Wednesday, February 11, 2026
- Advertisement -

Bihar Election: महागठबंधन बनाम I.N.D.I.A., आज होगी बिहार में विरोधी गठबंधन की बड़ी घोषणा

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म है। आज यह तय होगा कि सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का मुकाबला किस विपक्षी गठबंधन से होगा। राजग की कुछ सीटों पर अभी भी बहस और झंझट बाकी है, लेकिन विपक्षी गठबंधन में सीट शेयरिंग पर अंतिम फैसला अभी तक नहीं हुआ है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव कई दिन पहले से ही सीटों के लिए सिम्बल बांट रहे हैं। हालांकि, कांग्रेस ने इसका विरोध किया और खबर आई कि उनके नेता तेजस्वी यादव ने सिम्बल वापस करा दिए। लेकिन इसके बावजूद लालू यादव सिम्बल बांटते नजर आए, जिससे राजनीतिक खींचतान बढ़ गई है। सीट बंटवारे से पहले कई कांग्रेसी और वामपंथी प्रत्याशियों ने पहले ही नामांकन का एलान कर दिया है। ऐसे में आज का दिन इस मामले में निर्णायक साबित होगा। आज ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि बिहार विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाला विपक्षी गठबंधन I.N.D.I.A. मैदान में उतरेगा या राजद के नेतृत्व वाला महागठबंधन ही मुख्य विरोधी होगा।

सीट बंटवारे से सामने आएगा बिहार में विपक्षी गठबंधन का असली नाम

बिहार में विधानसभा चुनाव से पहले विपक्षी गठबंधन का नाम राजनीतिक सुर्खियों में है। इसे कभी महागठबंधन और कभी I.N.D.I.A. (इंडिया) कहा जा रहा है। लोकसभा चुनाव में महागठबंधन ने विपक्ष की भूमिका निभाई थी, लेकिन इस बार कांग्रेस के नेतृत्व में राहुल गांधी इसे I.N.D.I.A. के रूप में आगे बढ़ाने की कोशिश में हैं। आज होने वाले सीट बंटवारे के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिहार विधानसभा चुनाव में राहुल गांधी का प्रयास सफल रहा या फिर राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और उनके पुत्र तेजस्वी यादव का प्रभाव कायम रहा। जहां तक मुख्यमंत्री पद के चेहरे का सवाल है, विपक्षी गठबंधन के लिए विकल्प फिलहाल केवल तेजस्वी यादव ही हैं। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सीधे उनका नाम न लें, लेकिन विधानसभा चुनाव लड़ने वाले सभी प्रत्याशी तेजस्वी यादव के नेतृत्व और चेहरे को ही लेकर चुनाव प्रचार करेंगे।

महागठबंधन के बारे में जानें

बिहार में लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल ने राष्ट्रीय स्तर पर रहे संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के समय ही बिहार में ‘महागठबंधन’ बनाया था। राजद अब भी बिहार का क्षेत्रीय दल है। बिहार के किसी चुनाव जब भी राष्ट्रीय दल- कांग्रेस ने राजद के साथ रहकर चुनाव लड़ा, उसे महागठबंधन का घटक कहा गया। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाईटेड भी दो बार महागठबंधन में आकर सरकार बना चुकी है। राष्ट्रीय दल भारतीय कॉम्युनिस्ट पार्टी, मार्क्सवादी कॉम्युनिस्ट पार्टी आदि भी महागठबंधन के बैनर तले ही चुनाव लड़ते आए हैं।

बिहार में रखी गई I.N.D.I.A. गठबंधन की नींव

2023 में जब नीतीश कुमार महागठबंधन में थे, तब उन्होंने लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियों के तहत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ देशभर के विपक्षी दलों को पटना बुलाया था। यह संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन से अलग प्रयास था। उससे भी बड़ा। विपक्षी दलों के इस महाजुटान से तब आम आदमी पार्टी के सर्वेसर्वा अरविंद केजरीवाल निकल गए थे। दिल्ली के चुनाव में भी उनका वही रुख रहा। कांग्रेस से केजरीवाल का गतिरोध कायम रहा। बाकी में से ज्यादातर विपक्षी दल इस गठबंधन में हैं, जिसका नाम भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबंधन रखा गया था।

