Monday, June 22, 2026
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कालाबाजारी पर अंकुश, लेकिन टूटती सांसों का क्या ?

प्रशासन ने आॅक्सीजन प्लांटों पर आम आदमी के लिये आपूर्ति बंद कराकर यहां आॅक्सीजन की कालाबाजारी पर तो अंकुश लगा दिया है, लेकिन टूटती सांसों का क्या होगा? इस बारे में सोचना भूल गया। प्रशासन खाली सिलेंडर जमा कराने के बाद 24 से 48 घंटों में लोगों को आॅक्सीजन सिलेंडर उपलब्ध करा रहा है, लेकिन ऐसे में उन मरीजों का क्या होगा? जो मरीज आखिरी सांसें गिन रहा है। वह इस इंतजार में है कि उसे तत्काल आॅक्सीजन मिल जायेगी और वह बच जायेगा। अस्पताल संचालक अपने हाथ पहले ही उठा चुके हैं, कहते हैं कि आॅक्सीजन ले आओ तो भर्ती करेंगे। ऐसे में उन मरीजों का क्या होगा जो अस्पताल के गेट पर अपने परिजन का इंतजार कर रहे हैं कि वह आॅक्सीजन लेकर आयेगा और मुझे भर्ती कराया जायेगा। यह एक बड़ा सवाल है कि जिन लोगों को अपने जिंदगी बचाने को तत्काल आॅक्सीजन की आवश्यकता है उन्हें किस तरह आॅक्सीजन उपलब्ध हो पायेगी, क्या प्रशासन इस ओर ध्यान दे पायेगा यह अपने आपमें ही एक बड़ा सवाल है।

  • आॅक्सीजन स्टॉक का चल रहा खेल, लोग घरों में रख रहे हैं आॅक्सीजन सिलेंडर

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: प्रशासन की ओर से आॅक्सीजन प्लांटों पर आम आदमी के लिये आपूर्ति बंद कर दी गई है। इससे आॅक्सीजन की कालाबाजारी पर अंकुश लगा रहा है। आॅक्सीजन की कालाबाजारी का खेल खुलकर चल रहा था, लोग आॅक्सीजन का स्टॉक कर रहे थे और उन लोगों को आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही थी जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। अब प्लांटों पर आपूर्ति बंद होने से राहत की उम्मीद है।

बता दे कि प्लांटों पर आॅक्सीजन आपूर्ति में खुलकर खेल चल रहा था। बिना नंबर के ही लोगों को अतिरिक्त पैसे लेकर आॅक्सीजन दी जा रही थी। अग्रवाल गैस प्लांट और माहेश्वरी प्लांट पर लगातार यह शिकायतें मिल रही थी। जो लोग दिन रात लाइन में लग रहे थे उन्हें आॅक्सीजन नहीं मिल पा रही थी जो लोग गाड़ियों में आ रहे थे वह सीधे फोन पर बात कराकर आॅक्सीजन ले जा रहे थे।

लाइन में लगने वाले लोगों ने भी इसे धंधा बना लिया था। लोग लाइन में लग-लग कर रुपये कमा रहे थे। आॅक्सीजन सिलेंडर लेने आने वाले लोग अपनी बजाये दूसरों को लाइन में लगा रहे थे जिसके ऐवज में वह पांच सौ रुपये तक रहे थे। इसके अलावा यहां लोग आॅक्सीजन सिलेंडर 600 रुपये में लेकर बाहर निकलते ही उसे 2 हजार से तीन हजार में बेच रहे थे।

आॅक्सीजन सिलेंडर 10 हजार रुपये तक में बेचे जा रहे थे इसकी शिकायत लगातार प्रशासन को मिल रही थी। अब आॅक्सीजन की इस कालाबाजारी पर पूरी तरह से अंकुश लग जायेगा। आॅक्सीजन की कमी को लेकर लोगों की सांसे टूटती जा रही हैं। अस्पतालों पर लोगों को विश्वास नहीं रह गया है। जिसके चलते लोगों ने पहले से ही आॅक्सीजन की आपूर्ति करनी शुरू कर दी थी।

