Saturday, April 25, 2026
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ईंट-भट्ठों के प्रदूषण से भी मिलेगी मुक्ति

  • एक घंटे में तैयार होगी पांच हजार ईंट, विदेशों में भी सकौती की ईंट बनाने वाली मशीन की मांग
  • समय की होगी बचत, कम लागत में मिलेगा अधिक मुनाफा

जनवाणी संवाददाता |

दौराला: प्रदूषण के नाम पर बदनामी झेलने वाले ईंट-भट्ठों को अब राहत मिल गई है। अब भट्ठों पर क्लेब्रिक्स एई 300 व 600 मशीन से ईंट बनाई जायेगी। एक घंटे में पांच लीटर डीजल खर्च कर पांच हजार ईंट बनाई जा सकेंगी। सकौती निवासी हसन अली ने ईंट बनाने की मशीन का अपने कारखाने में निर्माण किया। देश में धूम मचाने के बाद अब विदेशों से भी इस मशीन की मांग आने लगी है। दो-तीन दिन में जल्द पानी के जहाज से दक्षिण अफ्रीका के एक व्यक्ति को मशीन भेजी जायेगी। मशीन के उपयोग से मुनाफ के साथ, भट्ठों से फैलने वाले प्रदूषण से भी मुक्ति मिलेगी।

सकौती निवासी हसन अली ने बताया कि उन्होंने क्लेब्रिक्स एई 300-600 के नाम से मशीन बनाई है। शुरुआत में उन्हें बिक्री को लेकर थोड़ी समस्या आई, लेकिन जैसे जैसे वह दूसरे जिले व राज्यों में जाकर अपनी मशीन का प्रचार करने लगे तो उन्हें इसका फायदा भी हुआ। देश के कई राज्यों से उन्हें मशीन के आर्डर आए। बताया कि इस मशीन से ईंट बनाने के दौरान ज्यादा लोगों की जरुरत नहीं है। एक चालक व दो अन्य मजदूरों की जरूरत होती है। मशीन में मिट्टी व पानी डालने के बाद गारा बनकर स्वयं ही ईंट बनकर निकलती है। बताया कि एक घंटे में पांच लीटर डीजल के खर्च से पांच हजार ईंट तैयार होती है।

दक्षिण अफ्रीका से मिला था आर्डर

हसन अली ने बताया कि उन्होंने एक मशीन आगरा में बेची थी। आगरा में किसी सेमिनार के दौरान दक्षिण अफ्रीका से इदरीश नाम के व्यक्ति भी सेमिनार में पहुंचे थे। उन्होंने वहां पर उनकी मशीन देखी थी, जिसके बाद इदरीश ने हसन अली का नंबर लेकर मशीन का आर्डर दिया।

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हसन ने बताया कि मशीन बनकर तैयार है और दो-तीन दिन में मशीन को पानी के जहाज के जरिए दक्षिण अफ्रीका भेजा जायेगा। अफ्रीका में मशीन पहुंचने के लिए तीन से चार माह का समय लग जायेगा। बताया कि मशीन की कीमत 21 लाख रुपये है और वहां भेजने में चार लाख का खर्च आयेगा। वहां की कीमत के हिसाब से यह मशीन लगभग 45 लाख रुपये होगी।

प्रदूषण से मिलेगी मुक्ति लागत में आयेगी कमी

भट्ठों पर ईंट पाथने के लिए दूसरे राज्यों से भट्ठा संचालकों को मजदूर बुलाने पड़ते है। कई बार ऐसा भी होता है कि मजदूर पहले ही पैसे लेने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को बंधुआ बनाए जाने की सूचना दे देते है, जिस कारण भट्ठा संचालकों को नुकसान उठाना पड़ता था। साथ ही एनसीआर समेत देशभर में एयर क्वालिटी इंडेक्स के बढ़ने से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड भी चिंतित है। प्रदूषण पर रोकथाम को लेकर भट्ठों को जिगजैग करने के निर्देश दिए गए है। परंतु, इसके बाद भी बहुत से भट्ठों पर प्रतिबंधित र्इंधन का प्रयोग होता है, जिससे वायु प्रदूषित होती है। क्लेब्रिक्स एई मशीन के उपयोग से वायु को प्रदूषित होने से भी बचाया जा सकेगा।

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