Thursday, March 26, 2026
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मायूस दावेदारों ने बढ़ाई हरिकांत की मुश्किलें

  • भाजपा से टिकट की दावेदारी करने वाले 53 नेता थे, लेकिन नामांकन के दौरान इनमें से तीन से ज्यादा नहीं पहुंचे

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: भाजपा ने मेयर पद पर हरिकांत अहलूवालिया का टिकट फाइनल कर दिया। सोमवार को नामांकन भी हो गया, मगर मायूस दावेदार हरिकांत की मुश्किलें बढ़ा सकते हैं। भाजपा से टिकट की दावेदारी करने वाले 53 नेता थे, लेकिन नामांकन के दौरान इनमें से तीन से ज्यादा नहीं पहुंचे। बाकियों ने हरिकांत की टेंशन बढ़ा दी हैं। ये अलग है कि भाजपा ने दावेदारों को बुलाया नहीं या फिर उन्होंने पार्टी से किनारा कर लिया।

नामांकन होते ही ये तस्वीर स्पष्ट हो गई है कि जाटों ने गंगानगर में एक बड़ी मीटिंग की, जिसमें ऐलान कर दिया कि भाजपा का बायकाट किया जाएगा। शहर में एक लाख जाट मतदाता हैं, फिर भी उनकी उपेक्षा क्यों की गई? इसको लेकर जाट बिरादरी के लोग खफा हो गए। यही नहीं, पंजाबी समाज के लोगों ने भी हरिकांत की ये कहकर टेंशन बढ़ा दी है कि पंजाबी समाज को भाजपा टिकट देने की बात कहकर गुमराह कर रही हैं।

हरिकांत पंजाबी है नहीं हैं, वो पिछड़ी जाति से हैं। पंजाबी समाज को टिकट देने की बात कहकर भाजपा पंजाबी समाज के लोगों को गुमराह कर रही हैं। ये सब हरिकांत के खिलाफ एक तरह से पंजाबी समाज और जाटों में खिलाफ माहौल खड़ा कर दिया गया हैं। अब देखना ये है कि भाजपा मुखर होते पंजाबी समाज और जाटों को कैसे मनाती हैं या फिर इसी तरह से नाराजगी और बढ़ेगी। भाजपा के पास जाट नेताओं की भी लंबी लाइन हैं, लेकिन भाजपा इनका किस तरह से इस्तेमाल करती हैं,

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यह तो अभी भविष्य के गर्भ में हैं, लेकिन इतना अवश्य है कि जाटों की जिस तरह से गंगानगर में मीटिंग हुई और भाजपा के खिलाफ जाटों ने प्रचार करने का ऐलान किया, वो हरिकांत के लिए मुश्किलें खड़ी करने वाला हैं। क्योंकि शहर में जाट वोटर एक तरह से भाजपा को जीत दिलाते रहे हैं, लेकिन वर्तमान में जाट भाजपा के खिलाफ मुखर हो गये हैं। हरिकांत के नामांकन के दौरान डा. तनुराज सिरोही भी मौजूद नहीं थे। वो कहीं दिखाई नहीं दिये। कहा जा रहा था कि उनका नाम भी टॉप पर चल रहा था और जाट नेता भी नामांकन के दौरान नहीं दिखे।

पाल समाज ने भी एक मीटिंग की तथा भाजपा को अति पिछड़ों के खिलाफ बताया। कहा कि वोट लेने के लिए अति पिछड़े हैं, लेकिन टिकट जहां बाटा जाता हैं, वहां पर अति पिछड़ों को पीछे ही धकेल दिया जाता हैं। पाल समाज ने भी भाजपा के खिलाफ मुखर होकर विरोध करने का निर्णय ले लिया। इस तरह से हरिकांत की मुश्किले बढ़ने वाली हैं। मुखर हो रहे समाज को कैसे भाजपा मनाती है, वो भी बेहद अहम हैं।

भगवतपुरा वार्ड तीन में भाजपाई उम्मीदवार की उम्मीदों पर संकट!

ब्रह्मपुरी इलाके के वार्ड-3 भगवतपुरा में भाजपा के पार्षद प्रत्याशी के विरोध में पार्टी के अंदर ही बड़ी गोलबंदी शुरू हो गई है। खबर यहां तक है कि इसकी जानकारी भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और संगठन मंत्री को भी भेज दी गई है। जबकि खासकर भाजपा के लिए एक एक पार्षद इस चुनाव में महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि पार्टी ने पूरे 90 वार्डों पर प्रत्याशी नहीं उतारे हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि इस बार टिकट बंटवारे में एक स्थानीय भाजपा नेता की ही खूब चली है।

