जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं। शनिवार को मैसूर विश्वविद्यालय के आंबेडकर अध्ययन केंद्र की रजत जयंती और ‘ज्ञान दर्शन भवन’ के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए उन्होंने लोगों से ‘सनातनियों की संगति से दूर’ रहने की अपील की। साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार पर संविधान और आंबेडकर विरोधी मानसिकता रखने का आरोप लगाया।
सनातनियों से बचें, तर्कशील ताकतों से जुड़ें
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, “अपनी संगति सही रखें। उन लोगों से जुड़ें जो समाज के लिए खड़े हैं, ना कि उन लोगों से जो सामाजिक बदलाव का विरोध करते हैं — जैसे सनातनी।”
उन्होंने जनता से प्रगतिशील और तार्किक ताकतों के साथ जुड़ने का आह्वान किया और दावा किया कि संघ परिवार समाज में वैज्ञानिक सोच और सामाजिक न्याय का विरोध करता है।
CJI बीआर गवई पर जूता फेंकने की घटना पर प्रतिक्रिया
मुख्यमंत्री ने हाल ही में भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस बीआर गवई पर हुए जूता फेंकने की घटना को “सनातनियों की रूढ़िवादी मानसिकता का प्रतीक” बताया। उन्होंने कहा “अगर इस घटना की निंदा केवल दलित ही करते हैं, तो हम बदलाव की राह पर नहीं हैं। यह जिम्मेदारी सभी की है।”
संघ पर लगाया संविधान विरोधी होने का आरोप
सिद्धारमैया ने आरोप लगाया कि आरएसएस और संघ परिवार ने बाबा साहेब आंबेडकर द्वारा बनाए गए संविधान का हमेशा विरोध किया है। उन्होंने कहा कि, “वे झूठ फैला रहे हैं कि कांग्रेस ने आंबेडकर को चुनाव में हराया था, जबकि खुद डॉ. आंबेडकर ने लिखा था कि उन्हें सावरकर और डांगे ने हराया।”
‘विज्ञान पढ़ें, अंधविश्वास न अपनाएं’
सीएम सिद्धारमैया ने अपने भाषण में वैज्ञानिक सोच और तार्किकता को भी बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि बुद्ध, बसव और आंबेडकर उनके प्रेरणास्रोत हैं और समाज को अंधविश्वासों से दूर रहकर तर्कशीलता को अपनाना चाहिए। “विज्ञान पढ़ने के बावजूद अगर आप अंधविश्वास में यकीन करते हैं, तो यह प्रगति नहीं है।”
चित्तपुर में संघ के मार्च पर रोक
बयान के बाद राजनीतिक सरगर्मियों के बीच चित्तपुर में आरएसएस के रूट मार्च को भी रोका गया। यह क्षेत्र कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे का निर्वाचन क्षेत्र है। अधिकारियों ने शांति और कानून व्यवस्था का हवाला देते हुए 19 अक्तूबर को होने वाले मार्च की अनुमति नहीं दी।
चित्तपुर तहसीलदार के आदेश में कहा गया, “शांति बनाए रखने और अप्रिय घटनाओं से बचने के लिए आरएसएस के मार्च की अनुमति अस्वीकार की जाती है।” इसके अलावा नगर पालिका ने आरएसएस के कटआउट और बैनर भी पुलिस सुरक्षा में हटवा दिए।

