Friday, February 20, 2026
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क्षतिग्रस्त पड़ीं इमारतें…शिक्षक तक नियुक्त नहीं

  • हाल-ए-तालीम: विभाग की लापरवाही का दंश झेल रहे जड़ौदा
  • गेसूपुर दतावली और सैनी के इंटरमीडिएट कॉलेज
  • अफसरों की आंख में धूल झोंक रहे संबद्ध शिक्षक

जनवाणी संवाददाता |

किठौर: सरकारें भले ही शिक्षा के अधिकार को कानूनी रूप देने के दावे कर रही हों मगर वास्तविकता एकदम अलग है। विभागीय अफसरों व मातहतों ने शिक्षा को मजाक बना रखा है। आलम यह है कि बरसों पूर्व बने सरकारी कॉलेज अनदेखी के कारण क्षतिग्रस्त हो गए, लेकिन उनमें शिक्षकों की नियुक्ति तक नही हो पाई। खानापूर्ति के लिए जिन शिक्षकों को इन कॉलेजों से संबद्ध किया गया वो भी शासन की आंख में धूल झोंकने का काम कर रहे हैं। लेकिन महकमा सुध लेने को तैयार नही।

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जड़ौदा में सपा शासन काल में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री/किठौर विधायक शाहिद मंजूर ने मल्टीसेक्टोरल डवलपमेंट प्लान के तहत करीब सात वर्ष पूर्व राजकीय इंटर कॉलेज स्वीकृत कराया था। जो 2016-17 में बनकर तैयार हो गया। शैक्षिक सत्र 2017-18 में कॉलेज बिल्डिंग विभाग को हैंडओवर भी कर दी गई, लेकिन आज तक उसमें किसी शिक्षक की नियुक्ति नही हो पाई है।

कॉलेज प्रांगण में खड़ा खरपतवार, बिल्डिंग की जर्जर स्थिति और गेट पर पड़े जंग लगे ताले बयां कर रहे हैं कि कॉलेज खुलता नही है। हालांकि पड़ताल करने पर पता चला कि विभाग ने जीजीआईसी किठौर की प्राचार्य रिदा जोशी को ही यहां का इंचार्ज बना रखा है और अतराड़ा इंटर कॉलेज में नियुक्त शिक्षक अमित इस कॉलेज से संबद्ध है। वहीं ग्रामींण रमेश, मुकेश, तालिब, जावेद, शाहिद आदि का कहना है कि इस कॉलेज का गांव को कोई लाभ नही पहुंचा।

महीने-दो महीने में एक शिक्षक यहां आता है। एकाध दिन स्कूल खोलकर गायब हो जाता है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि फरवरी में परीक्षा के दौरान स्कूल खुला था। उसके बाद शिक्षक नही लौटा। जबकि प्राचार्य रिदा जोशी का दावा है कि शिक्षक अमित कुमार प्रतिदिन स्कूल जाते हैं। इस बाबत शिक्षक अमित कुमार से बात की गई तो उन्होंने कभी-कभी स्कूल पहुंचना स्वीकार किया।

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बताया कि पहले बोर्ड परीक्षा, फिर उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन में ड्यूटी लगी रही जिस कारण स्कूल नही पहुंच पाया। कॉलेज में 18 छात्र-छात्राएं हैं। दो दिन पूर्व उनके रिजल्ट देने के लिए स्कूल खोला था। बिल्कुल यही स्थिति गेसूपुर दतावली में बनें मॉडल इंटर कॉलेज और सैनी में बने कॉलेज की है।

स्टाफ नही पूरा, कोर्स रहता अधूरा

पड़ताल में सामने आया कि किठौर के जीजीआईसी, बहरोड़ा, कायस्थ बड्ढा, मुंडाली के अजराड़ा आड़, कबट्टा, के अलावा कुनकुरा, मामेपुर, खरखौदा के उलंधन, पीपलीखेड़ा, गोविंदपुरी, गांवों में बने राजकीय माध्यमिक/उच्च माध्यमिक विद्यालय शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। शिक्षकों के अभाव में काफी मेहनत के बाद भी छात्र-छात्राओं का कोर्स पूरा नही हो पाता है।

विभाग में शिक्षकों की कमी है, लेकिन शिक्षकों की संबद्धता के बावजूद जिले के तीन कॉलेजों का बंद पड़े रहना चिंताजनक है। मामले का स्वयं संज्ञान लेकर कार्रवाई करुंगा। -ब्रजेश सिंह, जिला विद्यालय निरीक्षक

मैंने सपा सरकार में अपने क्षेत्र में कई राजकीय हाईस्कूल, इंटरमीडिएट कॉलेज बनवाए, लेकिन सरकार जाने के बाद बहुत से कॉलेजों में शिक्षकों की नियुक्ति नहीं होने की वजह से आजतक बंद पड़े हैं। इसके लिए शासनस्तर पर वार्ता कर शिक्षक नियुक्त कराने का प्रयास किया जाएगा। ताकि जनता लाभांवित हो सके। -शाहिद मंजूर, विधायक किठौर

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