- बोले-कोई अधिकारी सुनने को तैयार नहीं, सबसे ज्यादा बिजली को लेकर उठानी पड़ रही मुसीबत
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश के दूरदराज इलाकों से मेला नौचंदी में आने वाले दुकानदार मेले में इस कदर परेशान हो चुके हैं कि दोबारा मेला नौचंदी में आने सवाल पर कानों को हाथ लगा रहे हैं। मेला नौचंदी में दोबारा आने के सवाल पर ये दुकानदार उलाहना दे रहे हैं कि मेले के आयोजन समिति से जुडेÞ कमेटी के लोग यहां तक कि प्रशासन के अधिकारियों को इतनी फुर्सत नहीं कि मेले में आकर उन दुकानदारों की सुध ले सकें,
जिन्हें शुरू होने से पहले मेले में आने के लिए कई-कई फोन कॉल्स किए जाते हैं। तमाम सुधिवाओं व सुरक्षा का वास्ता दिया जाता है, लेकिन लाखों का खर्चा कर जब दुकानदार मेले आते हैं तो कुछ को ठगा हुआ पाते हैं। बाकी इंतजाम तो छोड़िये सुरक्षा तक नहीं है। कभी भी ठेकेदार के बाउंसर आते हैं और डरा धमका कर चले जाते हैं।
लगातार घट रहे दुकानदार
मेला नौचंदी में इस साल छोटे बडेÞ कुल मिलाकर सात सौ दुकानदार आए हैं, लेकिन पिछले साल के अनुपात में इस संख्या में लगातार गिरावट आती जा रही है। खसतौर से जब से निगम व जिला पंंचायत विवाद को निपटाने के नाम पर नौचंदी को प्रांतीय मेले का नाम दिया गया है, तब से हालात ज्यादा खराब हुए हैं। पिछले साल ठेकेदार और उसके गुर्गों ने कुछ दुकानदारों के साथ मारपीट कर दी थी,
उस घटना का साइड इफैक्ट यह हुआ कि इस साल कई दुकानदारों ने नौचंदी के नाम से किनारा कर लिया। मेले के दुकानदार वीर सिंह कुल्फी वालों ने बताया कि इस बार ठेकेदार मनमानी पर उतरा हुआ है। उनके स्टॉल के सामने हर साल सोफे डाले जाते रहे हैं, इस बार भी जब सोफे डाले तो ठेकेदार ने विरोध किया। इस मामले की शिकायत सीडीओ व मेला प्रभारी से तब कहीं जाकर ठेकेदार की मुसीबत से राहत मिल सकी।
पटेल मंडप में अराजकता का आलम
मेला कमेटी की यदि बात करें तो सबसे ज्यादा शिकायत पटेल मंडप के कार्यक्रमों को लेकर है। कार्यक्रमों को लेकर मेला कमेटी पर पहले से ही बंदरबाट के आरोप लगाए जा रहे हैं। नाम न छापे जाने की शर्त पर भाजपा के बडेÞ नेताओं ने आरोप लगाया है कि यदि पटेल मंडप के कार्यक्रमों के नाम पर बंदरबांट ना रोकी गयी
तो पटेल मंडप केवल फूहड़ कार्यक्रमों के लिए रह जाएगी। अमित कुमार जैसी म्युजिकल नाइट सरीखे पूर्व के आयोजनों को पटेल मंडप को हमेशा के लिए तरसा दिया जाएगा। यह तभी संभव है जब मेला कमेटी में पारदर्शिता से काम हो। एक ही शख्स को कई-कई कार्यक्रमों की बुरी रवायत पर रोक लगे। इसके पीछे और कुछ नहीं सिवाए बंदरबांट के।
मेला चालू, बत्ती गुल
नौचंदी के दुकानदारों की सबसे बड़ी शिकायत बिजली को लेकर है। दुकानदारों ने जानकारी दी कि मेले में दुकानदारों के अनुबंध की शर्तों में बिजली आपूर्ति का समय सांय छह बजे से सुबह छह बजे तक है, लेकिन बिजली ठेकेदार देर रात ढाई-तीन बजे ही लाइट काट देता है। पूरे मेला क्षेत्र में अंधेरा पसर जाता है। जबकि मेला चालू रहता है। लाइट गुल होते ही पंखे बत्ती बंद हो जाते हैं। अंदाजा लगाए कि बगैर बत्ती के दुकानदारों पर क्या बीतती होगी।

