जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: किसी ने कभी सोचा भी नहीं कि किसी महिला के लीवर में भी गर्भधारण यानी इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी हो सकता है, लेकिन ऐसा ही केस देश में पहली बार मेरठ में मिला है। यह चिकित्सकों के लिए शोध का विषय बन गया है। यह मामला ओम इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर में वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. केके गुप्ता द्वारा महिला की एमआरआई जांच में सामने आया। वह चौक गए। उन्होंने मेडिकल जनरल और खोज की पुस्तकों के पन्ने पलटे। पता चला कि दुनियाभर में अब तक इंट्राहेप्टिक एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कुल 45 मामले मिले हैं, देश में यह पहला मामला है। उक्त महिला को एक सप्ताह में आपरेशन कराने की सलाह दी गई। इस आपरेशन में गर्भ के साथ-साथ लीवर का भी कुछ भाग निकालना पड़ेगा। ऐसे में लीवर फट सकता है और महिला की जान भी जा सकती है। इसलिए इस दुर्लभ केस का आॅपरेशन हायर सेंटर में ही संभव है।
दरअसल, एक विवाहिता के पेट में दर्द की शिकायत थी। उन्होंने एक फिजीशियन को दिखाया। उन्होंने बेगमपुल रोड स्थित भोपाल नर्सिंग होम में महिला को भर्ती कर दिया। वहां पहले अल्ट्रासाउंड कराया गया। लीवर में कुछ गड़बड़ी का शक होने पर डॉक्टर ने महिला की एमआरआई जांच कराने की सलाह दी। ओम इमेजिंग एंड डायग्नोस्टिक सेंटर में उक्त महिला की वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. केके गुप्ता ने एमआरआई होल एब्डॅमिन जांच की। उन्होंने महिला के लीवर के दहिने भाग में 12 सप्ताह का गर्भ पाया। उक्त गर्भ में कार्डियक पल्सेशन यानी धड़कन भी स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही थी। यह देखकर वह चौक गए। उन्होंने सेंटर की निदेशक डॉ. हिमानी अग्रवाल को उक्त केस के बारे में बताया। दोनों ने इस पर गहन चर्चा की। डॉ. केके गुप्ता ने मेडिकल जरनल व अन्य शोध की इस केस को तलाशा। पता चला कि दुनियाभर में अब तक इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी के कुल 45 मामले सामने आए हैं। देश में इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी का यह पहला केस है। डॉ. गुप्ता ने तुरंत रोगी की स्थिति और जांच में इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी के बारे में उनका इलाज कर रहे फिजीशियन को जानकारी दी। डॉ. गुप्ता ने अन्य वरिष्ठ फिजीशियन व वरिष्ठ सर्जन से इस केस के बारे में विस्तार से चर्चा की।
बहुत जोखिम भरा है इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी का आपरेशन
वरिष्ठ रडियोलॉजिस्ट डॉ. केके गुप्ता का कहना है कि इस महिला का आपरेशन एक सप्ताह के अंदर होना जरूरी है। इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी बेहद जोखिमभरा है। इसमें गर्भ के साथ-साथ लीवर के कुछ भाग को भी निकालना पड़ेगा। ऐसे में लीवर फट भी सकता है और सर्वाधिक खून लीवर के अंदर ही होता है। खून पेट में भर सकता है। ऐसे में मरीज की जान भी जा सकती है। इसलिए मरीज का आपरेशन दिल्ली या अन्य बड़े शहरों के हायर सेंटर में संभव है।
आईएमए ने भी जताई हैरानी
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन की मेरठ शाखा के सचिव डॉ. सुमित उपाध्याय ने भी मेरठ में इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी का मिलने पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि यह बहुत दुर्लभ केस है।
डॉ. गुप्ता की सराहना की
ओम इमेजिंग सेंटर की डायरेक्टर डॉ. हिमानी अग्रवाल ने एमआरआई जांच को गंभीरता से करके इंट्रोहेप्टिक एक्टोपिक प्रेगनेंसी का पता लगाने को लेकर वरिष्ठ रेडियोलॉजिस्ट डॉ. केके अग्रवाल की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह केस न केवल मेडिकल साइंस की जटिलताओं को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि उनके सेंटर में उत्कृष्ट और सटीक डायग्नोस्टिक सेवाएं भी देता है।

