- गत वर्ष के मुकाबले 20-25 फीसदी व्यापार कम
- मार्च के बाद से राहत नवंबर में व्यापारियों को राहत
जनवाणी ब्यूरो |
शामली: नोटबंदी और जीएसटी के बाद जहां पिछले साल दिवाली पर व्यापारियों ने कुछ राहत महसूस की थी, वहीं अबकी बार कोरोना के डंक से आठ माह प्रभावित रहा बाजार पंचपर्व धनतेरस, नरक चतुर्दशी, दीपावली, गोवर्धन और भैयादूज का पर्व खुशियां लेकर आया है। आठ माह से बाजार में पसरी मंदी से व्यापारी वर्ग ने राहत महसूस की है।
हालांकि गत वर्ष के मुकाबले पंचपर्व पर कारोबार 30-35 फीसदी कम आंका जा रहा है। हालांकि दीपोत्सव पर कारोबार पिछले साल के मुकाबले कम आंका जा रहा है। फिर भी, एक अरब के आसपास व्यापार होने के कयास लगाए जा रहे हैं।
दीपावली को लेकर विशेष उत्साह रहता है।
एक माह पहले ही दिवाली के त्यौहार की तैयारियां प्रारंभ हो जाती हैं। घर- प्रतिष्ठान को नए कलेवर में सजाया संवारा जाता है। देखा जाए तो यही वो दौर होता है, जब रंगाई-पुताई के लिए रंग-रोगन की बिक्री के साथ लक्ष्मी बाजार पर मेहरबान होने लगती है। फिर, धनतेरस के साथ बाजार में धनवर्षा प्रारंभ हो जाती है।
अबकी बार धनतेरस का पर्व इस बार दो दिन यानी 12-13 नवंबर को मनाया गया। धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा है लेकिन पिछले करीब डेढ़ दशक से धनतेरस पर सर्राफा बाजार भी चमक बिखरने लगा है। इसका कारण दीपावली के बाद देवोत्थान के साथ साहलग प्रारंभ हो जाते हैं।
इसलिए जिन घरों में शादी-ब्याह आदि मंगल कार्य होते हैं, वे भीधनतेरस पर जेवरात, इलैक्टोनिक्स सामान और कीमती चीजें खरीद शुभ समझते हैं। धनतेरस पर सर्राफा बाजार में चांदी के सिक्के, चांदी के लक्ष्मी-गणेश, सोने की ज्वैलरी की जमकर खरीददारी इस बार भी हुई।
सर्राफा बाजार में व्यापारी धनतेरस और दीपावली पर जनपद के कारोबार के आंकलन के सवाल पर हमेशा अपने होंठ बंद रखते रहे हैं। पिछले वर्ष के मुकाबले अबकी बार धनतेरस से बाजार पर कम रंगत मानी जा रही है। इसका प्रमुख कारण कोविड-19 महामारी मानी जा रही है। गत 25 मार्च को देशभर लॉकडाउन के बाद बाजार में सन्नाटा पसरा था लेकिन पिछले करीब डेढ़-दो माह से अनलॉक के चलते कुछ चहल-पहल दिखाई दे रही है।
फिर भी, लोग अनावश्यक घर से बाहर निकलना मुनासिब नहीं समझ रहे हैं। अबकी बार नवंबर-दिसंबर माह में शुभ मुहूर्त भी कम हैं। इसलिए सर्राफा व्यापारियों को जितना खुश होना चाहिए था, उतने वे नहीं हैं। शामली शहर में करीब 50 सर्राफा की दुकानें हैं। इसके अलावा 10 कस्बे देहात क्षेत्र में हैं। प्रत्येक कस्बे में 8-10 दुकानें हैं। धनतेरस, छोटी दीपावली और बड़ी दीपावली पर जिले में सर्राफा कारोबार जहां पिछले साल करीब 75 लाख के आसपास आंका जा रहा था, वहीं अबकी बार उससे नीचे ही माना गया है।
इसके अलावा रेडीमेड कपडे, मिठाई और गिफ्ट आइटम का करोबार भी पहले के मुकाबले कम रहा है। शहर के प्रसिद्ध भगतजी स्वीट्स के मालिक मुकेश उर्फ मीनू ने बताया कि पिछले साल के मुकाबले अबकी बार 25 फीसदी ग्राहक कम था। पैकेजिंग का ग्राहक जिसे थोक ग्राहक भी माना जाता है, वह तो बिल्कुल ही नहीं था।
