- अमोनिया गैस पर 14 बीएसेट लगाकर पाया काबू
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दौराला क्षेत्र में शुक्रवार को कोल्ड स्टोर में हुए ब्लास्ट के बाद कंट्रोल रुम से फायर विभाग को तीन बजकर 12 मिनट पर सूचना दी गई। सूचना मिलते ही अगले एक मिनट में ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां सायरन बजाती घटनास्थल पर दौड़ पड़ी। फायर की 11 गाड़ियां और वाटर मिस्ट सहित पचास से अधिक फायरकर्मी मौके पर पहुंच गए।
कोल्ड स्टोर में हुए ब्लास्ट से दस फीट से अधिक ऊंचाई तक मलबे का ढेर लगा था। अमोनिया गैस का रिसाव भी चारों ओर फैला था। लेकिन इसके बावजूद बीएसेट युक्त फायरकर्मियों ने हौसला दिखाया और बचाव कार्य में जुट गए। करीब पांच घंटे तक फायरकर्मी और उनके साथ एनडीआरएफ की टीम मुस्तैदी से जुटी रही और मलबे के नीचे दबे घायलों को खोजती रही।
कोल्ड स्टोर में हुआ ब्लास्ट इतना तेज था कि आसपास कई सौ मीटर दूरी तक लोगों को आवाज सुनाई दी। ब्लास्ट के साथ कई मंजिला कोल्ड स्टोर चंद सेकंड में मलबे में तब्दील हो चुका था। चारों ओर धूल गुब्बार दिखाई दे रहा था। गैस का रिसाव भी तेज था। ब्लास्ट की जानकारी पुलिस को मिली तो सिटी कन्ट्रोल रुम से फायर विभाग को तीन बजकर 12 मिनट पर सूचना दी गई। सूचना के बाद फायर विभाग की 11 गाड़ियां और 500 लीटर की एक वाटर मिस्ट गाड़ी घटनास्थल पर गई।

50 से ज्यादा फायरकर्मी मौके पर मलबे में दबे लोगों को निकालने और अमोनिया गैस पर काबू पाने के लिए जूझ पड़े। 14 फायरकर्मी ब्रीथिंग आपरेटस सैट से लैस होकर गैस के रिसाव के बीच कूद पड़े। कई घंटे तक फायरकर्मी पानी से अमोनिया के रिसाव को कन्ट्रोल करते रहे। वहीं मलबे में दबे लोगों को बचाने में जुट गए।
एनडीआरएफ की टीम ने दिखाया हौसला
दस फीट से ऊंचे लगे मलबे के ढेर में घायलों को ढूंढ पाना मुश्किल भरा काम था। एनडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई। उनके कर्मियों ने गैस रिसाव के चलते हौसला दिखाया और मलबे में दबे श्रमिकों को खोजने में जुट गए। कई घंटे तक आपदा प्रबन्धन के कर्मियों ने बचाव कार्य में तत्परता दिखाई और घायलों को मलबे के नीचे से निकाला।
108 एंबुलेंस की 11 गाड़ियों के 20 कर्मियों ने घायलों को पहुंचाया अस्पताल
ब्लास्ट के दौरान 108 नंबर की एंबुलेंस भी तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। एंबुलेंस पर तैनात करीब 20 स्टॉफ के कर्मियों ने सभी घायलों को निजी अस्पताल और मेडिकल में भिजवाया।जैसे ही हमें कन्ट्रोल रुम से सूचना मिली कि कोल्ड स्टोर में धमाका हुआ है। वैसे ही फायर ब्रिगेड की गाड़ियां तीन बजकर 13 मिनट पर निकल गई। अमोनिया गैस ज्वलनशील गैस नहीं है, लेकिन शरीर में एक्सपोजर हो जाए तो आर्गन फेल हो जाते हैं। यह पानी में पूरी तरह घुलनशील है।
हादसा: लखनऊ से बजते रहे फोन, प्रशासन के उडेÞ होश
पूरा सरकारी अमला शुक्रवार को दौराला के जनशक्ति कोल्ड स्टोर में था। कमिश्नर कुमारी सेल्वा जे, एडीजी राजीव सब्बरवाल, आईजी प्रवीण कुमार, डीएम दीपक मीणा, एसएसपी रोहित सजवाण समेत तमाम आला अफसरों का डेरा कोल्ड स्टोर में ही लगा था। तमाम आला अफसर मास्क लगाकर मौके पर ही डटे थे। इसी बीच आला अफसरों पर लखनऊ से फोन घनघना रहे थे।
पूर्व विधायक चौधरी चन्द्रवीर सिंह के कोल्ड स्टोर पर हुए हादसे की पल-पल की जानकारी फोन पर ले रहे थे। जब भी लखनऊ से फोन आता, तभी संबंधित अधिकारी अलग जाकर बातचीत करते तथा पूरे घटनाक्रम की फीड बैक दे रहे थे। डीएम दीपक मीणा पर भी कई बार लखनऊ से फोन आया, जिसके बाद डीएम ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी शासन को उपलब्ध कराई। पहले पांच लोगों की मौत की खबर दी, जिसके बाद सात श्रमिकों के मरने की खबर दी गई। इस तरह से प्रशासन भी सूचना को अपडेट करता रहा।
तेज धमाके से आई दरार कांपे लोग
दौराला में कोल्ड स्टोर के अंदर हुए तेज धमाके के बाद बिल्डिंग में दरार आ गई। क्योंकि बिल्डिंग में धमाक ा होते ही आसपास के लोग भी कांप उठे। धमाके की गूंज इस कदर थी कि पांच किमी के एरिया में लोग दहल गए। बिल्डिंग में दरार होने के कारण प्रशासन ने आंधी बिल्डिंग को गिराने का निर्णय जरूर लिया। हालांकि अभी बिल्डिंग के आसपास कोई न जाए। इसके लिए बैरीकेडिंग कर दी गई।
इस हादसे के बाद से लोगों में चीख पुकार के साथ-साथ दहशत का माहौल भी देखने को मिला। अमोनिया गैस का रिसाव होने के बाद बॉयलर फटने के बाद बेहद दर्दनाक हादसा हो गया। यह हादसा इतना खतरनाक था कि इस धमाके के बाद से बिल्डिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इस बिल्डिंग में दरार आ गई। जिससे लोगों में चीख-पुकार मच गई। धमाका तेज होने के कारण पुरानी बिल्डिंग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। उधर, इस दर्दनाक हादसे के बाद से ही लोग सहमे हुए है। अभी फिलहाल उस समय मौजूद लोग भी हादसे के बारे में कुछ बोल नहीं पा रहे हैं।

