Sunday, February 22, 2026
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‘कामना के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं’

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: चौधरी चरण सिंह विवि में आनलाइन कराए जा रहे सात दिवसीय व्यास समारोह के तीसरे दिन ढोलक की ताल पर श्लोकबद्ध छंद एवं तालियों की गड़गड़ाहट से सभी मंत्रमुग्ध हो गए। बुधवार को दो सत्र आयोजित किए गए। पहले सत्र में अंर्तमहाविद्यालय संस्कृत वाद-विवाद प्रतियोगिता हुई। जिसका विषय था काम के उपभग से कामनाओं की शांति नहीं होती, बल्कि बढ़ती ही है जैसे घी से अग्नि।

इस दौरान छोटे-छोटे बच्चों ने पौराणिक, वैदिक, लौकिक उदाहरण देते हुए अपने-अपने मतों की पुष्टि की। विषय के पक्ष में रहने वाली दिव्यांशी त्यागी का कहना था कि तृष्णा मानक के नाश का कारण है। कामनाओं का कभी अंत नहीं होता। यदि मनुष्य को सब धन, धान्य मिल जाए तो भी वह संतुष्ट नहीं होता। निष्कर्ष त्यागी का कहना था कि इंद्रिया जनित सभी नाशवान होते है।

उपभोग से मनुष्य शाश्वत आनंद को प्राप्त नहीं कर पाता। क्योंकि वह इच्छाओं से बंधा हुआ होता है। वहीं विपक्ष में रहने वाली मुस्कान वर्मा का कहना था कि कामना के बिना जीवन की कल्पना ही नहीं की जा सकती। कामनाएं यदि समाप्त हो जाएगी तो मनुष्य निरुत्साही हो जाएगा। क्योंकि कामना से ही मनुष्य कार्य में प्रवृत्त होता है। इसके अलावा भी प्ररेणा, तनष्वी, अभिनव आदि ने अपने विचारों को प्रकट किया।

दूसरे सत्र मे अग्नि विषय पर एक कथा प्रस्तुत की गई। जो संस्कृत विभाग की पूर्व छात्रा डेजी द्वारा प्रस्तुत की गई। कथा में छात्रा ने बताया कि अग्नि एक देवता है। अग्नि देव का वास इस संसार के प्रतिकण,प्रतिपल और प्रतिभाव में है। पंचत्तवों में भी अग्नि का वास है। वहीं छात्रा ने कथा के दौरान घर की कलह के कई दृश्य भी प्रस्तुत किए। जिन्हें देख सभी मंत्रमुग्ध हो गए। कार्यक्रम में अध्यक्ष पद पर विराजमान केंद्रीय संस्कृत विवि पुरी उड़ीसा के प्रो. मखलेश कुमार ने कहा कि संस्कृत भाषा के माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में सम्मलित होकर मेरा मन अति आनंदित है।

वाद-विवाद का विषय विभिन्न पुराणों में विभिन्न प्रकार से मिलता है। कामनाएं अनंत होती है। डॉ. भाव प्रकाश गांधी ने व्यास समारोह की विशेषता का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें सभी प्रतिभागीयों ने संस्कृत में सुदंर विचार व्यक्त किए है। उन्होंने कहा कि यदि कामनाओं में शिवत्व रहेगा तो सभी कामनाएं सफल होगी और सभी का कल्याण होगा। वाद-विवाद प्रतियोगिता के निर्णायक में डॉ. कान्हुचरण, डॉ. चंद्रशेखर, सरिता आदि मौजूद रहे। संचालन शुभम ने किया। कार्यक्रम में डॉ. वाचस्पति, डॉ.पूनम लखनपाल, डॉ. संतोष कुमारी, डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. ओमपाल आदि मौजूद रहे।

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