इसलिए कोविड-19 का प्रभाव मिठाई के बाजार पर देखने को मिला है। इसी तरह इलेक्ट्रॉनिक सामान के शहर में 5 बड़े शोरूम हैं। इनके अलावा कुछ छोटी दुकानें हैं। जनपद में इलेक्ट्रोनिक सामान की बिक्री पिछले साल के मुकाबले कम आंकी जा रही है। पिछले साल शामली शहर में 70 लाख का इलैक्ट्रोनिक्स सामान की बिक्री का कारोबार माना गया था, वहीं अबकी बार काफी कम आंका जा रहा है।
शहर में एलजी शोरूम के मालिक वैभव गर्ग का कहना है कि पिछले साल के मुकाबले अबकी बार कारोबार 25-से 30 प्रतिशत कम रहा है। कोरोना काल में लॉकडाउन के कारण ग्राहक की पर्चेचिंग पावर कम हुई है। साथ ही, नवंबर-दिसंबर माह में शादी-ब्याह के शुभ मुहूर्त भी काफी कम है।
अक्सर दीपावली पर वे लोग इलेक्टोनिक सामान की खरीददारी करते रहे हैं, जिनके घरों में शादी होती है। शादी-ब्याह के मुहूर्त कम होने से भी कारोबार पर असर पड़ा है। हालांकि छोटी दीपावली पर बाजार में ग्राहक कम था लेकिन बड़ी दीपावली के दिन कुछ रौनक बढ़ गई थी। फिर भी, जिले में इलेक्ट्रोनिक सामान का कारोबार अबकी बार 4-5 करोड़ का हुआ है।
धनतेरस से लेकर दीपावली तक जिले में बुलेट मोटरसाइकिल, बाइक-स्कूटी, टैक्ट्रर आदि की बिक्री जहां पिछले साल बढ़ी थी, वहीं अबकी बार उसका ग्राफ नीचे खिसका है। यूनाइटेड ट्रैक्टर एजेंसी के स्वामी त्रिपाल सिंह ने बताया कि गत वर्ष दीपावली के आसपास जहां 31 टैक्टरों की बिक्री हुई थी, वहीं अबकी बार यह आंकड़ा सिर्फ 15 तक पहुंच पाया है। सिंह ने बताया कि कोविड-19 के चलते ट्रैक्टरों का उत्पादन प्रभावित हुआ।
इसलिए कंपनी ट्रैक्टरों की आपूर्ति ही नहीं हो पाई। फिर भी, 15 ट्रैक्टरों की बुकिंग दीपावली पर हुई है। पिछल साल जहां बुलेट, बाइक, स्कूटी तथा ट्रैक्टरों से बिक्री का कारोबार जहां 10 करोड़ पर पहुंच था, वहीं अबकी बार यह 6-7 करोड़ ही आंका जा रहा है।
दूसरी ओर, जनपद में करीब 5600 दुकानें पश्चिमी उप्र उद्योग व्यापार मंडल में रजिस्टर्ड हैं। इसके अलावा बड़ी संख्या में दुकानें अन्य व्यापारिक संगठनों से सम्बद्ध हैं। इन दुकानों पर बिक्री का आंकड़ों काफी बड़ा हो जाता है। हालांकि पिछले साल के मुकाबले दुकानों पर ग्राहक काफी कम माना जा रहा है।
फिर भी, एक दुकानदार दबी जुबान से जनपद में धनतेरस से लेकर भैयादूज तक बिक्री का आंकड़ा 90 करोड़ के आसपास मान रहा है। इसका तर्क है कि दीपावली से पहले 100 करोड़ रुपये जिले की तीनों चीनी मिलों ने गन्ना किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दिए थे। इसके अलावा नौकरीपेशा व्यक्तियों को भी केंद्र और राज्य सरकार ने दीपावली पर बोनस दिए।
एनजीटी की पाबंदी से फुस्स पटाखा करोबार
वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गम्भीर होने के कारण एनजीटी के साथ-साथ प्रदेश सरकार ने दीपावली पर पटाखों की बिक्री पर पाबंदी लगा दी थी। पुलिस-प्रशासन को पटाखों की बिक्री न होने देने के सख्त निदे्रश दिए गए थे। इसलिए दीपावली पर पिछले साल जहां करीब 110 अस्थाई लाईसेंस पटाखा ब्रिक्री के लिए जारी किए गए थे, वहीं अबकी बार पाबंदी के चलते एक भी लाईसेंस जारी नहीं किया गया था। इसलिए पिछले साल जहां पटाखा का कारोबार सवा एक करोड़ रुपये के करीब रहा था, वहीं अबकी बार सिर्फ चोरी-छिपे ही पटाखे बिके हैं। ऐसे में मुश्किल से 20 से 25 लाख रुपये के पटाखे ही दीपावली पर फोड़े जा सके होंगे।
150 कुंतल फूलों से लक्ष्मी जी खुश
शहर के नाला पटरी पर प्रमुख फूल विक्रेता सोनू ने कहना है कि शहर में करीब 32 शॉप फूल विक्रेताओं की हैं। इसके अलावा जनपद के कस्बों में भी दुकानें हैं। बड़ी संख्या में ऐसे किसान भी हैं, जो फूलों की खेती करते हैं और उनको स्थानीय बाजार में स्वयं बेचते हैं। सोनू ने बताया कि जनपद में करीब 250 कुंतल के करीब गेंदा और गुलाब फूल की बिक्री दीपावली पर हुई है लेकिन अबकी बार यह काफी कम रही। इसमें 40 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। हालांकि पिछले साल जहां गेंदा फूल 80 रुपये प्रतिग्राम बिका था, वहीं अबकी बार 100-125 रुपये तक बेचा गया है।
किसान-नौकरीपेशा के कारण व्यापारी खुश
दीपावली पर बाजार में रौनक का प्रमुख कारण शुगर बाउल बेल्ट भी है। एक ओर जहां सरकारी नौकरी-पेशा लोगों को बोनस मिलने के कारण खरीददारी में रूझान रहा, वहीं गन्ना किसानों के खाते में चीनी मिलों द्वारा 10 नवंबर तक करीब 100 करोड़ रुपये का भुगतान ट्रांसफर कर दिया गया था।
इसलिए किसानों ने खरीददारी में रूचि दिखाई। प्रदेश सरकार द्वारा कोल्हुओं से प्रतिबंध हटाने का असर यह रहा कि चीनी मिलों से पहले ही कोल्हुओं पर जरूरतमंद किसानों ने गन्ना डाल दिया था। साथ ही, जनपद में किसानों ने गत वर्ष के मुकाबले सरकारी क्रय केंद्रों पर रिकार्ड धान बेचा। धान बेचने में प्रदेश में प्रथम स्थान तक हासिल किया। धान का पैसा भी किसानों के खाते में ऑनलाइन ट्रांसफर हुआ।
दूसरी ओर, उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष अंकित गोयल कहना है कि कोविड-19 महामारी का दीपावली के बाजार पर कोई असर नहीं रहा है। सर्राफा बाजार भी सही रहा है। व्यापारी वर्ग संतुष्ट नजर आया है। लोगों की जेब में दीपावली पर खरीददारी के लिए पैसा भले ही कम था लेकिन उनकी खरीददारी की इच्छाशक्ति थी। शहर के बडेÞ बर्तन व्यापारी दीपक गोयल का कहना है कि धनतेरस पर ग्राहक पहुंचा, भले ही उसकी संख्या पहले के मुकाबले कम रही।
सात माह की मंदी के बाद बाजार गुलजार
पश्चिमी उप्र उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के प्रदेशाध्यक्ष घनश्याम दास गर्ग ने बताया कि पिछले गत अप्रैल माह से बाजार में कोरोना महामारी के चलते मंदी का दौर चला आ रहा था। दीपावली को व्यापारिक दृष्टि से देखा जाए तो पंद्रह दिन का त्योहार है। इन पंद्रह दिन के अंदर सात माह से बाजार में पसरा मंदी का साया छटता नजर आया है। इसलिए दीपावली का त्योहार सात माह बाद उत्साह लेकर आया है।

