- डेंगू और वायरल की मार से जूझ रहे मरीज
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: डेंगू और वायरल का कहर जारी है, दिन-पर-दिन मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है, लेकिन जिला अस्पताल में इसके लिये प्रभावी इंतजाम तक नहीं किये गये हैं। यहां पर 30 बेड हैं, जोकि फुल हैं और मरीजों की संख्या कहीं ज्यादा है। ऐसे में मरीजों को यहां भर्ती होने के लिये परेशान होना पड़ रहा है।
इलाज के अभाव में मरीज परेशान हैं और जिला अस्पताल के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन उनकी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। जनवाणी संवाददाता ने शुक्रवार को जिला अस्पताल में पहुंचकर यहां मरीजों से बात की और यहां को हालातों को जानने का प्रयास किया। जिसमें जिला अस्पताल की लापरवाही ही सारी पोल खुलकर सामने आई।
मौसम में आए बदलाव के कारण बुखार और डेंगू का प्रकोप और अधिक बढ़ गया है। अस्पतालों में डेंगू बुखार के मरीजों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। डेंगू के डंक से हर कोई परेशान है। इस कारण ओपीडी में मरीजों की संख्या दो गुना तक बढ़ गई है। इनमें उल्टी, खांसी, जुखाम, बुखार और डायरिया के मरीजों की संख्या सबसे ज्यादा है। वहीं, जिला अस्पताल में मरीजों के पहुंचने की संख्या में भी काफी इजाफा हुआ है।
रोजाना इमरजेंसी में भी लगभग 40 से 50 मरीज आ रहे हैं, लेकिन जिला अस्पताल में अव्यवस्था का आलम है। अस्पताल में जितने मरीज आ रहें है, उसकी तुलना में बेड़ काफी कम पड़ गए हैं। जिस कारण मरीजों को इलाज के लिए काफी मश्क्कत करनी पड़ रही है।

कोरोना की रफ्तार अभी थमी नहीं थी कि डेंगू का खौफ शहरवासियों को सताने लगा है। डेंगू का डंक हर उम्न के लोगों को सता रहा है। पिछले 15 दिन में लगभग हर दिन औसतन 25 डेंगू पीड़ित मरीज सामने आ रहे हैं। अब तो यह जिला अस्पताल को भी चुनौती देने लगा है। इसका कारण यह है कि जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों की तुलना में बेड कम हैं। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान आक्सीजन से लेकर बेड की कमी साफ तौर पर देखी गई थी। वहीं, अब डेंगू के केस बढ़ने के साथ ही दोबारा अस्पताल में बेड की कमी होने लगी है।
जिसका नतीजा यह है कि पॉजिटिव मरीजों को भर्ती करने से मना किया जा रहा है। बेड की कमी से जनता बेहाल है। वहीं, जिला अस्पताल की अव्यवस्था से मरीजों और तीमारदार में काफी नाराजगी है। मरीजों का कहना है कि उन्हें इलाज के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा है। जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों को सुविधा न मिलना बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। बेड के लिए लोगों को कैसे मना किया जा सकता है। अस्पताल मैनेजमेंट की व्यवस्था बेहद खराब और बदतर है। अस्पताल में डेंगू वार्ड फुल है। यही नहीं, बल्कि डेंगू वार्ड में अन्य बीमारी से पीड़ित मरीजों को भर्ती करने की बात भी कही। वहीं, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डेंगू के अचानक इतने केस बढ जाएंगे इसका अंदाजा नहीं था।
पिछले दो साल की रिपोर्ट को देखें तो लगभग 100 के आसपास ही डेंगू के मरीज मिले थे। इसको देखते हुए शुरुआत में छह बेड को रिजर्व रखा गया था। अब कुल 35 बेड हैं, जिसमें पांच को रिजर्व रखा गया है। डेंगू वार्ड में कुल 30 मरीज भर्ती हैं। सभी मरीज पाजिटिव हैं। वार्ड में सभी बेड फुल हैं। अस्पताल में अने वाले एक्टिव मरीजों की संख्या दिन पर दिन लगातार बढती ही जा रही है। ऐसे में यदि नए मरीज को लाया जाए तो उसे भर्ती करने के लिए वार्ड में जगह नहीं है। जिससे उन्हें वापस लौटाया जा रहा है।
इसके साथ ही अस्पताल प्रबंधन ने वार्ड में संसाधनों की कमी की भी बात कही। जिला अस्पताल पहुंची परतापुर गांव निवासी शबाना ने बताया कि अस्पताल में भर्ती करने के बजाय उसे इमरजेंसी वार्ड के गेट से ही लौटा दिया गया। महिला के परिजनों के मुताबिक इमरजेंसी वार्ड में बेड न होने का हवाला देते हुए महिला को भर्ती करने से मना कर दिया गया।

