- पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट को लेकर ये लापरवाही ठीक नहीं
- रोक है फिर भी बे-रोकटोक दौड़ रहे हैं दोपहिया वाहन
- चप्पे-चप्पे पर तीसरी आंख, फिर भी पुलिस को नजर नहीं आता स्टंट करने वाला बाइकर्स गैंग
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को लेकर गंभीर अनदेखी पर उतारू एनएचएआई और पुलिस के अफसरों को किसी बडेÞ हादसे का इंतजार है। दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे को पीएम नरेन्द्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट माना जाता है। पीएम का ड्रीम प्रोजेक्ट होते हुए भी यदि अफसरों का यह रवैया है तो फिर सवाल तो पूछा जाना चाहिए। जहां तक एनएचएआई और पुलिस के अफसरों की लापरवाही की बात है

तो मेरठ के संदर्भ में इकलौता दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे ही नहीं है। एक्सप्रेस-वे से कुछ ही दूरी पर एनएच-58 खड़ौली के कट भी हादसों को दावत दे रहे हैं। एनएच-58 के खड़ौली इलाके की यदि बात की जाए तो शाम के वक्त तो कई बार तीन ने पांच किलोमीटर तक का जाम लग जाता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सुरक्षा को लेकर अफसर कितने गंभीर हैं।
टू-व्हीलर पर रोक, फिर भी बे-रोकटोक
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर दो पहिया वाहनों की आवाजाही पर सख्ती से रोक है, लेकिन जिन अफसरों के जिम्मे एक्सप्रेस-वे की सुरक्षा है, उनके रवैये के चलते 24 घंटे बे-रोकटोक एक्सप्रेस-वे पर दो पहिया वाहन दौड़ते देखे जा सकते हैं। एक्सप्रेस-वे जब जब ट्रैफिक शुरू कराया गया था, उस वक्त भी दो पहिया वाहनों की खूब आवाजाही होने लगी थी, लेकिन करीब छह माह के अंतराल में दो दर्जन से ज्यादा बाइक सवारों की मौत होने के बाद अफसरों की नींद टूटी।

इसका असर केवल इतना हुआ कि कुछ दिनों के लिए सख्ती कर दी गयी। मेरठ के हिस्से से थाना परतापुर पुलिस को दो पहिया वाहनों की आवाजाही रोकने की जिम्मेदारी सौंपी गयी, कुछ दिन तक तो रोका टोकी नजर आयी, उसके बाद फिर वहीं पुराना रवैया शुरू हो गया। और वर्तमान में बगैर किसी रोक टोक के एक्सप्रेस-वे पर दो पहिया वाहन की आवाजाही जारी है।
तीसरी आंख का खौफ काफुर
एक्सप्रेस-वे पर यूं कहने को जगह-जगह कैमरे यानि तीसरी आंखें लगाई गइं हैं। ये कैमरे वाहनों और हादसों पर नजर रखने के लिए लगाए गए हैं, लेकिन इन कैमरों के होते हुए भी बाइकर्स की आवाजाही पर कोई रोक टोक नहीं है। जानकारों की मानें तो ज्यादातर कैमरे या तो काम नहीं कर रहे हैं
या फिर उनको लेकर जो गंभीरता बरती जानी चाहिए वो बरती नहीं जा रही है। हालात की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे के टोल पर भी दो पहिया वाहनों को लेकर कोई रोक टोक नहीं बरती जा रही है।
खड़ौली का हाल और भी ज्यादा खराब
एनएच-58 के खडौली इलाके की हालत तो दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे से भी ज्यादा खराब है। करीब तीन से चार साल पहले खड़ौली चौराहा वाहनों की आवाजाही को खुला हुआ था। इसकी वजह से आए दिन हादसे भी होते थे और दिन भर जाम के भी हालात रहते थे। इसको लेकर जब ज्यादा शोर शराबा हुआ तो एनएचएआई के अफसरों खड़ौली चौराहे पर सिमेट की कई-कई फीट के स्लीपर रखा दिए,

लेकिन इसके बाद दो पहिया वाहन चालकों ने साइड से निकलना शुरू कर दिया। यह देखकर वहां पर एनएचएआई ने टीन की चौड़ी प्लेट लगाकर रास्ता बंद करने का प्रयास किया, लेकिन वाहन चालक फिर भी बाज नहीं आए। खड़ौली का करीब आधा किलोमीटर का ऐसा रास्ता है जहां दो पहिया वाहन चालक निकलने के लिए अपने वाहनों को डिवाइडर से जंप कराते हैं। यह तभी रुक सकता है, जब पुलिस मुस्तैद हो, लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। पुलिस को भी यहां किसी बड़े हादसे का इंतजार है।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर हादसों का सफर
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेस-वे पर रोक के बावजूद धड़ल्ले से दुपहिया वाहनों की आवाजाही जारी है। बाइक आदि के कारण यहां हादसों में भी इजाफा हुआ है। वहीं एनएचएआई मामले में बेबस नजर आ रहा है तो पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही है। आखिर टोल प्लाजा पर ही प्रतिबंधित वाहन क्यों नहीं रोक लिए जाते?

बूम बैरियर ही न उठने दिया जाए। फिर कैसे कोई वाहन चला जाएगा। आखिर टोल एनएचएआई लेता है, फिर एनएचएआइ ही क्यों नहीं रोकता वाहन। यह एक बड़ा सवाल है। टोल प्लाजा पर ही ऐसे वाहन चालकों को रोकने की कोशिश की जाती है तो वाहन चालक दबंगई दिखाते हुए मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। स्टाफ के साथ गाली-गलौज करते हैं।
यातायात नियमों का पालना जरूरी
यातायात नियमों की पालना नहीं होने की वजह से आए दिन सड़क हादसे होते रहते हैं। नशे में धुत होकर तेज गाड़ी चलाना भी एक कारण है। हादसों के लिए कुछ हद तक यहां की सड़कें भी जिम्मेदार हंै। बिना आराम किए गाड़ी चलाना हादसे को आमंत्रण देना ही है। सरकार यदि इन हादसों को कम करना चाहती है, तो नियमों की पालना में सख्ती बरती जाए।
नींद और नशा मुख्य कारण
सड़कों पर होने वाले हादसों का मुख्य कारण पर्याप्त नींद का अभाव तथा नशे की प्रवृत्ति है। साथ ही तेज गति भी मुख्य कारण है। खराब सड़कों से भी वाहन का संतुलन बिगड़ जाता है। घूस देकर खराब फिटनेस के वाहनों को बेरोकटोक हाईवे पर चलाना भी हादसों को निमंत्रण देना है।
तेज गति से वाहन चलाने से हो रहे हैं हादसे
ट्रैफिक नियमों का पालन पूर्ण ईमानदारी से नहीं करते। अधिक गति से गाड़ी चलाना, शराब पीकर गाड़ी चलाना, सही समय पर ओवरटेक नहीं करना, मोड़ पर गति कम न करना, गाड़ी चलाते समय मोबाइल पर बात करना, गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट समाप्त होने पर भी गाड़ी का संचालन करना आदि महत्वपूर्ण कारण है। जिनकी वजह से सड़क हादसों में कमी नहीं हो पा रही है।

