Monday, June 1, 2026
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आखिर पापा की लाडलियां क्यों दे रही जान?

  • आत्महत्या की घटनाओं से हर कोई हैरान, इस तरह करें बच्चों को सुरक्षित

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: आखिर पापा की लाडली बेटियां मौत का रास्ता क्यों चुन रही है? हाल ही में शहर में ऐसी पांच-छह घटनाएं हुर्इं। जो हर पिता के लिए झकझोर देने वाली थीं। जिनमें उन बेटियों ने मौत को गले लगाया, जो कुछ तो मेडिकल क्षेत्र में और कुछ इंजीनियरिंग में अपना भविष्य तलाश करने में जुटी थी। आखिर वह कौन-सी वजह रही जो उन्हें मौत के रास्ते पर ले गई।

यह सवाल वाकई चौंकाने वाला है। सुसाइड की इन सभी घटनाओं पर अगर गौर किया जाये तो यह सवाल हर किसी के जहन में कौंधता नजर आयेगा। सुसाइड की इन घटनाओं के पीछे उनके अभिभावकों का यह तर्क कि पढ़ाई की वजह से डिप्रेशन में आने की वजह से यह कदम उठाया, लेकिन इन तर्क पर गौर किया जाये तो यह समझ से परे है।

घटना-1

जागृति विहार लिसाड़ी गेट निवासी वानिया शेख मेडिकल की छात्रा थी। उसने 19 अक्टूबर को इंस्टीट्यूट की बिल्डिंग की चौथी मंजिल से कूदकर अपनी जान दी, लेकिन वानिया की मौत के पीछे की वजह एक छात्र द्वारा टार्चर किया जाना बताया गया था। जिसमें पुलिस ने परिजनों की तहरीर के बाद छात्रा की मौत के लिए आरोपी छात्र को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

घटना-2

मेडिकल की नर्सिंग की छात्रा ने 10 अक्टूबर को फांसी लगाकर मौत को गले लगा लिया था। उस घटना में भी आत्महत्या की वजह का नहीं पता चल पाया था।

घटना-3

गत 15 दिसम्बर जागृति विहार सेक्टर चार निवासी दसवीं की छात्रा ने पिस्टल से कनपटी पर गोली मारकर आत्महत्या की थी। छात्रा के अभिभावकों ने पढ़ाई को लेकर डिप्रेशन में होना बताया था। मेडिकल पुलिस ने आज तक यह नहीं पता लगाया कि आखिर वह पिस्टल छात्रा तक कैसे पहुंची? आखिर पिस्टल किसकी थी। यह सवाल भी छात्रा की मौत के साथ दफन हो गया।

घटना-4

गत नौ जनवरी को शास्त्रीनगर के गोल्डन टॉवर में रहने वाली इंटर की छात्रा अवनि ने पांचवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। परिजनों ने आनन फानन में बिना पोस्टमार्टम कराये उसका ब्रजघाट में ले जाकर अंतिम संस्कार कर दिया था। छात्रा अवनी की मौत के पीछे अभिभावकों ने यह बताया कि उसके प्री बोर्ड में कम नंबर थे। इसलिए उसने यह कदम उठाया।

घटना-5

वर्ष 2021 में शास्त्रीनगर निवासी एक इंटर की छात्रा ने पीएल शर्मा रोड पर नीट की तैयारी करा रहे इंस्टीट्यूट की छत से कू दकर जान दी थी।

घटना-6

जागृति विहार निवासी एक 10वीं की छात्रा ने दो साल पहले जहर खाकर मौत को गले लगाया था। उस घटना में भी परिजनों ने पढ़ाई को लेकर डिप्रेशन में होना बताया था।

जागरूकता की जरूरत

आजकल ज्यादातर युवाओं की पूरी जिंदगी र्स्माट फोन के इर्द गिर्द ही घूम रही है। उनके ज्यादातर व्यक्तिगत, सामाजिक या अकादमिक समस्याओं के समाधान इंटरनेट और स्मार्टफोन पर उपलब्ध होते हैं। इसलिए आज की युवा पीढ़ी न तो अपने घर में साझा करते हैं। वे न ही किसी शिक्षक अथवा अपने बड़ों के सामने समस्याओं को रख उनसे साझा करने का प्रयास करते हैं।

इसका परिणाम होता है कि जब कभी वे परीक्षा में फेल हो, अपने रिश्ते में असफल हों, प्रेमसंबंधों में ब्रेकअप हो जाये। या किसी सहपाठी व इंटरनेट के माध्यम से बुलींग का शिकार हों। उनके पास फिर सहयोग के लिए कोई नहीं होता। जिसकी सहायता से वह उन स्थितियों से बाहर निकल पायें। परिणामस्वरूप समय रहते उनकी देखभाल हो नहीं पाती है और वे धीरे-धीरे मानसिक बीमारियों की गिरफ्त में फंस जाते हैं।

ऐसे में घरवाले भी रोज का ड्रामा कहकर या तो ध्यान नहीं देते, या फिर उनके मन का न होने पर व संबंधों या पढ़ाई को लेकर बच्चों पर दबाव बनाते हैं। स्कूलों को इन बातों से ज्यादा इत्तेफाक नहीं होता है। शिक्षक मानसिक स्वास्थ्य को लेकर इतना सजग या जागरु क नहीं है कि छात्रा की खराब मानसिक स्थिति को पहचान पायें। तथापि इमोशनल सहयोग न होने पर उनमें एकांकीपन, निराशा व बेचारगी आती है। नतीजन वे सुसाइड जैसा गलत कदम तक उठा लेते हैं।

ऐसे में क्या करें माता-पिता?

ऐसे में माता पिता ये करें कि उनका बच्चा मोबाइल उलझा है और उसके व्यवहार मे बहुत ज्यादा बदलाव महसूस कर रहे हैं और आपसे पूरे दिन का संपर्क कम है तो आपके लिए चेतावनी है। आप इसके लिए स्कूल प्रिंसिपल परिवारजन सया शिक्षकों के माध्यम से इसका समाधान अवश्य ढूंढे और यदि कोई नहीं मिलता है तो मनोवैज्ञानिक एक बेहतर व्यक्ति है जो आपको इस बारे में आपकी मदद ज्यादा कर सकता है।

कैसे पहचाने कि आपका कोई परिवारजन सुसाइड की तरफ सोच रहा

ज्यादातर ऐसे लोग जो डिप्रेशन में होते हैं। वह कम बोलना शुरु कर देते हैं। अपने आप को कमरे में बंद रखना चाहते हैं। छोटी छोटी बातों पर रोते हैं। या लड़ते हैं। किसी से बात नहीं करते। जल्दी इरिटेट हो जाते हैं। जिंदगी बेकार होने की वजह से मरने की धमकी देते हैं। या मरना हर समस्या का समाधान बताना शुरू कर देते हैं। स्कूल में अकेले बैठना, कक्षा में कही खोये खोये रहना, परफार्मेंस खराब होना, राइटिंग खराब होना,कक्षा से बाहर रहना, होमवर्क छूटना आदि है। यह आप अपने बच्चे में ये बदलाव महसूस कर रहे हैं तो आपके बच्चे को आप की, मनोचिकित्सक की ओर मनोवैज्ञानिक के सहायता की आवश्यकता है।
-प्रो. संजय कुमार, अध्यक्ष मनोविज्ञान विभाग, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय मेरठ एवं आॅनरेरी प्रेसीडेंट, मेंटल हेल्थ मिशन इंडिया

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