- जिला अस्पताल में जलने वाले मरीजों को मेडिकल में किया जाता है रेफर
- मानक के अनुसार सुविधा नहीं, बर्न वार्ड में संक्रमण का हमेशा खतरा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज लाचार हैं। निजी अस्पताल में इलाज महंगा है और सरकारी अस्पतालों में सुविधाएं नहीं हैं। यह हालात तब हैं, जबकि केंद्र और यूपी सरकार स्वास्थ्य सुविधाएं पर खासा जोर दे रही है, मगर अब भी शहर के सरकारी अस्पताल सुविधाओं के अभाव से जूझ रहे हैं।
सुविधाओं के अभाव में लाखों मरीजों को परेशानी हो रही है। जिला अस्पताल में गंभीर रूप से झुलसे मरीजों के इलाज का इंतजाम नहीं है। अस्पताल में बर्न वार्ड न होने से यहां सिर्फ मामूली रूप से झुलसे मरीजों का इलाज हो पाता है। गंभीर मरीजों को अन्यत्र उपचार के लिए ले जाना पड़ता है।

गर्मियां शुरू होते ही आग लगने की घटनाएं बढ़ जाती है, जाहिर है इनका शिकार होने वाले मरीजों के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों में इंतजाम भी होने चाहिए, लेकिन यह मेरठ का दुर्भाग्य है कि यहां अच्छा खासा जिला अस्पताल व मेडिकल कॉलेज होने के बाद भी आग से झुलसे लोगों के इलाज के कोई इंतजाम नहीं है। जिला अस्पताल में बर्न वार्ड नहीं है। जबकि मेडिकल का बर्न वार्ड खुद बीमार है।
मेडिकल का बर्न वार्ड यूं तो आग से झुलसे मरीजों के इलाज करनें के लिए बना है, लेकिन यहां मरीजों का इलाज करने की कोई सुविधा नहीं है। बर्न वार्ड में दूसरी बीमारियों के मरीज भर्ती है, जबकि सुविधाओं के नाम पर केवल खानापूर्ति नजर आती है। सवाल यह उठता है कि सरकार द्वारा हर साल करोड़ों रूपये का बजट मेडिकल कॉलेज में भर्ती मरीजों के इलाज के लिए आता है।
जले हुए मरीजों को विशेष तरह के संसाधनों व इलाज की जरूरत पड़ती है, लेकिन मेडिकल का बर्न वार्ड खुद बीमार है तो यहां आग से झुलसे मरीजों के इलाज से पहले वार्ड का इलाज करने की जरूरत है। वहीं, मेडिकल कॉॅलेज के बर्न वार्ड के इंचार्ज डा. भानू प्रताप का कहना है बर्न वार्ड के लिए नई बिल्डिंग बन रही है। साथ ही जो वार्ड पुरानी बिल्डिंग में हैै। उसके लिए स्टाफ नहीं हैै, सरकार द्वारा प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में नई बर्न यूनिट तैयार करने की तैयारी है।

जल्दी ही यहां पर भी नई युनिट चालू हो जाएगी। स्टाफ की नियुक्ति होने के बाद बर्न युनिट शुरू हो जाएगी। फिलहाल जले हुए मरीजों का इलाज प्लास्टिक सर्जरी विभाग में किया जाता है, लेकिन बर्न यूनिट कब तक शुरू हो जाएगी, इस सवाल का कोई जवाब नहीं मिला।
बर्न वार्ड के ड्यूटी रूम पर लटका ताला
मेडिकल के बर्न वार्ड में ड्यूटी करने के लिए स्टाफ नहीं है, यहां तक की जिस जगह डाक्टर व नर्स समेत अन्य स्टाफ होना चाहिए वहां ताला लटका है। अंदर रखे फर्नीचर पर धूल चढ़ी है, जिसे देखकर ही पता चलता है कि यहां महिनों से कोई नहीं आया है।
बर्न वार्ड के एसी भी बंद
बर्न वार्ड में कुल दो एसी लगे है जो पिछले लंबे समय से बंद है। वार्ड में दूसरी बीमारियों के मरीजों को रखा गया है, आग से झुलसा एक भी मरीज इस वार्ड में नहीं है। जो मरीज भर्ती है वह उनकी देखभाल के लिए भी कोई स्टाफ वार्ड में दिखाई नहीं दिया।
कुल छह बेड है बर्न वार्ड में
बर्न यूनिट में कुल छह बेड पड़े हैं। जिन पर न तो गद्दे हैै और न ही बेडशीट। जो बेड है, उन पर भी धूल की मोटी परत चढ़ी हुई है। मौके पर मौजूद एक कर्मचारी ने बताया कि बर्न वार्ड काफी दिनों से खुला नहीं है, न ही यहां सफाई हुई है। ऐसे में यदि कोई आग से झुलसा मरीज आता है तो उसका इलाज करने के लिए कोई संसाधन नहीं है।

