जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: गांधी आश्रम की प्राचीन बिल्डिंग अतीत की यादे समेटे हुए हैं। कई नामचीन हस्तियां यहां आई। कई दिन रुकी भी। यह सब अतीत की गवाह भी बन गई, लेकिन अतीत की इस दिखाई दे रही राष्ट्रीय धरोहर को अब नष्ट किया जा रहा है। यह शहर के लिए ही नहीं, बल्कि पश्चिमी यूपी के लिए भी दु:खद हैं। रविवार को छुट्टी का दिन था, सरकारी अफसरों के लिए। इससे बड़ा मौका और क्या हो सकता है, अतीत की यादों को समेटे इस प्राचीन बिल्डिंग को गिराने का।
अफसरशाही तो छुट्टी पर थी, ऐसे में गांधी आश्रम की उस बिल्डिंग पर हथोडे चल रहे थे, जो ऐतिहासिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। महत्वपूर्ण बात यह है कि गांधी आश्रम समिति के पदाधिकारी ही चंद रुपयों की खातिर इतिहास को मिटाने पर तुले हैं। देश भर में गांधी जी की स्मृति को संजोकर रखा जा रहा है, लेकिन क्रांतिधरा पर ही इतिहास के पन्नों में दर्ज हो चुके मेरठ के गांधी आश्रम की बिल्डिंग को ही क्यों जमीदोंज किया जा रहा हैं? बड़ा सवाल यह भी है कि बिल्डिंग को जमीदोंज किया जा रहा है और शहर की तमाम सामाजिक संस्थाएं और राजनीतिक दलों के नेता चुप्पी लगाये बैठे है।

क्या इसका इंतजार किया जा रहा है कि गांधी जी की स्मृतियां शहर से कब खत्म हो? हम बात कर रहे है गढ़ रोड स्थित प्राचीन गांधी आश्रम की। यहां आश्रम के ही एक हिस्से में शहीदों की वीरगाथाएं भी अंकित हैं। यह बताने के लिए कि क्रांतिधरा ने अंग्रेजों से किस तरह से लोहा लेते हुए शहीद हो गए, लेकिन उसी पवित्र जगह पर बनी बिल्डिंग को किस तरह से जमींदोज किया जा रहा हैं, इसकी तस्वीरों को ‘जनवाणी’ फोटो जर्नलिस्ट ने अपने कैमरे में कैद कर लिया।
यह सब खेल गेट बंद कर संडे के दिन चल रहा था। जो माफिया इस जमीन को हथियाने के लिए हर रोज नई प्लानिंग बना रहे हैं, वो भी खड़े होकर बिल्डिंग पर हथोड़ा चलावा रहे थे। देखिये…इस बिल्डिंग को किस तरह से बनाया गया होगा, उनके बड़े सपने रहे होंगे, लेकिन कभी यह नहीं सोचा होगा कि कुछ लोग चंद रुपयों की खातिर इस बिल्डिंग को ही नीलाम कर देंगे और पूरा शहर खड़े होकर देखता रहेगा।
वर्तमान में तो कुछ ऐसा ही हो रहा है। गांधी आश्रम की प्राचीन बिल्डिंग पर हर रोज हथोड़ा चलाकर बिल्डिंग की प्रचीनता की निशानी को तोड़ा जा रहा है। बिल्डिंग की मरम्मत की जा सकती थी, लेकिन भाजपा सरकार में गांधी आश्रम टूट रहा है। बाहरी तत्वों ने इसकी बोली लगा दी हैं, वो इस प्राचीन बिल्डिंग को जमींदोज कर अपना कारोबार करेंगे। राष्टÑीय धरोहर को तोड़कर यहां पर बिजिनेस की तलाश की जा रही है।
क्योंकि जब कृपलानी जी ने इस गांधी आश्रम को स्थापित किया था, तब शायद इसकी कल्पना भी नहीं की थी कि उस गांधी आश्रम को वहीं समिति नेस्तानाबूत कर देगी, जिसका गठन उन्होंने इसको आगे बढ़ाने के लिए किया था। अगली पीढी कैसे जानेगी मेरठ के गांधी आश्रम के बारे में? गांधी के भारी-भरकम जीवन के बारे में कैसे बतायेंगे? मेरठ के योगदान की गाथा का कैसे पता चलेगा? इस बिल्डिंग के जमींदोज के साथ ही गांधी जी के जीवन की तमाम गाथाएं सिर्फ कहानी बनकर रह जाएगी।

