जनवाणी ब्यूरो |
लखनऊ: स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर आयुर्वेद इंटर्न छात्रों ने शुक्रवार को राजधानी लखनऊ के हजरतगंज स्थित गांधी प्रतिमा पर प्रदर्शन किया। बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं प्रदर्शन में शामिल हुए। छात्रों ने मौजूदा 7,500 रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड को बढ़ाकर 25 हजार रुपये करने की मांग की।
15 साल से स्टाइपेंड में नहीं हुआ इजाफा
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि वर्ष 2011 से लेकर 2026 तक उनके स्टाइपेंड में एक रुपये की भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। दूसरी ओर एमबीबीएस और बीडीएस इंटर्न के स्टाइपेंड में बढ़ोतरी की जा चुकी है।
छात्रों का कहना है कि इंटर्नशिप के दौरान वे सिर्फ प्रशिक्षण नहीं लेते, बल्कि अस्पताल में मरीजों की देखभाल, इलाज और अन्य जिम्मेदारियों में भी सक्रिय भूमिका निभाते हैं। इसके बावजूद उन्हें लंबे समय से 7,500 रुपये प्रतिमाह ही स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
‘करीब 250 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं’
आयुर्वेद इंटर्न डॉ. प्रखर ने कहा कि नीट के जरिए छात्र आयुर्वेद पाठ्यक्रम में प्रवेश लेते हैं। करीब साढ़े चार साल की पढ़ाई के बाद एक साल की अनिवार्य इंटर्नशिप करनी होती है।
उन्होंने कहा कि 2011 से 2026 हो गया, लेकिन स्टाइपेंड में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई। मौजूदा स्टाइपेंड के हिसाब से इंटर्न को करीब 250 रुपये प्रतिदिन मिलते हैं।
छात्रों के मुताबिक, कई इंटर्न किराये के कमरे में रहकर अपनी पढ़ाई और इंटर्नशिप पूरी कर रहे हैं। मौजूदा स्टाइपेंड में किराया, भोजन और रोजमर्रा के दूसरे खर्च पूरे करना बेहद मुश्किल हो रहा है।
‘मेहनत बराबर तो स्टाइपेंड भी बराबर हो’
प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि वे अस्पतालों में मरीजों की देखभाल और इलाज से जुड़े कामों में जिम्मेदारी निभाते हैं। ऐसे में उन्हें भी सम्मानजनक स्टाइपेंड मिलना चाहिए।
छात्रों का दावा है कि एमबीबीएस इंटर्न का स्टाइपेंड प्रदर्शन के बाद 12 हजार रुपये से बढ़ाकर 25 हजार रुपये किया गया था। इसी आधार पर आयुर्वेद इंटर्न भी 25 हजार रुपये प्रतिमाह स्टाइपेंड की मांग कर रहे हैं।
छात्रों ने कहा कि उनकी मांग किसी विशेष सुविधा की नहीं, बल्कि उनके काम और जिम्मेदारी के अनुरूप सम्मानजनक स्टाइपेंड की है। उन्होंने सरकार से लंबे समय से लंबित मांग पर जल्द निर्णय लेने की अपील की।

