- एआरटीओ में रजिस्ट्रेशन एंबुलेंस के कागजात पूरे नहीं
जनवाणी संवाददाता |
जलालाबाद: नगर पंचायत जलालाबाद का करोड़ों रुपये का वार्षिक बजट है लेकिन उसके पास आपातकाल में अति आवश्यक माने जाने वाली एंबुलेंस को सही कराने के लिए फूटी कौड़ी नहीं है। जिसके चलते एंबुलेंस कबाड़े में खड़ी होकर धूल फांक रही है।
एक दिन पहले कूड़ा गाड़ी में डाक्टर की बहन का शव कूड़ा गाड़ी में श्मशान घाट ले जाने पर नगर पंचायत जलालाबाद का संवेदनहीन चेहरा पूरे देश के सामने आया है। इसके बाद अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालने लगे। लेकिन कड़वा सच यह भी है कि नगर पंचायत के पास अपनी भी एक एंबुलेंस है। यह बात दूसरी है कि एंबुलेंस का रखरखाव नहीं हो पा रहा है।
जिस पर कई सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर महत्वपूर्ण मानी जाने वाली एम्बुलेंस खड़ी धूल क्यों फांक रही है जबकि वैश्विक महामारी में उसकी सख्त जरूरत है। देश-प्रदेश के साथ-साथ नगर भी कोरोना की चपेट में है। बीमार लोगों को चिकित्सा के लिए प्राईवेट एम्बुलेंस बामुश्किल उपलब्ध हो पा रही हैं। इसके अलावा नगर पंचायत अपने नागरिकों को मुहैया कराए जाने वाले संसाधनों का रखरखाव करने में ही असमर्थ क्यों है?
नगर पंचायत के कुछ सभासदों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कई बार एम्बुलेंस को ठीक कराने के लिए कहा गया परन्तु कोई ध्यान नहीं दिया गया, ये कहकर टाल दिया गया कि लोग दुरूपयोग करते हैं। जबकि नगर पंचायत द्वारा ही एम्बुलेंस की सुविध लेने के लिए निर्धारित न्यूनतम किराया भी लिया जाता था परन्तु बाद में खराब होने का हवाला देकर इस सुविधा को बन्द कर दिया गया।
एंबुलेंस के कागजात नहीं पूरे
सहायक संभागीय परिवहन विभाग में जब नगर पंचायत जलालाबाद का नाम लिखी एंबुलेंस के रजिस्ट्रेशन नंबर यूपी 19 टी-0292 की हकीकत का पता लगाया गया तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। एआरटीओ में उक्त नंबर की वैन की फिटनेस, इंश्योरेंस और प्रदूषण काफी समय पहले समाप्त हो चुके हैं।

