Monday, April 27, 2026
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वीआईपी इलाकों की सड़कें चकाचक, भीतरी इलाकों में बदहाल

  • नगर निगम कर रहा शहर की जनता से भेदभाव
  • निगम ने एमडीए से हैंडओवर हुई कॉलोनियों की 283 सड़कों के लिए मांगे टेंडर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: एक तरफ सरकार की ओर से यूपी के विकास की रफ्तार को तेज करने के लिए नई सड़कों का जाल बिछाया जा रहा है। वहीं, दूसरी तरफ पुरानी सड़कों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। सरकार की ओर से भले ही सफर को आसान बनाने के लिए एक्सप्रेस-वे और फोरलेन का निर्माण तेजी से कराया जा रहा है,

लेकिन जनपद में अधिकारियों की लापरवाही से जिले की सड़कें लोगों के लिए नासूर बन गई है। इन सड़कों पर वर्षों से हिचकोले खा रहे लोग कमर दर्द का शिकार हो रहे हैं। सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए भी उनकी ओर से कोई कवायद नहीं की जा रही है। वहीं, दूसरी तरफ पुरानी सड़कों की ओर से कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

नगर निगम क्षेत्र में आने वाले वीआईपी इलाको की सड़कें अन्य इलाकों की तुलना में काफी अच्छी स्थिति में है। इसको लेकर निगम पर उन इलाकों की अनदेखी करने के आरोप लग रहे हैं। जहां सड़कों की हालत खराब है। पिछड़े इलाको में रहने वाली जनता को सड़कों की बदहाल स्थति के चलते खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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वहीं, निगम के अधिकारियों का दावा है कि बजट के मुताबिक ही काम किया जाता है, इस समय 283 सड़कों के लिए टेंडर मांगे गए हैं, जो जल्दी ही खुलेंगे। नौचंदी क्षेत्र में तमाम सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। थाने से पहले जाने वाले रास्ते की सड़क टूटी पड़ी है। वीआईपी क्षेत्र में सड़कें शानदार हैं, लेकिन शहर के भीतरी इलाकों में सड़कों का बुरा हाल हैं, जिनके लिए बजट नहीं होने का रोया जा रहा हैं।

वीआईपी इलाकें

नगर निगम क्षेत्र में आने वाले साकेत, पांडव नगर, जेलचुंगी के पास की कॉलोनियां, सूरजकुंड, फूलबाग कॉलोनी, बैंक कॉलोनी, वैशाली कॉलोनी, शास्त्रीनगर, जागृति विहार, थापरनगर जैसे इलाकों की सड़कों को देखकर पता चलता है कि यहां पर इन सड़कों की देखभाल के लिए निगम काम करता है। इन इलाकों की सड़कें शहरी क्षेत्र के अन्य इलाकों के मुकाबले ज्यादा अच्छी हालत में है।

पेचवर्क के बाद भी उखड़ जाती है सड़कें

जिन इलाकों में सड़के बदहाल है वहां पर निगम द्वारा पेचवर्क भी कराया जाता है, लेकिन वह ज्यादा दिनों तक नहीं ठहरता। कुछ समय के बाद ही सड़कों से रोड़ी उखड़ जाती है और हालात फिर से पहले जैसे हो जाते हैं। यदि मेटेंनेस के लिए कराए गए कार्यों में अच्छी निर्माण सामाग्री का प्रयोग हो तो सड़कों को कुछ समय तक बचाया जा सकता है, लेकिन ऐसा होता नहीं, पेचवर्क के बाद भी खस्ताहाल सड़कों को बनाने के लिए निगम ठेके देता है। जिससे न केवल पैसे की बरबादी होती है, बल्कि समय भी ज्यादा लगता है।

इन इलाकों की सड़कें बदहाल

शहरी क्षेत्र के माधवपुरम, लिसाड़ी रोड, इंद्रानगर, भूमिया का पुल, श्याम नगर, पिलोखड़ी रोड, लिसाड़ी गेट, गोलाकुआं, कबाड़ी बाजार चौपला, बागपत रोड, ओडियन नाला रोड, सराय लाल दास रोड आदि इलाकों की सड़कें बदहाल है। इन इलाकों में सड़कों पर कई जगह गड्ढे हैं।

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जिन पर आम आदमी का चलना दुश्वार हो रहा है। आए दिन यहां सड़क पर बने गड्ढों की वजह से लोग चोटिल हो रहे हैं। बरसात के मौसम में तो हालात और भी खराब हो जाते हैं, गड्ढों में बरसात का पानी भरने के कारण यह पता नहीं चलता कि सड़क कहां है।

नहीं हो सकीं सड़कें गड्ढामुक्त

जिसका परिणाम है जनपद की कई सड़कें ऐसी हैं, जिन पर वाहन तो दूर पैदल चलना भी मुश्किल हो गया है। किसी जनपद की पहचान उसके शहर के रास्तों, गलियों और साफ-सफाई की व्यवस्था को देखकर लगाई जाती है, लेकिन जनपद में नगर क्षेत्र की शायद ही कोई सड़क हो जो चलने लायक बची हो। अनियमित विकास के नाम पर सड़कों को तोड़ दिया गया।

फिर जैसे-तैसे इन गड्ढों को भर दिया गया। आज यह गड्ढे लोगों को कई शारीरिक दर्द दे रहे हैं। शासन की ओर से कई बार सड़कों को गड्ढामुक्त करने का निर्देश दिया गया, लेकिन नगर क्षेत्र की सड़कें गड्ढामुक्त नहीं हो सकीं। कहीं सीवर लाइन बिछाने के नाम पर सड़कों को तोड़ दिया गया और कई दिन बीतने के बाद भी उनकी मरम्मत नहीं की गई।

निगम के पास बजट का आभाव है, जितना बजट होता है। उसके मुताबिक सड़कों के मेंटेनेंस का काम कराया जाता है। अभी करीब 283 सड़कों के लिए टेंडर मांगे गए हैं। जिनके खुलने के बाद सड़कों पर काम कराया जाएगा। -यशवंत कुमार, चीफ इंजीनियर नगर निगम

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