Friday, February 20, 2026
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एकता, सौहार्द की प्रतीक है बाले मियां की दरगाह

  • बाले मियां का मिशन पूरी दुनियां का पालनहार एक है
  • हर वर्ग एवं समुदाय के लोगों को आपसी भाईचारे से रहना चाहिए

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हिन्दू-मुस्लिम एकता एवं सौहार्द का प्रतीक हजरत बाले मियां के मजार पर हर धर्म एवं जाति के लोग आज भी आते हैं। हजरत बाले मियां महान सूफी संत थे।उन्होंने अपने जीवनकाल में सभी वर्ग के लोगों को प्यार मुहब्बत के साथ रहने की सीख दी। उनका मक्सद एवं उददेश्य था कि पूरी दुनियां का पालनहार एक है जिसमें ऊंच नीच जाति धर्म का कोई भेदभाव नहीं है। इसलिये हम सबको प्यार मुहब्बत और भाई चारे के साथ रहना चाहिए।

सूत्र बताते हैं कि इस मिशन को लेकर हजरत बाले मियां सन 1034 में ईराक के शहर हीरात से हिन्दुस्तान आए और विभिन्न स्थानों से होते हुए उन्होंने मेरठ की धरती पर कदम रखा और यहां पर उन्होंने अपने मिशन प्यार मुहब्बत एवं सौहाद के साथ जिंदगी गुजारने का प्रचार प्रसार किया और सभी वर्गों को यह संदेश दिया कि तुम्हारी एकता एवं सौहार्द ही तुम्हारी खुशहाली व तरक्की का रास्ता है।

नौचंदी मैदान स्थित बाले मियां दरगाह के सज्जादा नशीन मुफ्ती मौहम्मद अशरफ ने बताया कि बाले मियां के प्रचार प्रसार के समय बहुत उनके अनुआई एवं समर्थक हुए, लेकिन कुछ लोगों ने उनके मिशन को अच्छा नहीं माना और इस पर विवाद भी हुआ। उन्होंने जानकारी दी कि चार अप्रैल-1034 को ही नौचंदी के मैदान में बाले मियां की शहादत हुई और उनके अनुयाइयों ने यहां पर नौचंदी जुमेरात को उनका मजार शरीफ स्थापित किया जो अब वर्तमान में दरगाह का रूप लिये है।

कहते हैं कि सन 1194 में हिन्दुस्तान के बादशाह सुलतान कुतुबुद्दीन ऐबक उनके मजार पर तशरीफ लाए और यहां पर उन्होंने ईदगाह की तामीर कराई। इसके बाद सन1212 में हिन्दुस्तान के बादशाह शाह आलम द्वितीय हुए और वह भी बाले मियां की मजार पर आए। उन्होंने बाले मियां के अनुयाइयों एवं समर्थकों से वार्ता की और यह फरमान जारी किया कि इस मजÞार से हर वर्ग के लोगों को फैज़ का जरिया जारी है और हर जाति धर्म के लोग बिना किसी भेदभाव के यहां हाजरी देते एवं उपस्थित होते हैं जो मन्नत मुराद मांगते हैं।

इसलिये बादशह ने बाले मियां से संबंधित 40 बीगा जमीन का लगान माफ कर दिया, इस जमीन को बाले मियां की मिलकियत करडाली और इसकी आमदनी उर्स बाले मियां पर खर्च होगी। सज्जादा नशीन ने बताया कि सन1883 में मेरठ डीएम एफएन राइट ने बाले मियां की दरगाह के ठीक सामने स्थित चंडी देवी मन्दिर के महत्व को देखते हुए इस जगह का नाम मेला नौचंदी रख दिया, जिस पर हर वर्ष विशाल मेला लगता आ रहा है।

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