Saturday, April 11, 2026
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असफलता से टूटने नहीं दें मन की ताकत

 

PROFILE


सोलह वर्ष की कामना बारहवीं क्लास की स्टूडेंट थी। वह एक महत्वाकांक्षी लड़की थी और अपने लक्ष्य सिद्धि के लिए कठिन मेहनत करती थी। मेडिकल एन्ट्रेन्स इग्जैमिनैशन की तैयारी के लिए उसने एक कोचिंग क्लास भी जॉइन कर लिया था। किन्तु दुर्भाग्यवश वह इस एन्ट्रेन्स टेस्ट में सफल नहीं हो पाई। कामना अपनी इस असफलता से घोर निराश से घिर गई। वह गहरे अवसाद में चली गई। समय के साथ पेरेंट्स के द्वारा समझाने-बुझाने और प्रेरित करते रहने से अंतत: वह खुद को इस असफलता के दर्द से समझौता कर पाई और एक बार फिर से अपने सपनों के साथ उठ खड़ी हुई।

इस बार उसने खुद की कमी को बड़ी ईमानदारी से ढूंढा और उसे दूर करने के लिए काफी मिहनत की। कामना के लिए इस बार मेडिकल एन्ट्रेंस टेस्ट में सक्सेस ने उसे जीवन में कई महत्वपूर्ण बातें सिखा दीं थीं। वह अब इस बात को अच्छी तरह से समझ गई थी कि फेलियर कभी भी फाइनल नहीं होता है और खुद की कमी को दूर करने के लिए इससे बड़ा कोई शिक्षक नहीं होता है।

कामना जैसी न जाने कितने शख्स हैं जो सफलता की चाह में प्राप्त असफलता से पूरी तरह टूट जाते हैं और यह मानकर चलते हैं कि अब उनके लिए दुनिया के सारे दरवाजे बंद हो चुके हैं। कभी शिद्दत से सोच कर देखें तो एक सत्य जो हमारे सामने खुल कर आता है वो यह है कि असफलता महज सफलता की राह में एक अस्थायी पड़ाव है जो हमें आगे की यात्रा के लिए तैयार करती है।

चीन में एक कहावत काफी प्रसिद्ध है, ‘असफलता का अर्थ गिरना नहीं है बल्कि उठ खड़ा होने के लिए मना कर देना है।’ आशय है कि असफलता के बाद सबसे बड़ा अवरोध हमारे मन में जन्म लेता है। हम अपने सपने को साकार करने में असफल क्या होते हैं मन में खुद को कमजोर करने वाली विचारों की एक तेज आंधी उठ खड़ी होती है जिसकी चपेट में हमारा आत्मविश्वास तार झ्र तार हो जाता है और हम खुद को हर शख्स से इन्फीरीअर महसूस करने लगते हैं।

खुद को अयोग्य समझने और अपनी प्रतिभा में ही संदेह करने की यह मानसिक दशा घुन के समान होता है जो हमें अंदर-अंदर ही कमजोर और खोखला कर देती है। लिहाजा जब हम असफल हो जाएं तो मन को मजबूत बनाए रखने की सख्त जरूरत है।

महान अमेरिकी इन्वेन्टर, वैज्ञानिक और बिजनेसमैन थॉमस अल्वा एडिसन का संपूर्ण जीवन दृढ़ आत्मविश्वास और मानसिक दृढ़ता की कहानी है। वे अपने सात भाई-बहनों में सबसे छोटे थे। जब वे महज 12 वर्ष के थे तो उनको एक कान से बिल्कुल सुनाई नहीं देता था और दूसरे कान से भी काफी कम ही सुन पाते थे। वे कुछ महीनों तक की ही स्कूली शिक्षा प्राप्त कर पाए थे। किंतु वे बचपन से ही काफी जिज्ञासु थे और अधिकांश चीजें वे खुद पढ़कर सीख जाते थे। उन्होंने पढ़ने, लिखने और गणित का ज्ञान अपनी मां से प्राप्त किया था, जो एक टीचर थीं।

