Monday, March 16, 2026
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आफत: इस साल झुलसा कर रख देगी भीषण गर्मी

  • विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने जारी किया आंकड़ा इस साल भी तापमान का बढ़ना जारी रहेगा

जनवाणी संवाददाता |

मोदीपुरम: इस बार पिछले साल विकसित अलनीनो का असर 2024 में दिखाई देगा। प्रशांत महासागर क्षेत्र में उपलब्ध एक भौगोलिक घटना वाले नीनो के कारण दुनिया भर में तापमान में हो रही है। वृद्धि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी किए गए। आंकड़ों के अनुसार अलनीनो की दशा दुनिया भर में रिकॉर्ड तापमान और मौसम से जुड़ी चरम घटनाओं को बढ़ावा देगी। विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने बताया कि भूमि के हर टुकड़े पर मार्च और मई के बीच तापमान औसत से अधिक रहेगा संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी ने कहा कि वर्ष 2023 और 24 की एलन घटना ने अब तक के पांच सर्वाधिक प्रचंड अलनीनो में से एक होने का रिकॉर्ड काम किया है।

क्या है अलनीनो?

अलनीनो प्रशांत महासागर क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली एक भौगोलिक घटना है जिसे तापमान में बढ़ोतरी के लिए जाना जाता है अलनीनो से आश्रय मध्य और पूर्वी पोस्ट कटिबंध प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का समय-समय पर गर्म होने से है और यह औसतन हर क्षेत्र में लगभग 2 से 7 साल में होता है तथा आमतौर पर 9 से 12 महीने तक इसका असर दिखाई देता है ब्लू यूएमओ विश्व मौसम विज्ञान संगठन ने कहा कि मार्च में के दौरान अलनीनो के बने रहने की लगभग 60% संभावना है और अप्रैल से जून के दौरान तटस्थ स्थितियां ना तो अलनीनो और ना ही ला नीना की 80% संभावना है

कुछ प्रदेशों को छोड़कर अच्छी रहेगी बारिश

भारत में घटनाक्रम पर नजर रखने वाले विज्ञान को का मानना है कि जून अगस्त तक अलनीनो की स्थिति बनने का मतलब यह हो सकता है कि इस साल मानसून की बारिश 2023 की तुलना में बेहतर होगी कमजोर रुख के बावजूद अलादीन दुनिया भर की जलवायु को प्रभावित करना जारी रखेगा

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दुनिया भर का तापमान बढ़ने में ग्रीन हाउस गैसों की भूमिका

विश्व मौसम विज्ञान संगठन के महासचिव सेमेस्टर साउलो ने कहा कि जून 2023 के बाद से हर महीने में एक नया मासिक तापमान रिकार्ड बनाया है और वर्ष 2023 अब तक के सबसे गर्म वर्ष के रूप में रिकॉर्ड किया गया था अलनीनो ने इन रिकॉर्ड तापमान में योगदान दिया है, लेकिन उसका को रोक कर तापमान बढ़ने वाली ग्रीन हाउस गैसेस स्पष्ट रूप से इसका मुख्य कारण है वैज्ञानिकों का मानना है कि अलनीनो का दुनिया की जलवायु पर सर्वाधिक प्रभाव इसके उत्पन्न होने के दूसरे साल देखने को मिलता है

और वर्ष 2024 में इसका प्रभाव दिखाई देगा वर्तमान अलनीनो जून 2023 में विकसित हुई नवंबर और जनवरी के बीच सर्वाधिक प्रचंड थी इसने पूर्वी और मध्य पोस्ट कटिबंधीय प्रशांत महासागर के लिए 1991 से 2020 के औसत समुद्री सतह तापमान से लगभग 2.02 डिग्री सेल्सियस ऊपर का चरम तप प्रदर्शित किया इसने इसे अब तक की पांच सर्वाधिक प्रचंड अलनीनो घटनाओं में से एक बना दिया है।

अधिक तापमान कर सकता है फसलों को प्रभावित

तापमान के अचानक बढ़ने और घटना के कारण फसलों पर दुष्प्रभाव पड़ता है इससे फसलों की वृद्धि एवं उत्पादकता दोनों प्रभावित होती हैं ऐसे में किसान भाइयों को चाहिए कि वह ऐसे बी और प्रजाति का चुनाव करें जो प्रतिकूल परिस्थिति में भी अच्छी तरह से वृद्धि और उत्पादन दे सकें किसान भाइयों को चाहिए कि वह खरीफ और रवि तथा जायद की जो खेती करें उसमें वैज्ञानिकों से पूछ कर ऐसी प्रजातियों को बाय जो अधिक तापमान को सहन कर सकती हैं इसके अलावा सैफ असली खेती पर भी ध्यान देना होगा क्योंकि यदि तापमान के कारण एक फसल को नुकसान पहुंचता है तो लगभग दूसरी फसल उनको अच्छा उत्पादन दे सकती है इसलिए आय बढ़ाने के लिए सिर्फ असली खेती को अपनाना चाहिए।

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