Monday, May 11, 2026
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स्वतंत्रता से सरकार बनाने तक अव्वल रहा भामौरी

  • राजनीतिक गलियारों में खून से लिखी थी आजादी की पटकथा, भामौरी आए थे पं. जवाहर लाल नेहरु
  • लगातार तीन बार विधायक रहे भामौरी के जमादार सिंह

जनवाणी संवाददाता |

सरधना: देश की आजादी और सरकार बनाने का रास्ता भी गांवों की तंग गलियों से गुजरा है। उन्हीं गांवों में से एक सरधना का शहीद ग्राम भामौरी इस बात को साबित करता है। बात चाहे देश की आजादी की हो या चुनाव में भागेदारी निभाकर सरकार बनाने की। इस गांव का रुतबा इतना ऊंचा है कि देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु भी यहां की माटी को नमन करने आ चुके हैं। इस गांव ने राजनीतिक गलियारों में अपना ऐसा सिपाही सूबे को दिया जो एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन बार विधायक रहा।

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शहीद ग्राम भामौरी सरधना तहसील से करीब आठ किमी की दूरी पर है। इस गांव की जनसंख्या करीब सात हजार और वोट 42 सौ के करीब है। भामौरी का नाम शहीद ग्राम इसलिए पड़ा, क्योंकि स्वतंत्रता संग्राम में इस गांव के लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। यहां के पांच वीर जवान देश की खातिर शहीद हो गए थे। भामौरी ने देश को आजाद कराने में जितनी हिस्सेदारी निभाई है, उतना ही फर्ज आजाद देश की सरकार बनाने में निभाया है। इसके लिए भामौरी ने अपना एक लाल विधानसभा भेजा। जिसका नाम है जमादार सिंह।

क्योंकि भामौरी के जमादार सिंह एक नहीं तीन बार विधायक रहे। दो बार निर्दलीय और एक बार कांग्रेस के झंडे के साथ विधानसभा तक पहुंचने का काम किया। जमदार सिंह की राजनीतिक विरासत संभाल रहे उनके भतीजे आनंद सिंह बताते हैं कि देशभक्ति और राजनीतिक तौर पर भामौरी अलग पहचान रखता है। आजादी के बाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरु भी भामौरी आए थे। सरधना विधानसभा में जीत का जायका चखने के लिए नेताओं को भामौरी के रास्ते से होकर गुजरना पड़ता है। इस बार भी विधानसभा चुनाव में भामौरी अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए पूरी तरह तैयार है।

जमदार सिंह का भी अलग इतिहास

भामौरी गांव के जमदार सिंह का भी अलग ही इतिहास है। जमदार सिंह एक बार नहीं, बल्कि लगातार तीन बार विधायक बने। उस समय सरधना विधानसभा की जगह बरनावा विधानसभा होती थी। जहां से जमदार सिंह एक बार निर्दलीय, दूसरी बार आजाद पार्टी व तीसरी बार सरधना विधानसभा बनी तो यहां से कांग्रेस के झंडे से चुनाव लड़ा। उसमें भी लगातार तीसरी बार जमादार सिंह विधायक बनकर विधानसभा में पहुंचे थे।

इसके बाद उन्होंने राजनीति से सन्यास ले लिया था। उनकी राजनीतिक विरासत को उनके भतीजे आनंद सिंह ने संभाला। आनंद सिंह भी ग्राम प्रधान से लेकर दो बार जिला पंचायत सदस्य बने। इसके बाद उनकी माता जिला पंचायत और फिर पुत्रवधु ग्राम प्रधान बनी।

जब भामौरी तक पहुंची बिजली

आनंद सिंह बताते हैं कि उस समय भामौरी व आसपास के क्षेत्र में बिजली नहीं थी। खेती के लिए नलकूप तक नहीं था। जमदार सिंह ने विधानसभा में आवाज उठाई और क्षेत्र को बरनावा की ओर से बिजली सप्लाई से जोड़ने का काम किया था। साथ ही खेतों की सिंचाई के लिए ट्यूबवेल लगवाई। इन सभी कामों को लेकर आज भी जमदार सिंह को याद किया जाता है।

भामौरी की जनसंख्या, वोट

शहीद ग्राम भामौरी की कुल संख्या करीब छह हजार और वोट की बात करें तो 42 सौ प्लस वोटर भामौरी में हैं।

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