उन्होंने अपने कॅरियर की शुरुआत ट्रेन में पेपर और सब्जियां बेचने से की थी। उनके हेडमास्टर ने उन्हें उनकी मां के नाम एक पत्र के साथ यह कहते हुए अपने स्कूल में शिक्षा देने से मना कर दिया था कि उनका पुत्र स्कूली शिक्षा के काबिल नहीं है, बेहतर होगा कि उसे घर पर ही पढ़ाएं। किंतु उनकी मां एक साहसी महिला थीं और उसे अपने बेटे की काबिलियत में दृढ़ विश्वास था। उन्होंंने उन्हें घर पर ही पढ़ाना शुरू किया और अंतत: एडिसन विश्व इतिहास में उपलब्धियों के मीलस्तंभ स्थापित कर गए। ऐसा माना जाता है कि बिजली के बल्ब बनाने की प्रक्रिया में वे कई बार असफल हुए, किंतु उन्होंने कभी हार नहीं माना। इतिहास साक्षी है कि उन्होंने खुद को इस तरह से काबिल बनाया कि पूरी दुनिया में आविष्कारों के सर्वाधिक पेटेंट उनके नाम से हैं।

प्रसिद्ध दार्शनिक, कवि और लेखक सूजी कासेम ने कहा था, ‘असफलता की बजाय संदेह और डर सपनों की सबसे अधिक हत्या करता है।’ जब हम खुद यह सोचना प्रारंभ कर देते हैं कि हम निश्चित लक्ष्य प्राप्त नहीं कर सकते या किसी मुकाम पर पहुँचने के लिए हममें आवश्यक योग्यता नहीं है तो फिर दुनिया में कामयाबी की सभी राहें वहीं अवरुद्ध हो जाती हैं। कहते हैं कि आप जीवन में जो कुछ भी चाहते हैं वो सभी आपके अंदर के डर के दूसरी तरफ उपस्थित होता है। अर्थात हमारे सपने और उसके साकार होने के मध्य यदि कोई दीवाल का कार्य करता है तो वह हमारे अंदर ही गहराई से छुपा हुआ भय है। इस भय पर विजय प्राप्त करना ही कामयाबी की पहली कुंजी है। किन्तु यह कार्य आसान नहीं है।

खुद की काबिलियत के बारे में संदेह तब शुरू होता है जब हम अपने किसी लक्ष्य की सिद्धि में असफल हो जाते हैं। हमें यह लगने लगता है कि हममें कुछ-न-कुछ कमी जरूर है जिसके कारण हम सफल नहीं हो पाए। इस तरह के सेल्फ-डाउट माइंडसेट को बदलने की जरूरत है। क्योंकि इस प्रकार की सोच से आत्मविश्वास कमजोर होता है और हम आगे नहीं बढ़ पाते हैं। मानव मन को यदि गौर से पढ़ने की कोशिश करें तो हम जिस निष्कर्ष पर पहुंच पाते हैं वह यह है कि हमारा मन हमारा सबसे बड़ा दुश्मन होता है।

हम मन को समझा नहीं पाते हैं, हम मन पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं। मन को वश में करने की बजाय मन ही हमें वशीभूत कर लेता है। मन विचलित होता रहता है और हम खुद को मन के हवाले कर देते हैं। हमारा मन जितना कमजोर और मजबूत होता है हम अंदर से उतने ही कमजोर और मजबूत होते हैं। दृढ़ मन वाले लाख मुसीबतों और परेशानियों के बावजदू घबराते नहीं हैं और खुद की काबिलियत में कभी संदेह नहीं करते हैं।

