Wednesday, March 11, 2026
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ई-मेल से हाईकोर्ट में भेजा माफीनामा

  • टोल ठेकेदार की याचिका की सुनवाई पर हाईकोर्ट का चला चाबुक

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: कारगुजारियों की शिकायत को गुनाह में शामिल करना कैंट बोर्ड के अफसरों को भारी पड़ गया। इस संबंध में दायर की गयी एक याचिका की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने चाबुक चलाया तो नौबत सीईओ कैंट के माफी नामे तक जा पहुंची। ईमेल से माफी नामा भेजकर किसी प्रकार जान बचाई। दस माह के दौरान ये दूसरी बार है, जब कैंट के अफसरों को हाईकोर्ट के समक्ष सॉरी बोलना पड़ा है। ये पूरा मामला टोल ठेकेदार से जुड़ा है।

शिकायत पर किया ब्लैक लिस्ट

ये पूरा मामला कैंट बोर्ड अफसरों व सदस्यों के खिलाफ रक्षा मंत्रालय व कोर्ट में की गयी शिकायतों से जुड़ा है। टोल ठेकेदार की ओर से करीब दर्जन भर शिकायतें तथा वाद रक्षा मंत्रालय व हाईकोर्ट में दायर किए गए हैं। ठेकेदार को आरोप है कि इससे खिन्न होकर बोर्ड प्रशासन ने उन्हें ब्लैक लिस्ट कर दिया। बोर्ड के किसी भी ठेके की बोली में भाग लेने पर रोक लगा दी।

कोर्ट ने माना गंभीर कृत्य

कैंट बोर्ड प्रशासन के इस फैसले के विरोध में ठेकेदार ने हाईकोर्ट में गुहार लगायी। शनिवार को मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बोर्ड के अफसरों को तलब कर लिया। इतना ही नहीं माफी मांगने के लिए कहा गया। माफी न मांगने की स्थिति में सजा की चेतावनी तक दे डाली।

कोर्ट के आदेश की जानकारी जब बोर्ड के पैरोकार वकील ने बोर्ड अफसरों को दी तो उनमें हड़कंप मच गया। इसको लेकर कानूनी राय ली गयी। बताया जाता है कि सभी विशेषज्ञों ने बोर्ड अफसरों को बिना शर्त माफी मांग लेने तथा जारी आदेश को सरेंडर करने की सलाह दी।

ई-मेल से भेजा माफी नामा

बोर्ड प्रशासन की कारगुजारी को लेकर हाईकोर्ट में बोर्ड के वकील पहले ही माफी मांग चुके थे, लेकिन उसने भर से कोर्ट संतुष्ट नहीं था। ठेकेदार ने बताया कि कोर्ट का रूख देखकर वकील ने बोर्ड अफसरों को लिखित माफी नामा भेजने को कहा। उसके बाद यहां से सीईओ की ओर से एक लिखित माफी नामा हाईकोर्ट को ईमेल किया गया। तब कहीं जाकर बोर्ड अफसरों की जान बच सकी।

माफी नामा बिना शर्त मांगा गया है। साथ ही ठेकेदार के खिलाफ जारी आदेश के सरेंडर की भी लिखित जानकारी कोर्ट को दी गयी है।

दूसरी बार बोलना पड़ा है सॉरी सर

सीईओ कैंट के लिए ये दूसरा मौका है जब हाईकोर्ट के समक्ष उन्होंने सॉरी बोला है। इससे पहले टोल ठेका खत्म किए जाने के मुददे को लेकर कैंट बोर्ड के तत्कालीन अध्यक्ष व वर्तमान सीईओ को हाईकोर्ट ने अवमानना के मुदकमे के चलते न केवल तलब कर लिया था वर्ना रक्षा मंत्रालय के इन दोनों अफसरों को खुद कोर्ट के समक्ष मौजूद होकर माफी भी मांगनी पड़ी थी। इस पूरे प्रकरण को सीईओ के लिए प्रमोशन से पूर्व बड़ी फजीहत माना जा रहा है।

बोर्ड के सदस्यों ने साधी चुप्पी

इस मुद्दे पर इस संवाददाता ने जब कैंट बोर्ड के सदस्यों से सवाल किया पूरे प्रकरण के लिए किसी जिम्मेदार माना जाए पूछा तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। कुछ ने आफ दा रिकार्ड कोर्ट के आदेश पर टिप्पणी करने से इनकार करते हुए इसका ठीकरा भाजपा खेमे पर फोड़ दिया। हालांकि भाजपा के कुछ सदस्य भी इस प्रकरण से खुद को अलग रखने की बात कह रहे हैं।

