Sunday, March 15, 2026
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खूब काटे जा रहे हरे-भरे पेड़, सब बेखबर

  • हरियाली को खत्म कर रहे वन माफिया
  • चंद पैसों के लालच में वन माफिया कर रहे कटान वन विभाग को नहीं खबर
  • आए दिन हस्तिनापुर और परीक्षितगढ़ क्षेत्र में काटे जा रहे हरे-भरे पेड़

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: जहां एक ओर आॅक्सीजन की किल्लत को दूर करने के लिए सरकार द्वारा कड़ी मेहनत के साथ हरियाली के महत्व को समझते हुए शहरी व ग्रामीण क्षेत्र में हर साल पौधरोपण का कार्य कराया जा रहा है। वहीं, दूसरी ओर चंद पैसों के लालच में आॅक्सीजन देने वाले वृक्षों पर वन विभाग की मिलीभगत के चलते आए दिन जमकर आरी चलाई जा रही है। पुलिस प्रशासन सब कुछ जानते हुए भी मूकदर्शक बना हुआ है।

कोरोना की दूसरी लहर ने सभी को पेड़ों द्वारा मिलने वाली आॅक्सीजन के महत्व को बखूबी समझाया है कि आॅक्सीजन की कमी से किस तरह लोग अपनों की आखों के सामने दम तोड़ रहे थे। सूत्रों की माने तो इस समय वन माफिया वन विभाग कर्मचारियों की मिलीभगत से पेड़ों की जमकर कटाई कर रहे है। हाल ही में हस्तिनापुर क्षेत्र में इस तरह का मामला भी सामने आया था।

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कुछ ठेकेदार वन विभाग अधिकरियों से मिलकर आधा दर्जन पेड़ काटने की परमिशन ले लेते हैं और उसी की आड़ में बड़ी संख्या में छायादार और फलदार वृक्षों को काट दिया जाता है। सूचना मिलने पर भी वन विभाग की ओर से माफियों पर किसी तरह की कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिससे वन माफियों के हौसले और बुलंद हो रहे हैं। प्रदेश सरकार की ओर से सभी शहरों को हरा-भरा बनाए रखने के लिए हर साल बरसात के मौसम में पौधरोपण कराया जाता हैं,

जिसमें सभी सरकारी विभागों को वन विभाग की ओर से पौधरोपण का कार्य सौंपा जाता हैं, लेकिन अगर वन विभाग लगाए गए पौधों और हरे पेड़ों के कटान पर ध्यान नहीं देगा तो ऐसे में शहर हरा-भरा कैसे दिखाई देगा यह सोचनीय सवाल है। पौधरोपण की बात करे तो मेरठ में पिछले पांच साल में एक करोड़ से अधिक पौधे रोपे गए हैं, लेकिन लगातार हो रहे कटान की वजह से पेड़ों की संख्या नहीं बढ़ पा रही है। ऐसा इस लिए कहा जा रहा है कि अगर शहर और ग्रामीण क्षेत्र में लगाए गए 50 प्रतिशत पौधे भी सुरक्षित रहते तो शहर की हवा इतनी खराब नहीं होती।

सात फीसदी है वन क्षेत्र

पौधरोपण के लिए वन विभाग के पास इस वर्ष केवल सात फीसदी भूमि है। जबकि 93 फीसदी भूमि निजी है। राष्ट्रीय वन नीति के तहत 33 फीसदी भू-भाग पर वन क्षेत्र होना आदर्श मानक है। ऐसे में साल दर साल बढ़ रहा पौधरोपण केवल खानापूर्ति साबित हो रहा है।

क्या कहना है इनका

डीएफओ राजेश कुमार का कहना है कि हस्तिनापुर में पेड़ काटने की सूचना मिलने पर संबंधित लोगों पर कार्रवाई की गई थी। यदि कही और कटान किया जा रहा है तो उसकी जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाएगी।

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