जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से एक दिन पहले संसद भवन एनेक्सी में आयोजित सर्वदलीय बैठक के दौरान विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया। संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त तक चलेगा।
विपक्ष ने बैठक का क्यों किया बहिष्कार?
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद महुआ मोइत्रा ने बताया कि कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके), झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम), आम आदमी पार्टी (आप), नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने बैठक से विरोधस्वरूप वॉकआउट किया।
महुआ मोइत्रा का आरोप है कि एक गैर-मान्यता प्राप्त दल एनसीपीआई को सर्वदलीय बैठक में शामिल किया गया, जिसका विपक्ष ने विरोध किया।
टीएमसी ने उठाए मान्यता को लेकर सवाल
महुआ मोइत्रा ने कहा कि संसद के टेबल ऑफिस की सूची में तृणमूल कांग्रेस के सांसदों की संख्या 28 दिखाई गई है। उनके अनुसार, जिन 20 बागी सांसदों को अलग समूह के रूप में माना जा रहा है, उनके विलय को अभी तक लोकसभा अध्यक्ष की मंजूरी नहीं मिली है और उनकी अयोग्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं।
उन्होंने कहा कि 91वें संविधान संशोधन के बाद अलग गुट बनाने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में इन सांसदों को सर्वदलीय बैठक का निमंत्रण देने के आधार पर सवाल उठते हैं। उन्होंने कहा कि इसी मुद्दे पर विरोध दर्ज कराते हुए विपक्षी दल बैठक से बाहर निकल गए।
कांग्रेस ने बताया असांविधानिक
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा के लिए वॉकआउट किया है। उनका कहना था कि जब तक संबंधित मामले पर अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक किसी भी समूह को मान्यता देना संविधान की भावना के विपरीत है।
शिवसेना (यूबीटी) और आप ने भी जताई आपत्ति
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि बागी सांसदों को दी गई मान्यता का कानूनी आधार स्पष्ट नहीं है। उन्होंने कहा कि इसी कारण उनकी पार्टी ने भी बैठक का बहिष्कार किया।
वहीं, आम आदमी पार्टी के सांसद एनडी गुप्ता ने कहा कि उनकी पार्टी के राज्यसभा के 10 में से 7 सांसदों को अलग समूह के रूप में मान लिया गया है, जबकि इस संबंध में दायर याचिका अभी लंबित है। इसके बावजूद उन्हें राज्यसभा में अलग सीटें आवंटित कर दी गईं, जिसे उन्होंने लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई 2026 से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सरकार की सिफारिश पर दोनों सदनों का सत्र बुलाने की मंजूरी दी है। चार सप्ताह तक चलने वाले इस सत्र में कुल 19 बैठकें होंगी, जिनमें राष्ट्रीय महत्व के विभिन्न मुद्दों पर चर्चा और आवश्यक विधायी कार्य किए जाएंगे।