बोर्ड के भाजपाई सदस्यों का कैंट विधायक को जोर का झटका धीरे से

एंट्री फीस के तीन टोल नॉकों पर कैंट बोर्ड के भाजपाई सदस्यों ने एक बार फिर कैंट विधायक तथा संगठन को जोर का झटका धीरे से दिया है। उपाध्यक्ष की कुर्सी से बीना वाधवा को हटाने और विपिन सोढ़ी की ताजपोशी के बाद कैंट बोर्ड पर वर्चस्व कायम करने का दम भरने वाले संगठन की किरकिरी का कारण भी भाजपा के यही सदस्य बने हुए हैं। टोल के मुददे पर सांसद, विधायक व संगठन हमेशा ही विरोध में रहे हैं।

इसकी बड़ी वजह लोगों की खासतौर से व्यापारी वर्ग की नाराजगी है। इसको भांपते हुए कैंट बोर्ड के भाजपाई खेमे से इतर संगठन खासतौर से कैंट विधायक ने टोल के मुददे पर प्रबल विरोध किया। बीते 30 सितंबर को हुई बैठक में तीन टोल नॉकों दिल्ली रोड, मवाना रोड व रुड़की रोड को नये टेंडर से हटवाने के लिए पहुंचे थे।

उपाध्यक्ष व भाजपाई खेमे ने कैंट विधायक को भरोसा भी दिलाया था, लेकिन एकाएक तीन दिन पहले रिटेंडर कर यूटर्न ले लिया और जिन ठेकों का विरोध कैंट विधायक ने मेरठ से लेकर लखनऊ तक किया है उन तीनों ही ठकों को एक बार फिर से शामिल कर लिया।

संगठन खासतौर से भाजपा के विधायक समर्थक खेमे में इसको कैंट विधायक के खिलाफ बड़ी मुहिम के रूप में देखा जा रहा है। समर्थकों में इसको लेकर नाराजगी है। वहीं, दूसरी ओर कहा जा रहा है कि तीन नाकों को दोबारा से ठेके में शामिल किए जाने के पीछे कैंट विधायक के खिलाफ सोची समझी रणनीति का हिस्सा है।

नेशनल हाइवे व पीडब्ल्यूडी की सड़क पर चलाए जा रहे तीन टोल नॉकों के खिलाफ कैंट विधायक अब तक जीओसी इन चीफ मध्य कमान लखनऊ तथा पीडब्ल्यूडी मंत्री से मिलकर पूरे मामले से अवगत करा चुके हैं। इन तीनों ही टोल नाकों को अब कैंट की राजनीति में कैंट विधायक की प्रतिष्ठा से जोड़कर देखा जा रहा है, जिस पर बट्टा लगाने पर कोई और नहीं बल्कि कैंट बोर्ड का भाजपाई खेमा लगा हुआ है।

सदस्य काट रहे कन्नी

इस संबंध में जब कैंट बोर्ड उपाध्यक्ष व भाजपा खेमे के दूसरे सदस्यों से सवाल किया गया तो उन्होंने इस मुददे पर चुप्पी साध ली। टोल मुददे पर किसी प्रकार की बातचीत से साफ मना कर दिया। इसको कैंट प्रशासन का निर्णय बताकर पल्ला झाड़ लिया।

ये कहना है विधायक का

इस संबंध में कैंट विधायक सत्यप्रकाश अग्रवाल से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि वह जनता की आवाज उठा रहे हैं। नेशनल हाइवे और पीडब्ल्यूडी की सड़क पर कैंट वसूली पूरी तरह से नियम विरुद्ध है। जब उनसे कैंट बोर्ड के भाजपाई सदस्यों को लेकर सवाल किया तो उनका कहना था कि मैं केवल जनता की लड़ाई लड़ रहा हूं।

संगठन के आदेश का इंतजार

इस संबंध में वार्ड छह की सदस्य मंजू गोयल का कहना है कि जो भी संगठन का आदेश होगा कैंट बोर्ड में उसी का अनुपालन कराया जाएगा। एक भाजपाई व बोर्ड के सदस्य होने के नाते वह संगठन के निर्णय के साथ हैं।

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