जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: वरिष्ठ कांग्रेस नेता और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने शनिवार को कांग्रेस में अपने दो महत्वपूर्ण पदों से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस समिति के कार्यकारी सदस्य और कांग्रेस कार्य समिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की घोषणा की। यह फैसला उनके ओएसडी रहे चंदन सिंह जीना के परिसरों से बड़ी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की खबरों के बाद सामने आया है।
हरीश रावत ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट कर अपने फैसले की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वह ऐसा कोई कदम नहीं उठाना चाहते, जिससे पार्टी का भ्रष्टाचार के खिलाफ संघर्ष कमजोर पड़े। रावत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल कोई सरकारी पद नहीं संभाल रहे हैं, इसलिए सरकारी पद से इस्तीफा देने का सवाल नहीं है।
ED की छापेमारी के बाद लिया फैसला
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने चंदन सिंह जीना से जुड़े परिसरों पर छापेमारी की थी। यह कार्रवाई 2016 में उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UKSSSC) की भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं से जुड़ी धन शोधन जांच के तहत की गई।
रावत ने अपने सहयोगी पर लगे किसी भी गलत काम के आरोप से इनकार किया। उन्होंने कहा कि जीना उनके ओएसडी रहे हैं और उन्होंने पार्टी तथा सरकार में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। रावत ने उन्हें मेहनती और विनम्र व्यक्ति बताते हुए कहा कि उन्हें जीना के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर विश्वास नहीं है।
भर्ती घोटाले पर रावत ने जताई चिंता
पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि UKSSSC का गठन राज्य के युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखकर किया गया था। उन्होंने अपने कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनके छोटे कार्यकाल के दौरान विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर भर्ती प्रक्रियाएं आयोजित की गईं। उनके मुताबिक, उस दौरान भर्ती बोर्ड, चिकित्सा भर्ती बोर्ड और शिक्षा भर्ती बोर्ड जैसे संस्थानों का गठन भी किया गया।
रावत ने कहा कि यदि ग्राम सेवकों की भर्ती में ओएमआर शीट से किसी तरह की छेड़छाड़ हुई है, तो यह बेहद गंभीर और शर्मनाक बात होगी। हालांकि, उन्होंने इस तरह के आरोपों पर अविश्वास जताया।
उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में उनकी ओर से कोई गलती हुई है और उससे उत्तराखंड के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा है, तो वह राज्य की जनता से माफी मांगने के लिए तैयार हैं। रावत ने यह भी कहा कि उनके कार्यकाल में 42 हजार से अधिक सरकारी पदों पर भर्तियां की गई थीं।
नियुक्तियों पर भी दी सफाई
हरीश रावत ने UKSSSC के अध्यक्ष की नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा कि संबंधित व्यक्ति का चयन उनके पूर्व सेवा रिकॉर्ड को देखते हुए किया गया था। उन्होंने कहा कि वह समाज के एक ऐसे वर्ग से आते थे, जिसका प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना वह चाहते थे।
रावत ने बताया कि उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री मेजर जनरल भुवन चंद्र खंडूरी (सेवानिवृत्त) ने भी इस नियुक्ति को लेकर उन्हें सलाह दी थी। उन्होंने कहा कि खंडूरी हमेशा भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख के लिए जाने जाते रहे हैं।
रावत ने कहा कि किसी व्यक्ति की नियुक्ति करते समय यह अनुमान लगाना संभव नहीं होता कि भविष्य में वह गलत काम करेगा या नहीं। उन्होंने कहा कि भर्ती और नियुक्ति प्रक्रियाओं में किसी भी तरह की अनियमितता राज्य की आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से खिलवाड़ के समान है।
सबूत देने की अपील
रावत ने कहा कि यदि किसी के पास ऐसी नियुक्तियों में उनके हस्तक्षेप या किसी गलत काम से जुड़े ठोस सबूत हैं, तो उन्हें सीबीआई, ईडी या राज्य पुलिस के सामने पेश किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि यदि जानबूझकर या अनजाने में उनसे ऐसा कोई काम हुआ है, जिससे राज्य के युवाओं के भविष्य को नुकसान पहुंचा हो, तो वह इसके लिए जिम्मेदारी स्वीकार करने को तैयार हैं। उन्होंने दोहराया कि यदि उनसे कोई चूक हुई है, तो कानून के अनुसार उन्हें दंड मिलना चाहिए।
चुनावी माहौल पर भी भाजपा पर निशाना
हरीश रावत ने आगामी उत्तराखंड विधानसभा चुनावों के संदर्भ में कहा कि इस समय पार्टी और उसके कार्यकर्ताओं के सामने बड़ा संघर्ष है। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस भ्रष्टाचार के खिलाफ एकजुट होकर लड़ रही है।
रावत ने भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि चुनाव से पहले केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई के जरिए राजनीतिक माहौल बनाने की कोशिश की जाती है। उन्होंने कहा कि इस बार उनके सहयोगी के घर पर दस्तक देकर एक नई कहानी गढ़ने का प्रयास किया गया है।
उन्होंने कहा कि ऐसे समय में अगर उनके किसी भी कदम से कांग्रेस का संघर्ष कमजोर होता है, तो वह ऐसा बिल्कुल नहीं चाहेंगे। इसी वजह से उन्होंने पार्टी के दोनों पदों से हटने का फैसला किया है।

