- रिपोर्ट न देने पर कॉलेजों का सत्र हो सकता है शून्य
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद यानी एनसीटीई ने चौधरी चरण विश्वविद्यालय से मान्यता प्राप्त 242 बीएड कॉलेजों की रिपोर्ट मांगी है। इन बीएड कॉलेजों की ओर से सत्र 2020-21 का परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट यानी पार एनसीटीई के पोर्टल पर अपलोड नहीं की है।
एनसीटीई की एनआरसी यानी नार्दर्न रीजनल कमेटी सीसीएसयू ने इन 242 टीचर एजुकेशन इंस्टीट्यूट का भौतिक निरीक्षण कर शिक्षण प्रशिक्षण की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप कराए जाने की रिपोर्ट मांगी है। पांच अगस्त को जारी पत्र व कॉलेजों की सूची पर एनआरसी ने यह रिपोर्ट 21 दिनों के भीतर देने को कहा है।
सत्र शून्य होने की तलवार
एनसीटीई ने 28 सितंबर 2021 को जारी नोटिस में सभी बीएड कॉलेजों को 30 सितंबर 2021 से 15 मार्च 2022 तक सत्र 2020-21 का परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट अपलोड करने को कहा गया था। 25 फरवरी 2022 को दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से जारी आदेश पर अंतिम तिथि 31 मार्च और एक अप्रैल 2022 को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश पर एक अप्रैल 2022 तक परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट अपलोड करने की तिथि बढ़ाई गई।
एनसीटीई की 54वीं बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जिन बीएड कॉलेजों ने 2020-21 की परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट दो अप्रैल 2022 तक समिट नहीं की है। उन बीएड कॉलेजों में सत्र 2022-23 शून्य रहेगा। एनसीटीई ने तीन मई 2022 को सत्र शून्य घोषित करने का नोटिस जारी किए जिसे दिल्ली उच्च न्यायालय ने 27 मई 2022 को जारी आदेश में रोक लगा दी।
इतना ही नहीं दिल्ली उच्च न्यायालय ने एनसीटीई के सत्र शून्य नोटिस पर रोक लगाने के साथ ही यह भी कहा कि परफार्मेंस अप्रेजल रिपोर्ट का उद्देश्य बीएड कालेजों की गुणवत्ता की निगरानी करना है। नियमों का पालन न करना नियम के तहत कार्रवाई के दायरे में ही आता है। नियामक संस्था के तौर पर एनसीटीई को गुणवत्ता सुधार के तरीके जरूर अपनाने चाहिए।