महान चीनी दार्शनिक कन्फ़्यूशियस का मानना था, ‘वह शख्स जो पहाड़ को हिला देता है, उसकी इस कामयाबी की शुरुआत उसके द्वारा छोटे-छोटे कंकड़ झ्र पत्थर को हटाने के साथ होती है।’ इस दुनिया में अकस्मात कुछ भी संभव नहीं है। मन पर नियंत्रण करने का कार्य भी ऐसा ही है। मन को दृढ़ बनाने की शुरूआत छोटी-छोटी सकारात्मक सोच और सफलता से शुरू होती है। जब भय लगने लगे या कोई नेगटिव विचार मन मे आने लगे या मन कमजोर पड़ने लगे तो उस वक्त हमें वैसे सावधान हो जाना चाहिए जैसे कि हम उस वक्त हो जाते हैं जब कोई चोर हमारी संपत्ति लूटने के लिए हमारे घर के सामने खड़ा होता है। ऐसे चोर को घर से दूर करने के लिए हम लाख कोशिश करते हैं और यही रणनीति हमें अपने मन में उपजे डर के साथ भी करनी होगी।

यदि हमने एक बार मन को कमजोर करनेवाले विचारों को प्रवेश करने से रोक दिया तो हम अधिक कॉन्फिडेंट हो जाते हैं, हमारा साहस बढ़ जाता है और हम एक नए आत्मविश्वास के साथ सफल होने के लिए प्रयास करना शुरू कर देते हैं। इस प्रकार के प्रयास से हमारा विश्वास पहाड़ सरीखा विशाल हो जाता है जिसे कोई भी डर या संदेह हिला नहीं पाता है और हम दुनिया की हर शै को हासिल करने में अंतत: सफल हो जाते हैं।

मन पर नियंत्रण के लिए जरूरी बातें

  • खुद पर विश्वास करें और किसी के बहकावे में नहीं आएं।
  • डरें नहीं और समस्याओं का हिम्मत के साथ सामना करें।
  • दूसरों से खुद की तुलना नहीं करें और हमेशा इस बात को ध्यान में रखें कि आप अद्वितीय हैं और आपमें ऐसी प्रतिभा है जो इस दुनिया में किसी अन्य शख्स के पास नहीं है।
  • योग का अभ्यास करें, खासकर मेडिटेशन और प्राणायाम से मन मजबूत होता है और यह आसानी से विचलित नहीं होता है।
  • यह मानकर चलें कि इस दुनिया में कोई भी शख्स परफेक्ट नहीं होता है और हर इंसान किसी-न -किसी समस्या से ग्रस्त है।
  • परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालना सीखें।
  • निरंतर साधना से ही सिद्धि की प्राप्ति होती है और इसीलिए बिना हताश हुए निरंतर प्रयास करते रहें।
  • गलतियां करने से डरें नहीं। गलतियां करके और उनको सुधार करके ही हम परफेक्ट बन पाते हैं।
  • आलोचनाओं से घबराएं नहीं। कभी-कभी आलोचनाएं हमें आईना दिखाती हैं और हम खुद को सही राह पर लाने में कामयाब हो पाते हैं।
  • प्रसिद्ध अमेरिकी बिजनेसमैन बिल गेट्स ने कहा था, ‘यदि आप गरीब पैदा होते हैं तो इसमें आपकी कोई गलती नहीं है।

किन्तु यदि आप गरीब मरते हैं तो इसमें शतप्रतिशत दोष आपका है।’ आशय यही है कि हम अपनी सोच से अपने खूबसूरत सपनों का संसार निर्मित कर सकते हैं। लिहाजा जागरूक रहें, जिज्ञासु रहें और एक बार मन में कुछ पाने के लिए जो सोच लिया उसके लिए कठिन मिहनत करते रहें।

  • हमेशा सोचते नहीं रहें, निठल्ला नहीं बैठें, लक्ष्य प्राप्ति की दिशा में अपने कार्यों में खुद को व्यस्त रखें। खाली मन जैसा खतरनाक कुछ भी नहीं होता है।
  • केवल टैलेंट और नॉलिज महत्वपूर्ण नहीं होता है। कठिन मेहनत और सच्ची कोशिश उससे अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
  • तनावरहित रहें और हमेशा पॉजिटिव विचारों पर ही फोकस करें।
  • बीती हुई घटनाओं और समय के बारे में मत सोचें। इससे तनाव उत्पन्न होता है।
  • खुद को प्यार करें और अपने सेल्फ एस्टीम को हमेशा ऊंचा रखें।
    -श्रीप्रकाश शर्मा

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