शहर में छोटे से लेकर बड़े बड़े उद्योगपतियों ने आॅक्सीजन लेकर स्टॉक करके रखनी शुरू कर दी। हर किसी को डर सता रहा है कि न जाने कब उन्हें या उनके परिवार में किसी को आॅक्सीजन की आवश्यकता पड़ जाये। आॅक्सीजन स्टॉक किये जाने को लेकर ही प्लांटों पर आॅक्सीजन की मारामारी मची।

बिना यूज के 10 से 15 दिन ही चल पायेगा सिलेंडर

जानकारों की मानें तो आप आॅक्सीजन सिलेंडर को ज्यादा दिनों तक स्टॉक करके नहीं रख सकते। अगर उसका इस्तेमाल हो रहा है तो ठीक है नहीं तो आप एक सिलेंडर को ज्यादा दिन नहीं रख पाओगे। अग्रवाल आॅक्सीजन प्लांट पर कार्य करने वाले अमित कुमार ने बताया कि अस्पतालों के पास आॅक्सीजन सिलेंडर को रखने की व्यवस्था और तरीका होता है।

वह कई दिनों तक सिलेंडर को रख सकते हैं। फ्यूल मीटर से वह उसकी स्थिति को जांचते रहते हैं। फ्यूल मीटर से पता चल जाता है कि आपके सिलेंडर में कितनी आॅक्सीजन बची है। लेकिन लोगों ने जो अपने घरों में आॅक्सीजन सिलेंडर जमा करे हैं वह ठीक नहीं है। आॅक्सीजन सिलेंडर की लिकेज का आम आदमी पता नहीं चला सकेगा। यह सिलेंडर ज्यादा से ज्यादा 10 या 15 दिन तक ही रखा रहेगा उसके बाद खाली हो जायेगा और लोगों को पता भी नहीं चल पायेगा।

प्लांटों पर आम आदमी के लिये आॅक्सीजन की आपूर्ति बंद

आम आदमी के लिये आॅक्सीजन की आपूर्ति आॅक्सीजन प्लांटों से बंद कर दी गई है। यहां आॅक्सीजन लेने पहुंचे सभी लोगों को मना कर दिया गया। इसे लेकर हंगामा भी हुआ, लेकिन प्लांटों पर मौजूद पुलिस ने लोगों को वापस लौटाया। अस्पतालों में मरीज को भर्ती करने से पहले आॅक्सीजन की मांग की जा रही है। परिजन आॅक्सीजन का इंतजाम करने के लिये प्लांटों पर आस लगाये थे, लेकिन अब यहां आम आदमी के लिये आॅक्सीजन आपूर्ति बंद कर दी गई है।

शहर में सभी प्लांटों पर अब सिर्फ अस्पतालों को ही आॅक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही है। मेरठ में पांच प्लांटों पर आॅक्सीजन आपूर्ति कराई जा रही है। इनमें से हापुड़ रोड स्थित मेरठ मेडिआॅक्सी प्लांट पर अस्पतालों को आॅक्सीजन दी जा रही थी। इसके परतापुर स्थित कंसल और रिठानी रोड स्थित कृष्णा एयर प्रोडक्ट पर भी अस्पतालों को आॅक्सीजन दी जा रही थी।

माहेश्वरी आॅक्सीजन प्लांट और उद्योग पुरम स्थित अग्रवाल आॅक्सीजन प्लांट पर आम आदमी को आॅक्सीजन उपलब्ध कराई जा रही थी। जिसे लेकर यहां लाइन लगी हुर्इं थी। लोग सुबह ही पहुंचकर आॅक्सीजन के लिये लाइन में लग रहे थे, लेकिन कई-कई घंटे इंतजार करने और लाइन में लगने के बाद ही उन्हें आॅक्सीजन सिलेंडर मिल पा रहा था, लेकिन अब इन प्लांटों पर आम आदमी के लिये आक्सीजन की आपूर्ति बंद कर दी गई है। अब सिर्फ प्रशासन की ओर से बनाये गये केन्द्रों पर ही आम आदमियों को आॅक्सीजन की आपूर्ति कराई जाएगी।

