जनवाणी ब्यूरो |
यूपी: उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने पाॅवर काॅर्पोरेशन द्वारा बिजली बिल में लगाए गए 10% ईंधन अधिभार को गैरकानूनी ठहराया है और मामले में सात दिन के भीतर जवाब देने का निर्देश दिया है। आयोग जवाब मिलने के बाद अंतिम निर्णय सुनाएगा, जिससे माना जा रहा है कि अब उपभोक्ताओं से 10% अधिभार वसूला नहीं जा सकेगा।
पाॅवर काॅर्पोरेशन ने मार्च 2026 के लिए 10% ईंधन अधिभार लगाने का आदेश दिया था, जिससे जून के बिल में 10% अधिक राशि दिखाई गई। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह से मुलाकात कर लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल किया। उन्होंने बताया कि कॉर्पोरेशन ने अधिभार की गणना में मार्च 2026 की वास्तविक बिजली खरीद लागत के साथ लगभग 1400 करोड़ रुपये के पुराने बकाए और पहले की देनदारियों को भी जोड़ दिया, जो नियमों के अनुसार गलत है।
आयोग ने कहा कि पिछली देनदारियों को वर्तमान फ्यूल पावर पर्चेज एडजस्टमेंट सरचार्ज (एफपीपीएएस) में शामिल करना उपभोक्ताओं पर अनावश्यक वित्तीय बोझ डालता है और विनियम 16.1 के तहत असंगत है। आयोग ने पाॅवर काॅर्पोरेशन को सात दिन में विस्तृत स्पष्टीकरण देने और वर्तमान तथा पहले की बिजली खरीद लागत और ट्रांसमिशन शुल्क का विवरण प्रस्तुत करने का आदेश दिया।
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि आयोग ने उपभोक्ताओं के साथ न्याय किया है और इसके निर्णय से स्पष्ट हो गया कि कॉर्पोरेशन ने गलत तरीके से ईंधन अधिभार लगाया था।