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इसी मनमानी के चलते वार्ड-3 भगवतपुरा में बड़ी संख्या भाजपा कार्यकर्ता गोपनीय तरीके से एकजुट हुए और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष व महामंत्री को अपनी नाराजगी भरी पाती उन्हें भेज दी है। ऐसे में भगवतपुरा वार्ड-3 से भाजपा प्रत्याशी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भाजपा के नाराज कार्यकर्ताओं का कहना है कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने ही बड़ा आश्वासन दिया था कि इस बार वार्ड जिस वर्ग में आरक्षित रहेगा उसी आरक्षण में प्रत्याशी उतारा जाएगा।

अब कार्यकर्ता अपनी पूरी तैयारी वार्ड आरक्षण के अनुकूल किए हैं तो उनको टिकट से वंचित क्यों किया गया है। नाराज तमाम भाजपा कार्यकर्ताओं ने बताया कि यह सब खेल शहर के एक बड़े भाजपा नेता के इशारे पर हुआ है। ऐसे में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि भाजपा कार्यकर्ता जिस बड़े भाजपा नेता की ओर इशारा कर रहे हैं, वह किसके लिए काम रहा है। यह मामला पूरे भगवतपुरा वार्ड-3 में चर्चा का विषय बना हुआ है।

भाजपा के खिलाफ जाटों की बगावत

सोमवार को जाट महासभा की एक आवश्यक मीटिंग जाट महासभा के जिला अध्यक्ष रविंद्र मलिक के आवास गंगानगर पर हुई। इस दौरान मीटिंग में सत्तारुढ़ भारतीय जनता पार्टी से काफी प्रयास करने पर भी जाट समाज के किसी भी व्यक्ति को मेयर का टिकट नहीं मिलने पर आक्रोश व्यक्त किया गया। जाट समाज के बीजेपी पार्टी से जुड़े कई लोग मेयर की टिकट की दौड़ में आखिरी समय तक रहे। शहर में जाट समाज के लोगों की संख्या 1.26 लाख के करीब है, जोकि ओबीसी वर्ग में सबसे ज्यादा है।

मीटिंग की अध्यक्षता रविंद्र मलिक ने की और उन्होंने अपने संबोधन में आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि नामांकन के अंतिम दिन से 30 तारीख तक रोजाना मेरठ शहर के विभिन्न क्षेत्रों में क्षेत्रीय जाट सभाओं की मीटिंग की जाएंगी। उसके बाद जाट समाज की एक बड़ी मीटिंग जाट भवन पर अति शीघ्र बुलाई जाएगी, जिसमें जाट समाज के लोग काफी भारी संख्या में भाग लेंगे। उस मीटिंग में जाट समाज का मेयर के चुनाव में क्या रुख रहेगा? उसको लेकर भी एक निर्णायक निर्णय सर्वसम्मति से लिया जाएगा। मीटिंग में सभी जाट महासभा के सभी क्षेत्रीय अध्यक्ष उपस्थित थे।

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मीटिंग में जाट महासभा के प्रमुख संरक्षक बृजपाल सिंह पैसल, पूर्व अध्यक्ष जाट महासभा सतवीर सिंह सिवाच, जाट महासभा महासचिव डा. इंद्रपाल सिंह मलिक, कोषाध्यक्ष जितेन्द्र धामा, पूर्व अध्यक्ष जाट महासभा चौधरी कल्याण सिंह, पूर्व महासचिव जाट महासभा गजेंद्र सिंह पायल, गंगानगर जाट सभा अध्यक्ष कर्नल एसपी सिंह, कंकरखेड़ा जाट सभा अध्यक्ष कर्नल विनोद उज्जवल, रोहटा रोड जाट सभा अध्यक्ष कैप्टन ब्रह्मपाल सिंह, बागपत रोड जाट सभा अध्यक्ष तेजपाल सिंह तोमर, कर्नल रणवीर मलिक, कैप्टन ईलम सिंह, एडवोकेट जयराज सिंह, विनोद सिरोही, अरुण पूनिया आदि मौजूद रहे।

भाजपा पर पाल समाज ने लगाया टिकट वितरण में उपेक्षा का आरोप

भाजपा पार्टी पर पाल समाज ने निकाय चुनाव के टिकट वितरण में समाज की उपेक्षा का आरोप लगाया। अखिल भारतीय पाल महासभा के जिलाध्यक्ष सत्यप्रकाश पाल व अखिल भारतीय युवा पाल महासभा के जिलाध्यक्ष दीपक पाल ने सोमवार को इस संबंध में प्रेस विज्ञप्ति जारी कर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि महानगर में 90 वार्ड हैं, लेकिन एक भी पाल समाज के व्यक्ति का नाम भाजपा की वार्ड पार्षद सूची में शामिल नहीं है। आरोप लगाया कि भाजपा से पाल समाज जुड़ा हुआ है, लेकिन टिकट वितरण में जो अनदेखी की गई है, उसका जवाब पाल समाज चुनाव में देगा।

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