केन्द्रों पर आम लोगों को दिये आॅक्सीजन सिलेंडर

प्रशासन की ओर से बनाये गये आॅक्सीजन आपूर्ति केन्द्रों पर सोमवार को उन लोगों को आॅक्सीजन सिलेंडर दिये गये जिन्होंने रविवार को आॅक्सीजन सिलेंडर जमा कराये थे। सोमवार को भी तीनों केन्द्रों पर आॅक्सीजन सिलेंडर जमा कराने वालों की संख्या 100 से कम ही रही। तीनों केन्द्रों पर 95 लोगों ने आॅक्सीजन सिलेंडर जमा कराये।

अब आॅक्सीजनी की आपूर्ति सभी प्लांटों पर आम आदमी के लिये बंद कर दी गई है। प्रशासन की ओर से बनाये गये तीनों केन्द्रों पर ही आम आदमी को आॅक्सीजन की आपूर्ति कराई जा रही है। सोमवार को तीनों केन्द्रों पर उन लोगों को आॅक्सीजन सिलेंडर वितरित किये गये।

जिन्होंने रविवार को आॅक्सीजन लेने के लिये अपने खाली सिलेंडर जमा कराये थे। रविवार को हालांकि यह संख्या काफी कम रही थी। यहां तीनों केन्द्रों पर रविवार को कुल 67 लोगों ने अपने खाली सिलेंडर जमा कराये थे। सोमवार को पहले उन 67 लोगों को ही आॅक्सीजन से भरे हुए सिलेंडर वितरित किये गये। सिलेंडर पाने के बाद लोगों को चेहरों पर खुशी देखने को मिली।

कम लोगों ने आॅक्सीजन के लिये जमा कराये सिलेंडर

सोमवार को आॅक्सीजन के लिये सिलेंडर जमा कराने वालों की संख्या रविवार से ज्यादा रही। अब उम्मीद की जा रही है कि प्लांटों पर आॅक्सीजन आपूर्ति बंद किये जाने के बाद से केन्द्रों पर भीड़ आनी शुरू हो जायेगी। सोमवार को परतापुर स्थित केन्द्र पर 60 लोगों ने आॅक्सीजन लेने के लिये अपने सिलेंडर जमा कराये। कंकरखेड़ा स्थित केन्द्र पर 16 लोगों ने सिलेंडर जमा कराये और जागृति विहार स्थित सामुदायिक केन्द्र पर 19 लोगों ने आॅक्सीजन लेने के लिये अपने सिलेंडर जमा कराये। प्रशासन की इस पहले से लोग काफी खुश हैं। लोगों का कहना है कि इससे फर्जी तरीके से आॅक्सीजन लेने वालों पर अंकुश लेगेगा।

निजी अस्पताल सिलेंडर मांगें तो कमिश्नर से करें शिकायत

कोरोना के इलाज में निजी अस्पतालों की मनमर्जी और अंधी कमाई की बार-बार शिकायतें मिलने के बाद कमिश्नर कार्यालय में कंट्रोल रूम बना दिया गया है। कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने कहा है जो भी निजी अस्पताल मरीज से आॅक्सिजन का सिलेंडर लाने और भर्ती कराने के नाम पर पैसे मांगे उसकी शिकायत तुरंत कंट्रोल रूम में करे। ऐसे लोगो के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।

कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह ने कहा कि निजी अस्पताल दवाओं के ओवर चार्ज कर रहे हैं। रेमडेसिविर इंजेक्शन की डिमांड कर रहे हैं। इससे मरीजों के परिजन बेहद परेशान है। मरीजों से कहा जा रहा कि खुद आॅक्सीजन का सिलेंडर लेकर आओ। इस तरह की शिकायतें अगर मिलेंगी तो सम्बन्धित अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

कमिश्नर कंट्रोल रूम नंबर

0121-2656878, इसमें वरिष्ठ प्रशानिक अधिकारी सतीश चंद्र त्यागी और सांख्य अधिकारी एसपी नैन शिकायतें सुनेंगे।

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