Monday, March 30, 2026
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गायक सुखविंदर सिंह बने पंजाब के राजगायक

जनवाणी ब्यूरो |

नई दिल्ली: प्रसिद्ध गायक सुखविंदर सिंह को पंजाब का राजगायक घोषित किया गया है। श्री चमकौर साहिब में दास्तान-ए-शहादत मेमोरियल में मुख्यमंत्री चरणजीत चन्नी ने यह एलान किया।

सुखविंदर सिंह के अलावा कवि सुरजीत पातर के लिए भी शिरोमणि साहित्यकार के पुरस्कार का एलान किया गया है। सरकार की तरफ से दोनों को कैबिनेट रैंक दिया जाएगा।

सीएम चन्नी ने कहा कि दोनों हस्तियों  ने सिख इतिहास को यादगार बनाने में बड़ा योगदान दिया है, जिस वजह से पंजाब सरकार उन्हें यह सम्मान दे रही है।

सिख धर्म के पहले गुरु व संस्थापक श्री गुरु नानक देव जी के प्रकाश पर्व के मौके पर शहीदों की धरती श्री चमकौर साहिब में दो बड़े प्रोजेक्ट लोगों को समर्पित किए गए।

पंजाब के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित और मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी श्री चमकौर साहिब के ऐतिहासिक गुरुद्वारा कतलगढ़ साहिब में नतमस्तक हुए और इसके बाद सौंदर्यीकरण प्रोजेक्ट के अधीन बनाई गई हेरिटेज स्ट्रीट का उद्घाटन किया।

इस दौरान मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने लोगों को गुरु नानक देव जी के गुरुपर्व की बधाई देते कहा कि यह प्रोजेक्ट उनकी जिंदगी का अहम सपना था और आज इस प्रोजेक्ट को लोगों को समर्पित करके उनको सबसे बड़ी खुशी और सुकून मिला है।

श्री चमकौर साहिब के ऐतिहासिक गुरुद्वारों को आपस में जोड़ती इस हेरिटेज स्ट्रीट में सभी दुकानों को एक ही रंग में रंगा गया है और यह स्ट्रीट अमृतसर साहिब में बनाए गए विरासती मार्ग की तर्ज पर बनाई गई है।

इसके बाद राज्यपाल और मुख्यमंत्री नगर कीर्तन में शामिल हुए। हाथी और घोड़ों के साथ सजाए गए इस नगर कीर्तन के साथ दोनों शख्सियतें सिख धर्म के इतिहास को दुनिया तक पहुंचाने के लिए बनाए गए दास्तान-ए-शहादत विशाल पार्क में पहुंचीं और इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन किया गया।

इस आयोजन में निहंग सिंह जत्थेबंदियों और संत समाज समेत सिख पंथ की कई बड़ी शख्सियतें शामिल हुईं और इस प्रोजेक्ट को देखा। यहां बनाईं गईं 11 गैलरियों में आधुनिक तरीके के साथ फिल्माए गए सिख धर्म के इतिहास को दुनिया तक पहुंचाने का यत्न किया गया है।

पहली पातशाही श्री गुरु नानक देव जी के जीवन से ले कर दस गुरु साहिबानों के जीवन और भाई जैता जी की तरफ से गुरु तेग बहादुर साहिब के लाए गए शीश के दृश्यों को भी बड़े ही सुंदर तरीकों के साथ फिल्माया गया है।

दशमेश पिता श्री गुरु गोबिंद सिंह जी के साहिबजादे और सिंहों की शहादतों के बाद बाबा बंदा सिंह बहादुर की तरफ से सरहिंद पर की गई फतेह के दृश्य भी इन गैलरियों में दिखाए जा रहे हैं। इस दौरान आईं धार्मिक और राजनीतिक शख्सियतों ने भी इस प्रोजेक्ट की प्रशंसा की।

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