नीतीश कुमार ने I.N.D.I.A. नाम पर जताई असहमति

NDA और UPA के अंतिम में ‘A’ है, जो गठबंधन के लिए है; इसलिए इन दोनों गठबंधनों के नाम एनडीए या यूपीए के बाद गठबंधन लिखने की जरूरत नहीं पड़ती। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता के लिए भले ही पटना में पहली बैठक बुलाई थी, लेकिन बाद में जब भारतीय राष्ट्रीय विकासशील समावेशी गठबंधन नाम रखा गया तो उसके संक्षिप्त नाम I.N.D.I.A. से उन्हें आपत्ति थी। उन्होंने देश का नाम इस तरह करने पर आपत्ति जताई थी। उनके विपक्षी गठबंधन छोड़ने की कई वजहों में एक यह भी शामिल था। इसलिए, इसे आम लोग इंडी एलायंस कहते हैं, जबकि विपक्षी दल इसे इंडिया एलायंस कहते हैं। विपक्षी गठबंधन के इस नाम I.N.D.I.A. में अंतिम संक्षिप्त अक्षर ‘A’ है, इसलिए इसे ‘विपक्षी गठबंधन- I.N.D.I.A.’ या इंडी एलायंस या I.N.D.I. एलायंस या इंडी गठबंधन कहना ज्यादा उचित है।

बिहार में महागठबंधन या I.N.D.I.A.?

बिहार में लोकसभा चुनाव 2024 तक महागठबंधन ने ही कमान संभाले रखी थी। तेजस्वी यादव ने पूरे लोकसभा चुनाव में सत्ताधारी एनडीए को परेशान किए रखा। महागठबंधन में ही मुकेश सहनी उनके हमसाये के रूप में नजर आए थे। तब कांग्रेस और खासकर राहुल गांधी ने बहुत मेहनत नहीं की थी। राहुल गांधी बिहार विधानसभा चुनाव के लिए चुनावी साल 2025 में शुरू से सक्रिय नजर आए। मतदाताओं के विशेष गहन पुनरीक्षण के मुद्दे पर उन्होंने यात्रा शुरू की तो अंत आते-आते महागठबंधन की जगह I.N.D.I.A. की बात कही जाने लगी। इसके लिए दक्षिण से लेकर झारखंड तक के दलों को बुलाया गया। यात्रा के अंतिम दिन तेजस्वी यादव थोड़े किनारे थे और राष्ट्रीय स्तर पर बने I.N.D.I.A. के बाकी दलों के नेताओं के साथ राहुल गांधी का जलवा था।

सीट शेयरिंग का समय आते-आते परिस्थितियां फिर बदलती दिख रही हैं। झारखंड से हेमंत सोरेन झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए न्यूनतम 12 सीटें चाह रहे, उन्हें दो से संतोष करने कहा जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने राहुल गांधी की यात्रा में भी साथ नहीं दिया था, अब भी नहीं है। नए दलों में बिहार की ही लोक जनशक्ति पार्टी (राष्ट्रीय) को शामिल किए जाने की बात थी, लेकिन वह भी अस्पष्ट है। मतलब, कुल मिलाकर राजद, कांग्रेस, वीआईपी और वामदल ही साथ-साथ होंगे। अगर I.N.D.I.A. से कोई नया दल बिहार चुनाव में विपक्षी गठबंधन के साथ नहीं उतरा तो ‘महागठबंधन’ ही अंतिम नाम रह जाएगा, हालांकि बोलना-लिखना जिसे जो है- रोक नहीं सकता।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP Budget 2026: योगी सरकार का बजट, 10 लाख रोजगार और लड़कियों के लिए 1 लाख रुपये सहायता

जनवाणी ब्यूरो | यूपी: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार...
spot_imgspot_img