Monday, March 23, 2026
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Kailash kher: कैलाश खैर को हाई कोर्ट से मिली बड़ी राहत, अदालत ने सुनाया फैसला, जाने पूरा मामला

नमस्कार दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। साल 2007 में गायक कैलाश खेर पर एक विवाद खड़ा हुआ था, जब उन्होंने भगवान शिव के बारे में “बम बम बम” गाना गाया था। गाने को लेकर कुछ लोगों ने दावा किया कि इससे धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं, और इसके बाद कैलाश खेर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।

इस मामले में बॉम्बे हाई कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए केस को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि कैलाश खेर का ऐसा कोई इरादा नहीं था जिससे किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे। जज ने यह भी कहा कि खेर ने केवल ‘बम बम’ गाना गाया था, और उनकी मंशा किसी को भी आहत करने की नहीं थी।

ये था आरोप

बता दें कि, लुधियाना की एक स्थानीय अदालत में नरिंदर मक्कड़ नाम के एक शख्स ने गायक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायक में इल्जाम था कि जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को आहत किया गया। शिकायतकर्ता ने खुद को शिव उपासक बताया और कहा कि भगवान शिव पर आधारित खेर के गाने ‘बबम बम’ में एक अश्लील वीडियो दिखाया गया है जिसमें कम कपड़े पहने महिलाएं हैं। वह एक दूसरे को चूम रहे हैं।

अदालत ने सुनाया ये फैसला

लुधियाना में इलाका न्यायिक मजिस्ट्रेट में दायर शिकायत को खारिज करते हुए हाई कोर्ट ने कहा कि खेर की तरफ से गाए गए गाने के बोल भगवान शिव की तारीफ के अलावा कुछ नहीं हैं। आदालत ने कहा हर काम जो किसी वर्ग विशेष को नापसंद हो, जरूरी नहीं कि उससे धार्मिक भावनाएं भड़कें।

याचिकाकर्ता ने की थी बड़ी मांग

याचिकाकर्ता ने अदालत से मांग की थी कि कैलाश के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया जाना चाहिए। इस पर पीठ ने कहा कि अपराध दर्ज करने के लिए व्यक्ति की तरफ से किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने की जानबूझकर कोशिश की जानी चाहिए।

कैलाश खेर ने कहा 

कैलाश खेर ने 2014 में पंजाब के लुधियाना कोर्ट में शिकायत दर्ज कराने के बाद हाईकोर्ट का रुख किया था। उस समय हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत देते हुए कहा था कि गायक के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जानी चाहिए। अपनी याचिका में खेर ने कहा कि वह केवल गाने के गायक हैं और वीडियो को सोनी म्यूजिक एंटरटेनमेंट के माध्यम से एक अन्य कंपनी की तरफ से कोरियोग्राफ किया गया था। खैर ने तर्क दिया था कि गाने का वीडियो केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की तरफ से मंजूरी दिए जाने के बाद ही जारी किया गया था।

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