रोजगार देने के उदेश्य से लगातार प्रयास किया जा रहा है, लेकिन कई अधिकारी, कर्मचारी व जनप्रतिनिधि के फर्जीवाड़े से यह पूरी प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में आ गई है। मनरेगा योजना ग्रामीण मजदूरों को गांव में ही पूरी तरह से रोकने में असफल हो रहा है। गांव के मजदूर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर गांवों में मनरेगा योजना के तहत बड़े बड़े घोटाले हो रहे हैं।

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किसी का पैसा किसी के खाते में भेजा जा रहा है। ऐसे कई मामले हैं, जिसका खुलासा सोशल आॅडिट या फिर जांच के दौरान हुआ। जांच में घोटाले की पुष्टि होने के बाद रिकवरी भी बनाई गई। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की शुरूआत बेरोजगार गरीबों के कल्याण के लिए की गई थी, लेकिन सरकार के विकास की यह योजना भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।

कहीं फर्जी जाब कार्ड बनाकर गरीबों के हक की रकम अमीरों के हवाले कर दी गई, तो कहीं कागजों में विकास की गंगा बहाकर धन का गबन हुआ। मेरठ मंडल में एक भी ऐसा जिला नहीं है, जहां मनरेगा लोकपाल की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर न हुआ हो। बागपत सबसे ज्यादा भ्रष्ट है, जबकि दूसरे नंबर पर मेरठ व तीसरे स्थान पर बुलंदशहर हैं, जहां लोकपाल की जांच में लगातार घोटाले सामने आ रहे हैं। प्रधान से लेकर विकास खंड स्तर तक के अधिकारी इन घोटालों में शामिल है।

लोकपाल के मुताबिक बागपत के बोढा, चौहलदा, संतोषपुर, ज्वारा नगर, गौरीपुर आदि ग्राम पंचायतों की जांच में फर्जीवाड़ा उजागर होने के बाद एफआइआर व रिकवरी के आदेश जारी किए जा चुके हैं। 13 ग्राम पंचायतों में जांच चल रही है। मेरठ की मुज्जफरनगर सैनी ग्राम पंचायत में फर्जीवाड़ा सामने आया है, जिसमें बीडीओ के खिलाफ आदेश जारी किया गया है।

मेरठ की आधा दर्जन ग्राम पंचायतों में जांच पूरी कर ली गई है, जिनमें लाखों का घोटाला हुआ है। रिकवरी व एफआइआर के आदेश जारी किए जा रहे हैं। हापुड़ में सोलाना ब्लाक धोलाना, बुलंदशहर में टिटोरा, जहांगीराबाद आदि में भी मनरेगा कार्यों में फर्जीवाड़ा सामने आया है।

यहां हुआ मेरठ में घोटाला

मेरठ में मनरेगा घोटाले का ताजा मामला गगोल गांव का है। बता दें कि गगोल गांव में श्रमिकों द्वारा पांच साल में कोई कार्य नहीं किया गया। इसके बावजूद प्रति वर्ष उनके खाते में मनरेगा के तहत हजारों रुपए खाते में आते रहे। इसके साथ ही इन लोगों द्वारा खाते से पैसा निकाल भी लिया गया। इसकी शिकायत पिछले दिनों ग्राम पंचायत सदस्य शिवकुमार शर्मा ने मनरेगा लोकपाल अंशु त्यागी से की थी, जिसकी जांच चल रही थी।

अब जांच में सामने आया है कि पिछले पांच सालों में मनरेगा योजना के तहत कोई कार्य नहीं किया गया, लेकिन कागजों में लाखों के बजट से कार्य किया गया दिखाया गया। इसके चलते मनरेगा श्रमिकों के खाते में रकम बराबर पहुंचती रही। वहीं, इस रकम का कुछ हिस्सा ही सिर्फ श्रमिकों को दिया गया, जबकि बची हुई धनराशि पूर्व ग्राम प्रधान एवं ग्राम पंचायत सचिव द्वारा निकाल ली गई। जांच में सामने आया कि एक साल के अंतर्गत 10 से 25 हजार रुपए मनरेगा योजना के तहत श्रमिकों के खाते में डाले गए|

लेकिन पूछताछ करने पर पता चला कि मजदूरों ने कोई कार्य नहीं किया। ढाई वर्ष से मेरठ मंडल में नियुक्त मनरेगा लोकपाल के पास आ रही शिकायतों में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। श्रमिकों के दो-दो मनरेगा कार्ड बनाकर धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। गरीबों और श्रमिकों के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में भ्रष्टाचार चरम पर है। जानी ब्लॉक के टिमकिया ब्लॉक में प्रधान ने अपना मनरेगा कार्ड बना लिया। इस मामले में शिकायत लोकपाल के पास पहुंची तो जांच के बाद प्रधान से रिकवरी की गई है।

अब तक जिले के 12 ब्लॉकों में मनरेगा में बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। कई ब्लॉक में लोकपाल ने रिकवरी के आदेश दिए हैं। सरूरपुर खुर्द ब्लॉक के डाहर गांव में मनरेगा के कार्यों में साढ़े तीन लाख रुपये की रिकवरी के आदेश दिए गए हैं। यहां बड़ा गड़बड़झाला सामने आया है। इस मामले में बीडीओ सहित सचिव, प्रधान पर भी कार्रवाई के आदेश हैं।

