- शासन के रेट निर्धारित करने के बाद भी लिए जा रहे अवैध रूप से पैसे
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा भले ही गरीबों को बेहतर सुविधाएं दिलाने की दावें किए जा रहे हो, लेकिन जमीनी स्तर पर नजारा उसके उलट ही दिखाई देते हैं। जिसकी वानगी मेडिकल कॉलेज में देखने को मिलती है। तीमारदार मेडिकल प्रशासन पर आरोप लगाते रहते है। अस्पताल स्टॉफ द्वारा मरीजों की देखभाल सहीं से नहीं की जा रही।
वहीं, दूसरी ओर समाजवादी सरकार द्वारा गरीबों को मुफ्त में अस्पताल तक पहुंचाने के लिए एंबुलेंस शुुरु की थी। ताकि गरीब व्यक्ति भी उस एंबुलेंस का उपयोग कर अस्पताल में इलाज कराने के आ सकें । जिसको भाजपा सरकार ने और आगे बढ़ाया। मगर अब गरीबों को सरकारी एंबुलेंस समय पर मिल नहीं पाती। जिस कारण वह प्राइवेट एंबुलेंस की राह देखते हैं।
सरकारी एंबुलेंस की जगह प्राइवेट की भरमार
मेडिकल में हर रोज बड़ी संख्या में मरीज आ रहे हैं। जिस कारण मरीजों को सरकारी एंबुलेंस मिल नहीं पाती। वहीं, दूसरी ओर मेडिकल में प्राइवेट एंबुलेंस बेसुमार खड़ी रहती है। जो मरीजों से मनमाने पैसे की वसूली करते हैं। जिसका उदाहरण रविवार को भी देखने को मिला था। मेडिकल से सुरंजकुड़ तक मरीज को लाने के लिए छह हजार रुपये की डिमांड कर दी थी।
इसी तरह से हर रोज तीमारदारों से प्राइवेंट एंबुलेंस वाले अवैध रूप से पैसे वसूल रहे है। मेडिकल से अपने मरीजों को घर ले जाने वालें तीमारदार अमरीश ने बताया कि इतना महंगा तो हवाई जहाज का किराया भी नहीं होता जितना किराया एंबुलेंस वाले मांगते है। इतना हीं नहीं तीमारदार राजेश ने बताया कि सभी प्राइवेट एंबुलेंस वाले एक सा ही किराया बताते है मजबूर होकर जाना पड़ता है।
इस तरह के हालात तब देखने को मिल रहै जब प्रदेश सरकार द्वारा प्राइवेट एंबुलेंस के किराया निर्धारित कर दिया है, लेकिन उसका पालन सिर्फ कागजों मेें ही हो रहा है। एंबुलेंस संचालक इस महामारी में भी लोगों को लूटने लगे हैं।