वहीं, माछरा ब्लॉक के भटीपुरा और परिक्षितगढ़ ब्लॉक के सौंदत्त गांव में भी मनरेगा मामलों में काफी शिकायतें हैं। इसमें लोकपाल ने प्रधान, सचिव और बीडीओ को नोटिस जारी कर दिए हैं। इसके साथ ही रजपुरा ब्लॉक के मुजफ्फरनगर सैनी गांव में 83 हजार रिकवरी के आदेश दिए गए हैं। वहीं, डीडीओ सहित सचिव, प्रधान के खिलाफ एफआईआर की संस्तुति की है।

फर्जी जॉब कार्ड बनाकर मनरेगा में घोटाला

वहीं, गांव में कई लोगों के नाम से फर्जी जॉबकार्ड बने हुए हैं। जिसके जरिए लोग मनरेगा में फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे हैं। दरअसल, मनरेगा योजना भ्रष्टाचारियों के लिए लूट का खजाना बन गया है। हालत यह है कि ग्राम प्रधान आदि की मिलीभगत से जॉब कार्ड पर ब्लॉक कर्मी चहेतों का खाता संख्या फीड कर रहे हैं। इसमें नाम किसी का और भुगतान किसी और के खाते में हो रहा है।

बागपत में भी मनरेगा कार्यों में व्यापक गड़बड़ी: जिले के अधिकांश ग्राम पंचायतों में मनरेगा कार्यों में धांधली-गड़बड़ी होने का मामला प्रकाश में आ चुका है। मनरेगा के लोकपाल ने गत वर्ष 2021 अक्तूबर माह में गौरीपुर जवाहर नगर में मनरेगा कार्यों की जांच कराई थी, इनमें धनराशि खुर्द-बुर्द होने की पुष्टि भी हुई। मनरेगा लोकपाल ने संबंधित विभाग को वीडीओ व ग्राम प्रधान सहित पांच के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर धनराशि वसूली के आदेश जारी किए थे।

बता दें कि मनरेगा मेरठ मंडल की लोकपाल अंशु त्यागी को ग्राम गौरीपुर जवाहर नगर में मनरेगा कार्यों में वित्तीय वर्ष 2016-17 2018-19, 2019-20 एवं 2020-21 में अंकन 145164 का दुर्विनियोग / वित्तीय अनियमितताएं मिली थी। उन्होंने मुख्य विकास अधिकारी , आयुक्त, ग्राम्य विकास उप्र को मनरेगार्न्तगत पाई गई अनियमितताओं के सम्बन्ध में ग्राम प्रधान, मापांकन करने वाले अवर अभियन्ता/ तकनीकी सहायक तथा सम्बन्धित ग्राम पंचायत सचिव से 145164 लाख रुपये की वसूली की कार्ययवाही करने के आदेश दिए थे।

इतना ही नहीं उक्त धनराशि जमा नहीं करने पर राज्य रोजगार गारंटी अधिनियम के तहत संबंधित के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के निर्देश दिए थे। बताया जाता है कि करीब पांच माह बीत जाने के बावजूद संबंधित विभागीय स्तर पर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।

इस संबंध में मनरेगा के लोकपाल अंशु त्यागी ने बताया कि यह मामला गंभीर है, इस प्रकरण में पत्राचार कर विभागीय अधिकारी से कार्यवाही नहीं करने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा जाएगा। जिससे कि भविष्य में मनरेगा योजनार्न्तगत धनराशि का दुरुपयोग न हो सके।

गौतमबुद्ध नगर भी नहीं अछूता: दादरी व जेवर के एक दर्जन से अधिक गांव जांच के घेरे में हैं। शादीपुर छिड़ोली, छायसा, मोहबलीपुर समेत कई अन्य गांवों में जांच कर मनरेगा लोकपाल आदेश जारी कर चुका है। एक मामले में एफआइआर व रिकवरी के आदेश भी जारी हुआ है।

जेवर के मोहबलीपुर गांव में तालाब का सुंदरीकरण, पौधारोपण आदि कार्यों के लिए मनरेगा के तहत रकम निकाली गई, वहीं उन्हीं कार्यों को अधिकारी पीडब्ल्यूडी (लोक निर्माण विभाग) से भी होना बता रहे हैं। मनरेगा की जांच में लगातार फजीर्वाड़ा सामने आ रहे हैं। प्रधान, सचिव, अकाउंटेंट, खंड विकास आधिकारी आदि के खिलाफ जांच में गड़बड़ियां मिल रही हैं।

ऐसे दिया फर्जीवाड़े को अंजाम

  • सगे संबंधियों को श्रमिक दिखाकर भुगतान उठाया गया।
  • मनरेगा के मजदूरों से अन्य स्थानों पर काम कराया गया।
  • कागजों में करा पूरे हो गए जबकि धरातल पर कुछ भी नहीं मिला।
  • दूसरे गांव के व्यक्तियों के जाब कार्ड बना दिए गए।
  • मनरेगा कार्यों को श्रमिकों की जगह मशीनों से करा दिया गया
  • एक कार्यों को मनरेगा के साथ अन्य विभागों से भी होना दर्शाया गया।

लोकपाल की जांच में एफआईआर व रिकवरी के आदेश

जिले के ब्लॉकों में मनरेगा में बड़ा गड़बड़झाला सामने आ रहा है। गगोल गांव में जांच में सामने आया है कि यहां पर बजट में बड़ा घोटाला किया गया है। इसमें बीडीओ और ग्राम पंचायत सचिव को नोटिस दिया गया है। रिकॉर्ड मिलने पर आगे की कार्यवाही की जाएगी।

अंशु त्यागी, लोकपाल, मनरेगा

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